दरवाजे पर खटखट ने बढ़ा दी थी अब्दुल राशिद की धड़कनें, फिर सेना ने दी खुशखबरी

इसी साल नवम्बर-दिसंबर महीने में थाईलैंड में एशिया-ओसियाना व्हीलचेयर बास्केटबॉल चैपिंयनशिप होने वाला है.

बारामुला निवासी अब्दुल राशिद मीर के दरवाज़े पर 25 अगस्त की रात अचानक ज़ोर-ज़ोर से आवाज़ होती है. राशिद को महसूस होता है कि कोई उसके दरवाज़े पर ज़ोरदार दस्तक दे रहा है. डरा-सहमा राशिद दरवाज़ा खोलता है. सामने सेना के कुछ जवान दिखते हैं जिनके हाथों में राशिद मीर की बेटी की फोटो होती है.

क्या यह तुम्हारी बेटी है? समूह में खड़े सैनिकों में से एक पूछता है.
डरा हुआ अब्दुल राशिद मीर हकलाते हुए बोलता है- हां

जवाब सुनते ही वो फौजी दूसरे फौजी को देखता है, फिर हंसने लगता है. राशिद को समझ नहीं आ रहा था कि सैनिक इतनी रात गए उसके दरवाज़े पर बेटी की फोटो लिए क्यों खड़े हैं? क्या होने वाला है? कुछ समझ नहीं आ रहा था.

तभी एक फौजी आगे की तरफ आते हुए कहता है- आपकी बेटी इंडियन व्हीलचेयर बास्केट बॉल टीम में सेलेक्ट हो गयी है. मुबारक हो! आपको चेन्नई जाना है. अब्दुल राशिद मीर जो अब तक बेहद डरा हुआ था अचानक उल्लास में डूब गया.

ज़ाहिर है आर्टिकल 370 हटने के बाद से ही घाटी में इंटरनेट और मोबाइल सेवा बंद है. जिस वजह से व्हीलचेयर बास्केट बॉल फेडरेशन ऑफ़ इंडिया इशरत अख़्तर संपर्क नहीं कर पा रहा था. 24 साल की इशरत अख़्तर को बताना ज़रूरी था कि वो एशिया-ओसियाना व्हीलचेयर बास्केटबॉल चैपिंयनशिप के लिए सेलेक्ट हुई है. इसलिए 27 अगस्त को चेन्नई में लगने वाले नेश्नल कैंप में हिस्सा लेना होगा.

बता दें कि इसी साल नवम्बर-दिसंबर महीने में थाईलैंड में एशिया-ओसियाना व्हीलचेयर बास्केटबॉल चैपिंयनशिप होने वाला है. यहां पर क्वालीफाई करने के बाद खिलाड़ी 2020 के टोक्यो पैरालिंपिक्स में शामिल हो पाएगा.

एनएनआई को दिए इंटरव्यू में इशरत ने कहा कि मुझे ऐसा लगा जैसे मेरा सपना पूरा हो गया है. मुझे नहीं मालूम था कि मेरा सेलेक्शन हुआ है. पुलिस आई और उन्होंने दरवाजा खटकटाया. उन्होंने बताया फिर हमें जानकारी मिली. अगले दिन वो मुझे एयरपोर्ट लेकर गए और मैं चेन्नई पहुंची. मैं इंडियन आर्मी और पुलिस द्वारा की गई इस सहायता के लिए उनका शुक्रिया अदा करना चाहती हूं.