चांद की सतह पर लैंडर विक्रम की तस्वीर मिलने के बाद, अब अगले 12 दिन होंगे बहुत अहम

इसरो चीफ सिवन ने पीटीआई को बताया कि लैंडर विक्रम ने हार्ड-लैंडिंग ही की होगी. उन्होंने कहा कि ऑर्बिटर पर लगे कैमरे से उसकी लोकेशन पता चली है.

बेंगलुरु: चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने लैंडर विक्रम की लोकेशन तस्वीर खींची है. इससे लैंडर विक्रम की लोकेशन का पता चल गया है. लेकिन अभी भी बड़ा सवाल ये है कि क्या लैंडर विक्रम सही सलामत है या नहीं. इसरो चेयरमैन के. सिवन ने रविवार को बताया कि विक्रम की लोकेशन का पता चल गया है और उसने हार्ड-लैंडिंग की होगी क्योंकि जिस सॉफ्ट-लैंडिंग की योजना बनाई गई थी, वह सफल नहीं हो सकी. सिवन ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि आने वाले 14 दिनों में हमें उम्मीद है कि हम लैंडर विक्रम को ढूंढ लेंगे. अब दो दिन बीत चुके हैं. यानी अब 12 दिन बहुत अहम होंगे.

इसरो चीफ सिवन ने पीटीआई को बताया कि लैंडर विक्रम ने हार्ड-लैंडिंग ही की होगी. उन्होंने कहा कि ऑर्बिटर पर लगे कैमरे से उसकी लोकेशन पता चली है. जब उनसे यह पूछा गया कि क्या हार्ड-लैंडिंग के दौरान लैंडर को नुकसान पहुंचा है तो उन्होंने कहा, ‘अभी हमें यह नहीं पता चला है.’

इसरो चीफ ने कहा कि लैंडर से संपर्क स्थापित करने की कोशिश लगातार जारी है. सिवन ने बताया, ‘चांद की सतह से 2.1 किलोमीटर ऊंचाई तक विक्रम की लैंडिंग प्रकिया योजना के हिसाब से चल रही थी. उसके बाद लैंडर से ग्राउंड स्टेशन का संपर्क टूट गया.’ उन्होंने कहा कि डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है.

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, कुछ अंतरिक्ष विशेषज्ञों ने कहा है कि हार्ड-लैंडिंग के दौरान लैंडर विक्रम को नुकसान पहुंचने की आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता. एक विशेषज्ञ ने बताया, ‘जिस गति से उसे सॉफ्ट-लैंडिंग करनी थी, उस गति से उसने नहीं किया है. हो सकता है कि वह (लैंडर) अपने चारों पैरों पर न हो. झटकों (हार्ड-लैंडिंग की वजह से) से लैंडर को नुकसान पहुंचा होगा.’ एक अन्य सीनियर स्पेस एक्सपर्ट ने कहा, ‘जब सिस्टम सही से काम नहीं करता हो तो यह (लैंडर) तेजी से आगे बढ़ेगा और चांद से टकराएगा। इसमें कोई संदेह नहीं है.’

चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर पूरी तरह ठीक है और वह करीब 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित अपनी कक्षा में चांद की परिक्रमा कर रहा है. वह साढ़े 7 साल तक ऐक्टिव रहेगा और धरती तक चांद की हाई रेजॉलूशन तस्वीरें और अहम डेटा भेजता रहेगा. उस पर कैमरे समेत 8 उपकरण लगे हुए हैं जो अत्याधुनिक है.

ऑर्बिटर का कैमरा तो अबतक के मून मिशनों में इस्तेमाल हुए कैमरों में सबसे ज्यादा रेजॉलूशन वाला है. ऑर्बिटर अगले 2 दिनों में उसी लोकेशन से गुजरेगा, जहां लैंडर से संपर्क टूटा था. अब तो लैंडर की लोकेशन की जानकारी भी मिल गई है. ऐसे में ऑर्बिटर जब उस लोकेशन से गुजरेगा तो लैंडर की हाई रेजॉलूशन तस्वीरें ले सकता है.

ऑर्बिटर द्वारा भेजे गए डेटा के विश्लेषण से किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है. अगले 12 दिनों में लैंडर की स्थिति से लेकर उससे जुड़े सारे सवालों के जवाब मिल जाएंगे. इसरो चीफ के. सिवन ने शनिवार को डीडी न्यूज से बातचीत में कहा था कि अगले 14 दिनों में लैंडर विक्रम को ढूंढा जा सकेगा.