बहुत मुश्किल है प्रतीक हजेला होना? NRC लिस्ट पर पिछले साल भी थे ‘दानव’ और अब भी

आईआईटी से पढ़ाई करने वाले प्रशासनिक अफसर प्रतीक हजेला को पिछले साल असम के सिलचर जिले की एक रैली में असुर के रूप में दिखाया गया था.

गुवाहाटी: असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) की लिस्ट जारी होने के बाद से एक व्यक्ति ऐसा है जिसको सबसे अधिक कोसा जा रहा है वह है प्रतीत हजेला. अब आप यह जानना चाह रहे होंगे कि प्रतीक हजेला कौन है और किस बात को लेकर उन्हें कोसा जा रहा है? हजेला को लेकर आपत्ति यह है कि NRC लिस्ट में मात्र 19 लाख़ लोगों का ही नाम क्यों आया? इससे पहले आपत्ति यह थी कि 40 लाख़ लोगों को इस लिस्ट से कैसे बाहर किया गया?

आईआईटी से पढ़ाई करने वाले प्रशासनिक अफसर प्रतीक हजेला को पिछले साल असम के सिलचर जिले की एक रैली में असुर के रूप में दिखाया गया था. जिसका मां दुर्गा संहार करती हैं. वहीं जब शनिवार को राज्‍य सरकार ने एनआरसी की फाइनल लिस्‍ट जारी की तो बंगाली बहुल इस जिले में हजेला को फिर से ‘दानव’ बना दिया गया है. इस बार उन पर ‘बहुत कम’ लोगों को लिस्‍ट से बाहर छोड़ने का आरोप है.

दरअसल 30 जुलाई, 2018 को प्रकाशित मसौदे में 2.9 करोड़ लोगों के नाम शामिल किए गए थे, जबकि 40 लाख लोगों का नाम मसौदे में नहीं आया था. जिसके बाद से एक वर्ग में नाराज़गी थी. सुप्रीम कोर्ट द्वारा बांग्‍लादेश की सीमा से लगे जिलों में जमा किए गए दस्‍तावेजों की रीवेरिफिकेशन की अपनी याचिका को खारिज किए जाने के बाद से असम में बीजेपी के नेतृत्‍व वाली सरकार हजेला को नापसंद करती है. दरअसल, हजेला ने कहा था कि उन्‍होंने पहले ही 27 फीसदी आवेदनों का आकस्मिक रीवेरिफिकेशन पूरा कर लिया है. इसी वजह से बीजेपी सरकार उन्‍हें पसंद नहीं करती है.

कौन हैं प्रतीक हजेला?

1995 बैच के आईएएस अधिकारी हजेला असम में NRC प्रक्रिया के राज्‍य समन्‍वयक हैं. भोपाल में जन्‍मे हजेला पहली बार वर्ष 1996 में असम में काचर के सहायक आयुक्‍त बनाए गए थे. सितंबर 2013 में वह कमिश्‍नर बनाए गए. इसके बाद उन्‍हें एनआरसी का राज्‍य समन्‍वयक बनाया गया.

असम सरकार ने की हजेला की आलोचना

असम सरकार ने असम-मेघालय कैडर के इस अधिकारी की आलोचना की है और कहा कि हजेला ने उसे एनआरसी अपडेशन प्रक्रिया की प्रगति के बारे में अंधरे में रखा. उधर, हजेला ने इन आरोपों पर बहुत कम स्‍पष्‍टीकरण दिया है. हजेला ने अंतिम बार 30 जुलाई, 2018 को मीडिया से बात की थी. उस दिन एनआरसी का फाइनल मसौदा पेश किया गया था. उसके बाद उन्‍होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश को देखते हुए मीडिया से दूरी बना रखी है.

एनआरसी की अंतिम लिस्‍ट जारी होने के बाद भी हजेला मीडिया के सामने नहीं आए और उन्‍होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के जरिए अपना बयान सबके सामने रखा।

बीजेपी का हजेला पर जुबानी हमला

प्रतीक हजेला ने साल 2018 में फेसबुक पोस्‍ट में संकेत देते हुए लिखा था कि वह बहुत कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं. वहीं राज्य बीजेपी ने 24 जुलाई को हजेला पर ‘कुछ ताकतों’ के निर्देश पर काम करने का आरोप लगाया था. उनके मुताबिक ऐसा जानबूझकर किया जा रहा है ताकि ‘एक दोषपूर्ण एनआरसी प्रकाशित किया जाए और अवैध विदेशियों को इसमें शामिल किया जाए.’

हजेला ने शनिवार को एक संक्षिप्‍त बयान जारी करते हुए कहा, ‘लिस्‍ट में किसी को शामिल करने या बाहर करने के सभी फैसले वैधानिक अधिकारियों ने लिए हैं. पूरी प्रक्रिया…ध्‍यानपूर्वक एक उद्देश्‍य के साथ पारदर्शी तरीके से पूरी की गई है. हरेक व्‍यक्ति को प्रक्रिया के प्रत्‍येक चरण में अपनी बात रखने के लिए पर्याप्‍त अवसर दिया गया था.’

एनआरसी की अंतिम सूची जारी, 19 लाख से अधिक बाहर

बता दें क‍ि असम में बहुप्रतीक्षित राष्ट्रीय नागरिक पंजी की अंतिम सूची शनिवार को जारी कर दी गई. एनआरसी में 19 लाख से अधिक आवेदक अपना स्थान बनाने में विफल रहे. सूची से बाहर रखे गए इन आवेदकों का भविष्य अधर में लटक गया है क्योंकि एनआरसी असम में वैध भारतीय नागरिकों की पुष्टि से संबंधित है.

एनआरसी के राज्य समन्वयक कार्यालय ने एक बयान में कहा कि 3,30,27,661 लोगों ने एनआरसी में शामिल होने के लिए आवेदन दिया था. इनमे से 3,11,21,004 लोगों को दस्तावेजों के आधार पर एनआरसी में शामिल किया गया है और 19,06,657 लोगों को बाहर कर दिया गया है. जिन लोगों के नाम एनआरसी से बाहर रखे गये है, वे इसके खिलाफ 120 दिन के भीतर विदेशी न्यायाधिकरण (एफटी) में अपील दर्ज करा सकते हैं. यदि वे न्यायाधिकरण के फैसलों से संतुष्ट नहीं होते हैं तो वे उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय का रूख कर सकते है.

असम सरकार पहले ही कह चुकी है जिन लोगों को एनआरसी सूची में शामिल नहीं किया गया उन्हें किसी भी स्थिति में हिरासत में नहीं लिया जाएगा, जब तक एफटी उन्हें विदेशी ना घोषित कर दे.