ये नेता जेटली से लड़ता रहा लड़ाई लेकिन मौत के बाद माना- महान वक्ता, विद्वान और दरियादिल थे अरुण

एक नेता अरुण जेटली से लड़ता रहा. क्रिकेट की राजनीति से लेकर बिहार की राजनीति तक लोहा लेता रहा लेकिन अब जब वो नहीं रहे तो उन्हें याद कर रहा है.

अरुण जेटली दोस्त बनाने में माहिर थे लेकिन राजनीति के सफर में दोस्त और दुश्मन दोनों ही बनते हैं. ऐसा ही जेटली के साथ भी हुआ. बीजेपी के पूर्व सांसद कीर्ति आज़ाद के साथ उनका आंकड़ा छत्तीस था. कीर्ति आज़ाद ने कभी भी जेटली के खिलाफ मोर्चा खोलने का कोई मौका नहीं छोड़ा लेकिन अब जब जेटली नहीं रहे तो उनकी कमी कीर्ति को भी खल रही है.

कीर्ति आज़ाद ने एक ट्वीट करके अपना दुख ज़ाहिर किया. उन्होंने लिखा कि क्रिकेट को लेकर हमारे बीच अंतर्विरोध और कुछ गलतफहमियां थीं. व्यक्तिगत रूप से मैं उनका प्रशंसक रहा हूं और वो काफी अच्छे नेता थे. ईश्वर से प्रार्थना है कि उन्हें अपने श्रीचरणों में जगह दें.

कभी भाजपा का हिस्सा रहे कीर्ति आजाद और केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली क्रिकेट की राजनीति में अक्सर टकराते रहे. बिहार की राजनीति भी इस टकराव की जिम्मेदार रही. क्रिकेट के मैदान में जैसे-जैसे अरुण जेटली का प्रभाव बढ़ा उसी अनुपात में कीर्ति आजाद हाशिये पर भी गए. अपने अंतिम दिनों में जेटली ने रजत शर्मा को दिल्ली क्रिकेट की राजनीति में अपने उत्तराधिकारी के तौर पर आगे बढ़ाया. खुद जेटली 1999 से 2013 तक दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के अध्यक्ष . डीडीसीए अध्यक्ष पद के तौर पर जेटली का नाम विवादों में घिरा तो इल्ज़ाम लगाने में सबसे आगे कीर्ति आज़ाद थे. वित्तमंत्री के तौर पर जेटली ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आरोप भी झेले. हालांकि SFIO ने अपनी जांच में जेटली को ये कहते हुए क्लीन चिट दे दी थी कि जेटली डीडीसीए के गैर-कार्यकारी चेयरमैन थे और उनका उसके रोजमर्रा के कामों से लेनादेना नहीं था.

अरुण जेटली ने दिल्ली के सीएम केजरीवाल के खिलाफ डीडीसीए में कथित वित्तीय अनियमितताओं में घसीटने के लिए मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया था जिसके बाद अप्रैल 2018 में अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के चार नेताओं संजय सिंह, आशुतोष, राघव चड्ढा और दीपक वाजपेयी ने उनसे माफी मांगी थी.