कश्मीर यूथ मूवमेंट ने उठाई LGBT के हक में आवाज, Social Media पर छिड़ी बहस

केवाईएम (KYM) के संस्थापक एमबीए के छात्र राहुल वाकिल ने कहा कि होमोफोबिया कश्मीर में एक गहरी जड़ बना चुका है और इससे निपटने की जरूरत है.

प्रवासी युवा कश्मीरी पंडितों के एक समूह कश्मीर युवा मूवमेंट (KYM) द्वारा श्रीनगर में LGBT समुदाय के समर्थन में प्रस्तावित मार्च ने सोशल मीडिया पर विचार के समर्थकों और विरोधियों के बीच तीखी बहस छेड़ दी है. एलजीबीटी समुदाय के हितों को बढ़ावा देने वाला यह समूह दिल्ली, मुंबई, पुणे और जम्मू और कश्मीर में स्थित है.

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समूह की योजना जून महीने में श्रीनगर के लाल चौक पर मार्च आयोजित करने की थी, लेकिन कोविड-19 (Covid-19) संक्रमण के बढ़ते प्रकोप के चलते कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया है. हालांकि, इस विचार ने सोशल मीडिया (Social Media) पर इसके समर्थकों और विरोधियों के बीच तीखी बहस छेड़ दी है. दोनों ही पक्ष आक्रामक रूप से अपनी बात पर कायम हैं.

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

इस कदम का समर्थन करने वाले एक सोशल मीडिया यूजर ने कहा, “खैर मुबारक, हम आपका स्वागत खुले हाथों से करते हैं!आपके लिए और अधिक शक्ति! आपको अभी एक लंबा रास्ता तय करना है! यह सिर्फ शुरुआत है.”

अन्य शख्स ने कहा, “आप प्रतिदिन जो समर्थन हमें दिखाते हैं उसके लिए प्यार! शांति मार्च में आने के लिए धन्यवाद. हम निश्चित रूप से कश्मीर में एक गौरव मार्च करेंगे.”

इस कदम के विरोधियों ने भी इतने ही तेजी से इसके विरोध में अपनी अवाज बुलंद की है.

एक ने कहा, “यदि आपकी स्वतंत्रता का विचार दूसरे के उत्पीड़न के चंगुल में है, तो हम उस स्वतंत्रता को अस्वीकार करते हैं. होमोफोबिक, यह कलंक कश्मीर में नहीं आना चाहिए. उनका खतरनाक तरीके से ब्रेनवाश किया गया है.”

कश्मीर में होमोफोबिया के खिलाफ जंग

केवाईएम (KVM) के संस्थापक एमबीए के छात्र राहुल वाकिल ने कहा कि होमोफोबिया कश्मीर में एक गहरी जड़ बना चुका है और इससे निपटने की जरूरत है. उन्होंने कहा, “हमें दोनों तरफ से कुछ ना कुछ मिल रहा है, एक ओर से गुलदस्ते और दूसरी ओर से ईंट-पत्थर (धमकी).”

उन्होंने कहा, “बात सिर्फ कश्मीर के लोगों की नहीं है, बल्कि देश के सभी हिस्सों से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में एलजीबीटी अधिकारों के समर्थन में मार्च निकाला गया है लेकिन अजीब बात है, लोग कश्मीर में समुदाय को समर्थन देने से कतराते हैं। कश्मीर और देश के बाकी हिस्सों के लिए समर्थकों के अलग-अलग मानक हैं.”

राहुल ने कहा कि वे कश्मीर में एलजीबीटी (LGBT) समुदाय (Community) के संपर्क में हैं और केवाईएम की पहल का समर्थन करने के लिए उन्हें समझाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “कश्मीर में हमसे जुड़े लोग बाहर नहीं आना चाहते हैं, हम उन्हें संदेश देने के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं.”

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