जानिए कब-कब हुआ था अंतरिक्ष में सैटेलाइट को तबाह करने वाला ऐंटी सैटेलाइट हथियार का इस्तेमाल

भारत से पहले यह उपलब्धि सिर्फ अमेरिका, रूस और चीन के पास थी. भारत द्वारा किया गया यह टेस्ट बेहद दुर्लभ और खतरनाक भी था.

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को देश को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने भारतीय वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धी से देश को अवगत कराया. भारत ने पृथ्वी की निचली कक्षा में 300 किलोमीटर दूर एक सैटलाइट को ऐंटी-सैटलाइट मिसाइल से मार गिराया है. उन्होंने कहा, ‘लो अर्थ ऑर्बिट में एक लाइव सैटेलाइट को मार गिराया गया. यह परीक्षण किसी भी अंतरराष्ट्रीय संधि का उल्लंघन नहीं करता. इस समय स्पेस और सैटलाइट का महत्व बढ़ते ही जाना है. शायद उसके बिना जीवन मुश्किल हो जाए.’

कितने समय तक चला अभियान

यह अभियान मात्र 3 मिनट में खत्म हो गया था. ए-सैट ने 300 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक पुराने सैटलाइट को निशाना बनाया जो अब सेवा में नहीं है.

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भारत से पहले कौन कर चुका है ये टेस्ट

इस टेस्ट की बात करें तो सबसे पहले अमेरिका ने 1959 में यह टेस्ट किया था. कुछ समय बाद तत्कालीन सोवियत यूनियन ने भी ऐसा टेस्ट किया था. अमेरिका ने आखिरी बार 1985 में ये टेस्ट दुबारा किया था जिसके बाद 20 साल तक कोई परीक्षण नहीं हुआ. चीन ने 2007 में ऐसा ही टेस्ट करते हुए एक मौसम उपग्रह को तबाह किया था. चीन के टेस्ट को अब तक का सबसे खतरनाक टेस्ट माना जाता है.

कहां जाता है मलबा

इन टेस्ट से तबाह हुए सैटलाइट से निकलने वाला डेबरिस जिसे आसान भाषा में मलबा कहते हैं, अन्य स्पेसक्राफ्ट के लिए समस्या पैदा कर सकता है. भारत ने इससे बचने के लिए बताया कि हमने ये टेस्ट अंतरिक्ष की सतह से काफी नीचे किया है ताकि मलबा स्पेस में जमा न हो और कुछ हफ्तों में धरती पर आ जाए. दुश्मन देश के लिए खूफिया जानकारी इकट्ठा करने वाले सैटलाइट को तबाह करने में ये महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. भारत ने इस टेस्ट के जरिए अन्य देशों को चेतावनी दे दी है.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘मिशन शक्ति एक कठिन ऑपरेशन था. वैज्ञानिकों ने मिशन शक्ति ऑपरेशन पूरा किया. भारत ने आज अंतरिक्ष के क्षेत्र में अपना नाम इतिहास में दर्ज कराया है. अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया है.’