भारत-बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी समझौते से पश्चिम बंगाल-सिक्किम को होगी यह दिक्कत

तीस्ता नदी का पानी सिक्किम होते हुए पश्चिम बंगाल और फिर बांग्लादेश पहुंचता है. इस दौरान कई बांधों और जल परियोजना में तीस्ता नदी का इस्तेमाल होता है.

भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी का विवाद पुराना है. शनिवार को होने वाली बैठक में उम्मीद की जा रही है कि शायद इस विवाद का हल निकल जाए. ज़ाहिर है इस विवाद के हल के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं.

तीस्ता नदी भारत के सिक्किम राज्य से निकल कर पश्चिम बंगाल होते हुए बांग्लादेश की जमुना (ब्रह्मपुत्र) नदी में मिलती है. सिक्किम और उत्तरी पश्चिम बंगाल के पांच ज़िलों में करीब एक करोड़ लोग इस नदी पर निर्भर हैं. दूसरी ओर, बांग्लादेश की बड़ी आबादी भी इसी पर निर्भर है.

बता दें कि दोनों देशों के बीच 54 नदियां बहती है. बांग्लादेश लंबे समय से मांग कर रहा है कि इन सभी नदियों पर एक व्यापक समझौता होना चाहिए. शनिवार को होने वाली मुलाक़ात में उम्मीद है कि जल विवाद को लेकर सैद्धांतिक तौर पर कोई सहमति बन सकती है. जो तीस्ता समेत सभी नदियों पर लागू होगी.

कुछ दिनों पहले प्रधनामंत्री नरेंद्र मोदी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुलाक़ात हुई थी. जहां पर दोनों देशों के बीच तीस्ता नदी को लेकर भी बात हुई. वहीं हाल ही में बांग्लादेश के उच्चायुक्त ने सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग से मुलाक़ात की थी. ज़ाहिर है सिक्किम भी तीस्ता नदी से जुड़ा है.

भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त सैय्यद मुअज़्ज़म अली का कहना है कि तीस्ता नदी में या तो सुखाड़ होती है या बाढ़. हाल के दिनों में नदी में पानी का स्तर कम हुआ है इस वजह से नौवहन में परेशानी हो रही है. इसलिए ज़रूरी है कि दोनों देश बातचीत के ज़रिए मुद्दे को सुलझाए. विपरीत मौसम में तीस्ता नदी का बंटवारा उसी समस्या का हल है.

वहीं पश्चिम बंगाल इस समझौते का विरोध करते हुए कहता है कि तीस्ता नदी में पानी कम हो रहा है औऱ जब पर्याप्त पानी ही नहीं है तो बंटवारे का क्या मतलब है?

वहीं बाग्लादेश का तर्क है कि नदी में जितना भी पानी है उसे दोनों देशों में बराबर बांटा जाना चाहिए.

सिक्किम और पश्चिम बंगाल ने तीस्ता नदी में कई बांध और विद्युत जल परियोजना चला रखा है. इसके अलावा उन्होंने सिंचाई के लिए नहरों का भी निर्माण किया है. इसी वजह से नदी में पानी कम हो रहा है.

तीस्ता नदी का पानी सिक्किम होते हुए पश्चिम बंगाल और फिर बांग्लादेश पहुंचता है. इस दौरान कई बांधों और जल परियोजना में तीस्ता नदी का इस्तेमाल होता है.

ऐसे में अगर दोनों देशों के बीच तीस्ता नदी को लेकर कोई समझौता होता है तो पश्चिम बंगाल और सिक्किम अपनी मर्ज़ी के हिसाब से पानी का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा. लेकिन यह समझौता बांग्लादेश के लिए बड़ी राहत होगी.