आज सामने आ गया उस 6 मिनट के वीडियो का पाकिस्तानी झूठ जो जाधव को टॉर्चर कर बनाया गया

पाकिस्तान ने अपनी दलील को मज़बूत बनाने के लिए एक वीडियो जारी किया था. इसमें जाधव 1991 में भारतीय नौसेना में शामिल होने की बात कबूलते बताए गए.

नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ऑफ जस्टिस ने कुलभूषण जाधव के मामले में फैसला भारत के हक में सुनाया है. 16 जजों के पैनल में से 15 जजों ने भारत के पक्ष में फैसला सुनाया है. कोर्ट ने पाकिस्तान को फैसले पर पुनर्विचार का भी आदेश दिया है. साथ ही जाधव की फांसी के फरमान पर भी लगी रोक जारी रखी है. पाकिस्तान भी कुलभूषण जाधव पर दिए फैसले को स्वीकार कर रहा है. पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने पहले ही यह बात साफ कर दी थी. जाधव को काउंसलर एक्सेस भी मिलेगा.

गौरतलब है कि भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को पाकिस्तानी सैन्य अदालत ने जासूस मानते हुए फांसी की सज़ा सुनाई थी. इसी फैसले को भारत सरकार ने इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में चुनौती दी थी.

वियना संधि के आर्टिकल 36 को आधार बनाकर भारत ने कहा था कि जाधव की फांसी रद्द होनी चाहिए. ये कहा गया कि पाकिस्तान ने जाधव की गिरफ्तारी के बाद जानकारी भारत को तुरंत नहीं दी. ना ही जाधव को भारतीय काउंसलर से संपर्क करने दिया गया. भारतीय पक्ष ने संपर्क करने का निवेदन किया तो उसे भी ठुकराया गया.

भारत ने सवाल उनके ट्रायल पर भी उठाए थे. ICJ के सामने भारतीय पक्ष ने ये मांग रखी थी कि अगर जाधव को मुक्त नहीं किया जा सकता तो उनका सिविल ट्रायल हो.

पाकिस्तान में क्या चल रहा है?

भारत की ही तरह पाकिस्तान में भी जाधव केस को लेकर खासी दिलचस्पी थी. पाकिस्तान से महान्यायवादी मंसूर खान कर रहे हैं की अगुवाई में एक टीम हेग पहुंची हुई थी. विदेश विभाग के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल भी टीम के साथ थे. पाकिस्तानी मीडिया बता रहा था कि टीम का कहना है कि हेग की अदालत भारतीय अनुरोध को ठुकरा देगी और जाधव की सज़ा बरकरार रहेगी, हालांकि ऐसा नहीं हुआ.

क्या है कुलभूषण जाधव केस?

कुलभूषण जाधव का जन्म महाराष्ट्र के सांगली में साल 1970 में हुआ था. उन्हें 3 मार्च 2016 को पाकिस्तान ने रिटायर्ड नौसेना अधिकारी बता कर पकड़ा और बाद में कहा गया कि वो बलूचिस्तान में जासूसी करते हुए गिरफ्तार किए गए हैं.

25 मार्च 2016 को पाकिस्तान की ओर से प्रेस रिलीज़ जारी करके भारतीय पक्ष को जाधव के गिरफ्तार होने की सूचना भेजी गई. भारत सरकार ने माना कि जाधव भारतीय नागरिक हैं लेकिन इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया गया कि वो कोई जासूस हैं. इसके उलट भारत ने साफ कहा कि जाधव ईरान में कारोबार करने गए थे और पाकिस्तान ने उन्हें अगवा करके झूठी कहानी गढ़ी है.

पाकिस्तान ने अपनी दलील को मज़बूत बनाने के लिए एक वीडियो जारी किया. इसमें जाधव 1991 में भारतीय नौसेना में शामिल होने की बात कबूलते बताए गए. 1987 में एनडीए में सेलेक्शन और 2013 में रॉ के लिए काम करने की बात भी इसी में सामने आई. 6 मिनट के इस वीडियो को जाधव का इकबालिया बयान कहकर खूब प्रचारित किया गया.

दोनों तरफ की मीडिया में तरह-तरह के दावों के बीच 7 दिसंबर 2016 को तत्कालीन विदेश मंत्री सरताज़ अज़ीज़ का बयान भी आया जिसमें वो पाकिस्तानी संसद मे कह रहे थे कि उनके पास जाधव के खिलाफ ठोस सबूत नहीं हैं. विदेश मंत्रालय ने ही उस दिन बयान जारी करके कहा कि अज़ीज़ का बयान गलत है.

30 मार्च 2016 को भारतीय विदेश मंत्रालय ने कुलभूषण जाधव की प्रताड़ना की बात कही. इसके अलावा काउंसलर एक्सेस ना दिए जाने पर भी भारत ने शिकायत की. 26 अप्रैल 2017 को पाकिस्तान ने भारत की अपील 16वीं बार खारिज करके दिखा दिया कि वो किसी रियायत के मूड में नहीं. इससे पहले 10 अप्रैल 2017 को पाकिस्तानी सेना के जनसंपर्क विभाग की ओर से पता चला कि सैन्य अदालत ने जाधव को मौत की सज़ा सुना दी है. इस खबर के बाहर निकले ही भारत में हंगामा खड़ा हो गया. मीडिया ने जाधव के परिजनों से बातचीत करनी शुरू कर दी. भारतीय पक्ष में भी हलचल तेज़ हो गई.

भारत ने 8 मई 2017 को संयुक्त राष्ट्र संघ में याचिका दायर करके पाकिस्तान पर वियना संधि के उल्लंघन का आरोप लगाया क्योंकि वो बराबर काउंसल एक्सेस ना देन पर अड़ा था. अगले ही दिन इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने सुनवाई पूरी ना होने तक जाधव के मृत्युदंड के अमल पर रोक लगा दी. 17 अप्रैल 2018 को भारत ने अपने कागज़ आईसीजे में सौंपे और 17 जुलाई 2018 को पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने अदालत को 400 पन्नों का जवाब दिया.