शी जिनपिंग और पीएम मोदी के बीच चर्चा में कश्मीर नहीं होगा अहम मसला: चीन विदेश मंत्री

उन्होंने कहा कि "मुझे उम्मीद है कि भारत और पाकिस्तान दोनों चीन के अच्छे पड़ोसी हैं, वे एक दूसरे के साथ शांतिपूर्ण तरीके से बात कर सकते हैं, दोनों देश बातचीत के माध्यम से शांति से मुद्दों को हल करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करें.

चीन विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच भारत में अगले महीने होने वाली अनौपचारिक बातचीत के दौरान कश्मीर एक “प्रमुख विषय” नहीं हो सकता है. इसके बजाय, भारत और चीन के बीच सीमा मुद्दे और अधिक “रणनीतिक सोच” को शामिल करने वाले मुद्दों पर बातचीत का हो सकती है. पिछले हफ्ते लद्दाख में भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने हो गए थे, जिसके बाद दोनों पक्षों की सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की चर्चा के बाद मामला ठंडा हुआ.

इस तरह के अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के लिए, मुझे लगता है कि नेताओं को ज्यादा समय देने के लिए बेहतर है कि वे जो भी चर्चा करना चाहते हैं उस पर छोड़ दिया जाए. मुझे नहीं लगता है कि कश्मीर जैसा मसला इस वार्ता में एक प्रमुख विषय होगा, ये मेरी समझ है, लेकिन नेताओं के लिए, वे अपनी पसंद के बारे में बात करने के लिए स्वतंत्र होंगे.

हम युद्ध नहीं देखना चाहते हैं

हालांकि रिपोर्ट्स में कहा गया है कि मोदी और शी के बीच दूसरी अनौपचारिक शिखर बैठक चेन्नई के पास 10-12 अक्टूबर के बीच होने की संभावना है, हुआ ने कहा कि वह बैठक के विवरण को बताने की स्थिति में नहीं हैं. कश्मीर मसले पर चीन की स्थिति से संबंधित मुद्दे का जवाब देते हुए हुआ ने कहा कि चीन की “आधिकारिक स्थिति” यह बनाए रखने के लिए थी कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच का मुद्दा है और “हम युद्ध नहीं देखना चाहते हैं.”

उन्होंने कहा कि “मुझे उम्मीद है कि भारत और पाकिस्तान दोनों चीन के अच्छे पड़ोसी हैं, वे एक दूसरे के साथ शांतिपूर्ण तरीके से बात कर सकते हैं, दोनों देश बातचीत के माध्यम से शांति से मुद्दों को हल करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करें. भारत और पाकिस्तान पड़ोसी हैं, कोई कारण नहीं है कि वे एक-दूसरे के साथ बहुत अच्छी तरह से नहीं मिल सकते. हमें उम्मीद है कि इस मुद्दे को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जा सकता है न कि युद्ध के जरिए.”

भारत चीन के बीच अच्छा तंत्र बना है

भारत और चीन के बीच सीमा से जुड़े मुद्दों के बारे में हुआ ने कहा, “मैं समझती हूं कि हमने काफी अच्छा तंत्र स्थापित किया है और दोनों पक्षों के पास संचार के लिए बहुत उपयोगी और सहज चैनल भी हैं. एक बात यह है कि चीन ने हमेशा अपनी बात रखी है और हम कभी भी ऐसा कुछ नहीं करना चाहते हैं जिससे चीन और भारत के बीच आपसी विश्वास को नुकसान हो. हम भारतीय पक्ष से भी यही सद्भावना दिखाने की उम्मीद करते हैं.”

उन्होंने कहा कि यह आवश्यक था कि “साथ मिलकर सुरक्षा, रखरखाव, और यह सुनिश्चित करने के लिए कि सीमावर्ती क्षेत्रों को शांतिपूर्ण और स्थिर रखा जाए ताकि हम आपसी विश्वास बढ़ा सकें और उन चीजों पर ध्यान केंद्रित कर सकें जो हमारे सहयोग को गहरा और व्यापक बनाती हैं. इसलिए दो लोग इस प्रकार के उच्च स्तरीय आपसी विश्वास और सहयोग से लाभ उठा सकते हैं.”

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