विराट है INS Virat का इतिहास, जहाज़ पर बसता था छोटा शहर; ख़ासियत जानकर हो जाएंगे हैरान

इसकी शनदार उपलब्धियों की वजह से इसे 'ग्रेट ओल्ड लेडी' के नाम से भी जाना जाता था. लगातार 30 साल तक सेवा देने के बाद मार्च 2017 में भारतीय नौसेना से रिटायर हो गया.

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 की चुनावी रैलियों में आजकल राजीव गांधी पर ज़ोर-शोर से चर्चा हो रही है. यूपी, झारखंड के बाद बुधवार को दिल्ली के चुनावी रैली में पीएम मोदी ने एक बार फिर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर निशाना साधते हुए कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे तो गांधी परिवार युद्धपोत आईएनएस विराट का उपयोग ‘निजी टैक्सी’ के रूप में करता था.

मोदी ने इससे पहले राजीव गांधी पर आरोप लगाया था कि उनका अंत ‘भ्रष्टाचारी नंबर 1’ के रूप में हुआ।

प्रधानमंत्री ने दावा किया कि राजीव गांधी के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार और नौसेना ने उनके परिवार एवं ससुराल पक्ष की मेजबानी की और उनकी सेवा में एक हेलीकाप्टर को भी लगाया गया.

मोदी ने कहा, ‘आईएनएस विराट का इस्तेमाल एक निजी टैक्सी की तरह करके इसका अपमान किया गया. यह तब हुआ जब राजीव गांधी एवं उनका परिवार 10 दिनों की छुट्टी पर गये हुए थे. आईएनएस विराट को हमारी समुद्री सीमा की रक्षा के लिए तैनात किया गया था, किन्तु इसका मार्ग बदल कर गांधी परिवार को लेने के लिए भेजा गया जो अवकाश मना रहा था.’

उन्होंने यह भी दावा किया कि गांधी परिवार को लेने के बाद आईएनएस विराट द्वीप पर 10 दिनों तक खड़ा रहा.

मोदी ने सवाल किया, ‘राजीव गांधी के साथ उनके ससुराल के लोग भी थे जो इटली से आये थे. सवाल यह है कि क्या विदेशियों को एक युद्धपोत पर ले जाकर देश की सुरक्षा के साथ समझौता नहीं किया गया?’

विमान वाहक आईएनएस विराट को भारतीय नौसेना में 1987 में सेवा में लिया गया था. करीब 30 वर्ष तक सेवा में रहने के बाद 2016 में इसे सेवा से अलग किया गया.

भारत कब आया आईएनएस विराट  

भारतीय नौसेना के इतिहास में आईएनएस विराट की भूमिका जबर्दस्त है. भारत ने इसे साल 1980 में साढ़े छह करोड़ डॉलर में खरीदा था तब इंदिरा गांधी देश की रक्षा मंत्री हुआ करती थी. जबकि भारतीय नौसैना को आईएनएस विराट 12 मई 1987 को मिला. उस समय विश्वनाथ प्रताप सिंह देश के रक्षा मंत्री थे.

भारत से पहले आईएनएस विराट 1959 से बिट्रेन के रॉयल नेवी में था तब इसे एचएमएस हर्मीस के नाम से जाना जाता था.

आईएनएस विराट के भारतीय नौसेना में शामिल होने के बाद यह जहाज़ जुलाई 1989 में ऑपरेशन जूपिटर में हिस्सा लिया. इस ऑपरेशन का मकसद श्रीलंका में शांति स्थापित करना था. वर्ष 2001 में भारतीय संसद पर हमले के बाद ऑपरेशन पराक्रम में भी विराट की भूमिका थी.

समुद्र में 2250 दिन गुज़ारने वाला ये महानायक छह साल से ज़्यादा वक्त समुद्र में बिता चुका है जिस दौरान इसने दुनिया के 27 चक्कर लगाए.

आईएनएस विराट की ख़ासियत

यह दुनिया का एकमात्र ऐसा जहाज़ था जो पुरानी होने के बाद भी इस्तेमाल किया जा रहा था. इसकी शनदार उपलब्धियों की वजह से इसे ‘ग्रेट ओल्ड लेडी’ के नाम से भी जाना जाता था. लगातार 30 साल तक सेवा देने के बाद मार्च 2017 में भारतीय नौसेना से रिटायर हो गया.

यह जहाज़ एक छोटा शहर है. इसमें लाइब्रेरी, जिम, एटीएम, टीवी और वीडियो स्टूडियो, अस्पताल, दांतों के इलाज का सेंटर और मीठे पानी का डिस्टिलेशन प्लांट जैसी सुविधाएं है.

28700 टन वजनी इस जहाज़ पर 150 अफ़सर और 1500 नाविकों की जगह है. अगस्त 1990 से दिसंबर 1991 तक रिटायर्ड एडमिरल अरुण प्रकाश आईएनएस विराट के कमांडिंग अफ़सर रहे. आईएनएस विराट नौसेना की शक्ति का प्रतीक था जो कहीं भी जाकर समुद्र पर धाक जमा सकता था.

इस जहाज़ पर 1944 में काम शुरू हुआ था. उस वक्त दूसरा विश्व युद्ध चल रहा था. रॉयल नेवी को लगा कि शायद इसकी ज़रूरत न पड़े तो इस पर काम बंद हो गया लेकिन जहाज़ की उम्र 1944 से गिनी जाती है. 15 साल जहाज़ पर काम हुआ.

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