Farm bill : …तो इसलिए केंद्र सरकार का क़दम सही, जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

केरल (Kerala) की वामपंथी सरकार ने कृषि मार्केटिंग और ट्रेड में सुधार (farm bills) से सम्बन्धित केंद्र सरकार के कदमों के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) जाने का फैसला किया है.

केरल (Kerala) की वामपंथी सरकार ने कृषि मार्केटिंग और ट्रेड में सुधार (farm bills) से सम्बन्धित केंद्र सरकार के कदमों के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) जाने का फैसला किया है. केरल सरकार के अनुसार ये सुधार राज्य के संवैधानिक अधिकार का हनन है क्योंकि कृषि राज्य का विषय है.

पंजाब की कांग्रेस सरकार पहले ही केंद्र के क़दम को संविधान के ऊपर हमला बता चुकी है, और विधान सभा में एक प्रस्ताव पास कर इन सुधारों को अस्वीकार कर चुकी है. देश के कई राज्यों में इन कृषि सुधारों के खिलाफ राजनीतिक पार्टियों और किसान संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किये हैं. केरल सरकार के अनुसार उसने इस सम्बन्ध में क़ानूनी राय ले ली है.

पिनरई विजयन के नेतृत्व वाली सरकार भी विधान सभा का एक विशेष सत्र बुला कर, विपक्षी कांग्रेस पार्टी के सहयोग से सर्वानुमति से तीनों विधेयकों के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित करना चाहती है ताकि केंद्र सरकार तक उनका विरोध पहुंचे.

केंद्र सरकार का क़दम सही

इस विषय में जब कृषि विशेषज्ञ और कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) के पूर्व अध्यक्ष, डा. अशोक गुलाटी, से बात की गई , तो उनका कहना था कि यह सच है कि कृषि मूलतः राज्य का विषय है लेकिन अंतर्राज्यीय टैक्स केंद्र के अधिकार क्षेत्र में है, इसलिए केंद्र सरकार का क़दम सही है.

डा. गुलाटी का कहना था कि केंद्र इस मामले में राज्यों से लंबा विचार विमर्श कर सकता था, जैसा GST क़ानून बनाते समय किया गया था.लेकिन NDA सरकार समय बचाने के लिए पहले इस सम्बन्ध में अध्यादेश ले कर आई और फिर संसद सत्र के आरम्भ होने पर विधेयकों को सांसदों के विचार के लिए प्रस्तुत किया.

डा. गुलाटी ने इन कृषि सुधारों की तुलना 1991 के आर्थिक सुधारों से की, और कहा कि यह भारत में कृषि क्षेत्र की प्रगति के लिए ज़रूरी हैं. केंद्र की NDA सरकार लगातार कहती रही है कि इन विधेयकों से राज्यों के कृषि उत्पाद विपणन समिति क़ानून (APMC एक्ट) पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा.

केंद्र सरकार के अनुसार इन विधेयकों के क़ानून बनने के बाद पूरे देश में राज्यों के बीच और हर राज्य में बेरोकटोक फसलों का व्यापार और मार्केटिंग होने लगेगी. कृषि व्यापार और मार्केटिंग पर लक्षित विधेयक में कहा गया है कि किसान राज्यों की APMC मंडियों की सीमा के बाहर किसी को भी अपनी फसल बेचने को आज़ाद होंगे.

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