तेज प्रताप यादव ने अपने पद से इस्तीफा दिया, लालू के घर में घमासान तेज

तेजस्वी पर परोक्ष हमलों के बाद रफा-दफा की कोशिशें होती आई हैं लेकिन लोकसभा चुनाव से ठीक पहले तेज के तेवर महागठबंधन के लिए चिंता पैदा कर सकते हैं.

पटना: आरजेडी विधायक और लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने एक ट्वीट कर पार्टी की छात्र ईकाई के संरक्षक पद से इस्तीफा दे दिया है. गुरुवार दोपहर ही तेज प्रताप ने बागी तेवर दिखाते हुए दो लोकसभा सीटों से युवा नेताओं को उतारने की मंशा जाहिर की थी.

अपने ट्वीट में जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल तेज प्रताप ने किया है कि उससे साफ पता चलता है कि लालू यादव के घर में सब कुछ ठीक नहीं है. सीएम पद के उम्मीदवार और अपने छोटे भाई तेजस्वी के साथ तेज प्रताप के रिश्ते बिगड़ चुके हैं. अपने ट्वीट में तेज प्रताप ने लिखा है, नादान हैं वो लोग जो मुझे नादान समझते हैं. कौन कितना पानी में है सबकी है खबर मुझे.


दरअसल 27 जुलाई 2017 को गांधी मैदान में हुई रैली में तेजस्वी की ताजपोशी के छह महीने बाद से ही तेज प्रताप समय-समय पर बड़े नेताओं से असहमति जताते रहे हैं. शंखनाद कर तेजस्वी का सारथी बनने की इच्छा जताने के बाद तेज प्रताप की राजनीतिक महत्वाकांक्षा बढ़ने लगी.

पार्टी में समानांतर नेतृत्व की कोशिश
आरजेडी कार्यसमिति की बैठक में भी कई बार तेज प्रताप नहीं पहुंचे. पिछले साल नवंबर में पटना के मनेर में मीसा भारती ने सार्वजनिक तौर पर ये कहा कि उनके घर में सब कुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है. इससे पहले तेज ने पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे को निशाने पर लिया था और पुराने नेताओं पर युवाओं को तरजीह न देने का आरोप लगाया था.

लालू के घर में घमासान तब और बढ़ गया जब तेज प्रताप ने अपनी पत्नी एश्वर्या राय से तलाक की अर्जी लगा दी. 12 मई , 2018 को लालू के करीबी और पार्टी के बड़े नेता चंद्रिका राय की बेटी एश्वर्या के साथ तेज प्रताप की धूमधाम से शादी हुई थी. छह महीने बाद चार नवंबर को तेज ने ये कहकर सनसनी फैला दी कि उन्होंने घर के सदस्यों के दबाव में शादी रचाई थी.

तेज प्रताप अपने निराले अंदाज और कृष्ण भक्ति के लिए भी चर्चा में रहते आए हैं. तलाक की अर्जी की आग ठंडी होने के बाद अचानक उन्होंने आरजेडी कार्यालय पर धावा बोल दिया था और जनता दरबार लगाने लगे.

लगभग डेढ़ साल से तेज प्रताप आरजेडी के भीतर समानांतर नेतृत्व की तलाश में लगे हुए हैं. कई मौकों पर सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि पार्टी के बड़े फैसलों में उनसे चर्चा नहीं की जाती है. तेजस्वी पर परोक्ष हमलों के बाद रफा-दफा की कोशिशें होती आई हैं लेकिन लोकसभा चुनाव से ठीक पहले तेज के तेवर महागठबंधन के लिए चिंता पैदा कर सकते हैं.