रामराज्य में जनता से कैसे टैक्स वसूलते थे राजा, कुमार विश्वास ने तुलसीदास के दोहे सुनाकर बताया

तुलसी दास के दोहों का संदर्भ लेते हुए कुमार विश्वास ने बताया कि राम के समय में टैक्स सिस्टम कैसा था.

वित्तमंत्री सीतारमण ब्रीफकेस की जगह लाल रंग के कपड़े में बजट को लेकर संसद पहुंची. वित्‍त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, भारतीय परंपरा के अनुरूप बहीखाता को बजट का रूप दिया गया. संसद में बजट पेश किया जा रहा है. उधर कवि कुमार विश्वास ने बजट से पहले रामराज्य के बजट के बारे में बताया. एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए बताया कि टैक्स सिस्टम अभी से नहीं, हजारों साल से है.

तुलसी दास के दोहों का संदर्भ लेते हुए कुमार विश्वास ने बताया कि भरत जब राम के पास पहुंचे तो राम ने पूछा जनता से कर(टैक्स) कैसे ले रहे हो? भरत ने कहा जैसे इक्ष्वाकु वंश लेता है. इस पर राम ने कहा कि राजा को ऐसे कर लेना चाहिए जैसे सूर्य लेता है. सूर्य समुद्र, नदी, तालाब सभी जगहों से पानी लेता है लेकिन किसी को पता नहीं चलता. जब वह बादलों के रूप में जरूरत की जगहों पर बरसाता है तो सबको पता चलता है.

बरसत हरसत सब लखें, करसत लखे न कोय
तुलसी प्रजा सुभाग से, भूप भानु सो होय

आगे तुलसी दास का एक और दोहा सुनाते हुए कहा कि बजट में लग्जरी वाली चीजें महंगी होनी चाहिए जबकि जीवन के लिए जरूरी चीजें, जिनकी जरूरत अमीर-गरीब सबको है, वो सस्ती होनी चाहिए. लग्जरी गाड़ियां महंगी कर दो लेकिन अनाज, स्कूल, अस्पताल आदि सस्ते होने चाहिए.

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