बेल खारिज होने के बाद लालू ने जेल से समर्थकों के नाम लिखी चिट्ठी, JDU ने दिया जवाब

चारा घोटाले में जेल में बंद RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज होने के बाद लालू यादव ने एक खत लिखा है.

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को लालू की जमानत याचिका खारिज कर दी. 70 की उम्र में कई सारी बीमारियों से जूझ रहे लालू के भीतर लड़ने का जज्बा बरकरार है. इसीलिए बिना किसी हिचक के उन्होंने याचिका में इस बात का जिक्र किया कि वो लोकसभा चुनाव में अपनी पार्टी के लिए प्रचार करना चाहते हैं, इसकी अनुमति दी जाए. हालांकि कोर्ट ने दलील नहीं मानी.

लालू का छलका दर्द

सुप्रीम कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद लालू का दर्द छलका है. लालू प्रसाद यादव ने सोशल मीडिया पर एक चिट्ठी लिखकर अपना दर्द बयान किया है. लालू ने ट्विटर पर इस चिट्ठी की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, “44 वर्षों में पहला चुनाव है जिसमें आपके बीच नहीं हूँ। चुनावी उत्सव में आप सबों के दर्शन नहीं होने का अफ़सोस है। आपकी कमी खली रही है इसलिए जेल से ही आप सबों के नाम पत्र लिखा है। आशा है आप इसे पढ़ियेगा एवं लोकतंत्र और संविधान को बचाइयेगा। जय हिंद, जय भारत।”

लालू ने आगे लिखा, ‘इस वक्त जब बिहार एक नई गाथा लिखने जा रहा है. लोकतंत्र का उत्सव चल रहा है. यहां रांची के अस्पताल में अकेले बैठकर मैं सोच रहा हूं कि क्या विध्वंसकारी शक्तियां मुझे इस तरह कैद कराके बिहार में पिर किसी षड्यंत्र की पठकथा लिखने में सफल हो पाएंगी. मेरे रहते बिहारवासियों के सात मैं फिर से धोखा नहीं होने दूंगा. मैं कैद में हूं मेरे विचार वहीं. अपने विचारों को आपसे साझा कर रहा हूं, क्योंकि एक दूसरे से विचारों को साझा करके ही हम इन बांटने वाली ताकतो से लड़ सकते हैं.’

1977 के बाद पहली बार नहीं शामिल हो पाएंगे चुनाव में

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 1977 के बाद यह पहली बार होगा जब लालू प्रसाद यादव किसी भी चुनाव प्रचार में शामिल नहीं होंगे. 2014 में लोकसभा और 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव में लालू प्रसाद यादव ने अपनी पार्टी के लिए प्रचार किया था. उस समय भी लालू जेल में थे लेकिन जमानत पर बाहर आए थे.

JDU ने दिया ये जवाब

लालू यादव की चिट्ठी पर जेडी(यू) के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह ने बयान जारी करते हुए कहा कि-

लालू यादव जी, आप सज़ायाफ्ता हैं.उसके बावजूद आपने खुला पत्र लिखा, क्या आपने पत्र लिखने के लिए जेल मैनुअल का पालन किया? क्या जेल अधीक्षक से आपने पत्र लिखने के लिए अनुमति ली? आपके पत्र को जेल में किसने टाइप किया क्योंकि पत्र पर आप ही के दस्तख़त हैं.अगर आपने नियमों का पालन नहीं किया तो यह काम केवल आप और आपका परिवार ही कर सकता है क्योंकि कानून तोड़ने में आप सब एक्सपर्ट हैं.

लालू यादव जी, अगर आपने जेल मैनुअल का पालन करते हुए भी पत्र लिखा है तब भी आपको इस बात का अंदाज़ा तो हो ही गया कि बिहार में आपके भ्रष्टबंधन की हालत क्या होने वाली है.पहले चरण की वोटिंग के पहले आपको बिहार की चुनावी जमीन का एहसास हो जाना इस बात से साबित होता है की आपको अपने समर्थकों के लिए खुला पत्र लिखना पड़ा.

लालू जी, हार का डर ऐसा ही होता है जैसा आपको हुआ है.लेकिन आपको परेशान होने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि चुनाव के बाद भी आपको होटवार में ही रहना है.न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर आप सजायाफ्ता हैं लेकिन न्यायालय में आपकी थोड़ी भी आस्था नहीं है.तभी तो आप उसके लिए ‘विध्वंसकारी’ शब्द का प्रयोग कर रहे हैं.

लालू यादव जी, आज आपको सामने हार दिख रही तो दलितों के लिए प्रेम उमड़ आया. 15 वर्षों के आपके शासनकाल में दलित उत्पीड़न की घटनाएं सबसे ज्यादा हुईं.वैसे भी आप खुद कहते रहे हैं ना कि आपकी राजनीति ‘माय’ समीकरण पर चलती है. आपको तो समाज के किसी अन्य तबके की कभी फ़िक्र ही नहीं रही ना?

लालू जी, हार के डर ने आपको दलित और बहुजन समाज की चिंता के लिए बेबस कर दिया ना? लेकिन आज बिहार में का बहुजन समाज आपको समर्थन देने के लिए मजबूर नहीं है. मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी के नेतृत्व वाली सरकार ने सर्वजन को सम्मान दिया है.

लालू यादव जी, आप तो सीधे रिम्स से सबको फोन करते हैं तब यह खुला पत्र लिखने की आवश्यकता क्यों आन पड़ी? आप बीमार हैं तो चुनाव की परेशानी मत झेलिये, क्योंकि माननीय न्यायालय ने आपको इलाज के लिए ही रिम्स में रहने की अनुमति दी है.

लालू जी, हम सभी चाहते हैं कि आप जल्द स्वस्थ हों और रिम्स से डिस्चार्ज होकर निकलें.वैसे भी आपकी गैरमौजूदगी में देश और संविधान बचाने की जिम्मेवारी आपके परिवार ने उठा रखी है.लेकिन अब जनता को बेवकूफ समझना बंद कर दीजिए क्योंकि यह पब्लिक है जो सब जानती है.

क्या था मामला

लालू प्रसाद यादव को 900 करोड़ से अधिक के चारा घोटाले से संबंधित 3 मामलों में दोषी ठहराया गया है. मामला 1990 का है जब झारखण्ड बिहार का हिस्सा था. उस समय उन पर धोखे से पशुपालन विभाग के खजाने से धन निकालने का आरोप लगा था. चारा घोटाले से संबंधित एक मामले में लालू यादव को पहले ही जमानत मिल गयी थी. स समय उन पर दोरांदा कोषागार से धन निकाले जाने से संबंधित मामले में मुकदमा चल रहा है.

यह भी पढ़ें- मंच सजे हैं, माइक लगे हैं, शोर भी बेतहाशा, पर ‘ठेठ बिहारी’ के न होने की कसक