जानें कौन हैं कवि कनियन पुंगुंदरनार, जिनका पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में किया जिक्र

कनियन पुंगुदरनार की जिन पंक्तियों का जिक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में किया वो शिकागो में होने वाले 10वें तमिल सम्मेलन का थीम सॉन्ग भी है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए संबोधन में तमिल भाषा के जाने-माने कवि कनियन पुंगुदरनार और स्वामी विवेकानंद का जिक्र किया. उन्होंने पुंगुदरनार के उद्धरण ‘याधुम ऊरे यावरुम केलिर’ का हवाला देते हुए कहा कि सीमाओं से अलग यही समझ भारत की विशेषता है. इन पंक्तियों का अर्थ वसुधैव कुटंबकम से मिलता है.

पीएम मोदी ने इन पंकतियों का मतलब समझाते हुए बताया कि हम सभी स्थानों पर रहने वालों के प्रति अपनेपन की भावना रखते हैं. देशों की सीमा के पार भी अपनत्व की भावना ही भारत की विशेषता है. ये पंकतियां पुंगुदरनार की हैं जिनका जन्म लगभग 3000 साल पहले हुआ था.

तमिलनाडु के शिवगंगा जिले के तिरुपुर तालुके के माहिबलनपट्टी गांव में जन्मे पुंगुदरनार को कविताओं के अलावा ज्योतिष शास्त्र, गणित और दर्शनशास्त्र के क्षेत्र में अपने अहम योगदान के लिए जाना जाता है. इंसानों के बीच किसी भी तरह के विभाजन को नकारने वाले पुंगुदरनार वसुधैव कुटुंबकम के समर्थक थे.

पुंगुदरनार उस समय भी अपनी कविताओं में हर व्यक्ति को अपने परिवार का हिस्सा ही मानते थे. मालूम हो कि कनियन पुंगुदरनार की जिन पंक्तियों का जिक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में किया वो शिकागो में होने वाले 10वें तमिल सम्मेलन का थीम सॉन्ग भी है.

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