पीएम मोदी ने बताया कौन सा सबक सिखा कर गईं सुषमा स्वराज, बताया पूरा किस्सा

सुषमा स्वराज की श्रद्धांजलि सभा में तमाम पार्टियों के नेताओं ने दिवंगत विदेश मंत्री को श्रद्धांजलि अर्पित की.

नई दिल्ली: सुषमा स्वराज की श्रद्धांजलि सभा में तमाम पार्टियों के नेताओं ने दिवंगत विदेश मंत्री को श्रद्धांजलि अर्पित की. इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें याद करते हुए कहा कि सुषमा स्वराज ने अनुशासन के साथ काम किया. वो विचारों की पक्की थीं. पीएम मोदी ने बताया कि सांसद कार्यकाल खत्म होने के बाद सरकारी आवास खाली नहीं करते हैं लेकिन उन्होंने तुरंत अपना आवास खाली कर दिया था. उनके व्यक्तित्व के अनेक पहलू थे. उन्होंने हर काम को जी जान से किया.

पीएम मोदी ने कहा कि सुषमा जी के व्यक्तित्व के अनेक पहलू, जीवन के अनेक पड़ाव थे. हम बीजेपी कार्यकर्ता के रूप में निकट साथी के रुप में काम करते हुए अनंत घटनाओं अनुभव के साक्षी हैं. जो भी काम मिले उसे जी जीन से करना, व्यक्तिगत जीवन में बहुत बड़ी ऊंचाई हासिल करने के बाद भी करना वह सभी के लिए प्रेरणा है.

मालूम हो कि सुषमा स्वराज ने इस बार लोक सभा का चुनाव नहीं लड़ा था, उनके इस फैसले का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि एक बार पहले भी उन्होंने चुनाव न लड़ने का फैसला किया था. तब मैं और वैंकेया जी मिले कहा कि कर्नाटक जाइए तो पार्टी के लिए गईं, परिणाम तय था फिर भी पार्टी के लिए वह वहां गईं. पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंन इस बार भी सुषमा स्वराज को मनाया पर यह सोचकर की दबाब आएगा उन्होंने सार्वजनिक घोषणा कर दी.

70 साल में 77 पासपोर्ट ऑफिस, सुषमा जी के 5 साल में 505

पीएम मोदी ने विदेश मंत्री के तौर पर सुषमा स्वराज के कार्यों को याद करते हुए कहा कि आमतौर पर विदेश मंत्रालय यानी कोट पेंट प्रोटोकॉल पर सुषमा जी ने प्रोटोकॉल को पीपल्सकॉल में तब्दील कर दिया. उन्होंने बताया कि सुषमा जी के कार्यकाल में कितना काम हुआ कि 70 साल में 77 पासपोर्ट ऑफिस और 5 साल में 505 पासपोर्ट ऑफिस.

प्रधानमंत्री मोदी ने सुषमा स्वराज से जुड़ा एक किस्सा याद करते हुए कहा, “यूएन में मेरा पहला भाषण होना था, सुषमा जी ने कहा कि स्पीच कहां हैं. मैंने तैयार नहीं की थी, उन्होंने कहा ऐसा नहीं होता है. तब रात को ही बैठकर स्पीच लिखी, मेरे नवरात्रि के उपवास चल रहे थे, उनका आग्रह था कि कुछ फोरम होते हैं उनकी अपनी मर्यादा होती है. आप चाहे कितने ही बड़े वक्ता हो, जो सही है वह बिना रोक-टोक बोलती थीं.

दुनिया भर में कहीं से भी भारतीयों ने मदद मांगी तो सुषमा जी ने की

गृह मंत्री अमित शाह ने सुषमा स्वराज को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, ‘सुषमा स्वराज जी के जाने से न केवल बीजेपी बल्कि समग्र देश के मानचित्र पर एक रिक्तता जो खड़ी हुई है उसकी भरपाई लंबे अर्से तक नहीं हो पाएगी.” उन्होंने कहा कि विदेश विभाग को जनता के साथ जोड़ना सुषमा जी की सबसे बड़ी उपलब्धि रही. गृह मंत्री ने कहा कि विश्व भर में कोई भी भारतीय कहीं भी हो, वो जब भी उन्हें ट्वीट करता था तो उसे हमेशा उनका जवाब और सहायता मिलती थी.

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सुषमा स्वराज को याद करते हुए कहा कि हम सभी ने एक प्रखर नेता, ओजस्वी वक्ता और ममतायुक्त व्यक्तित्व को खो दिया है. आदरणीय सुषमा जी के शब्दों में एक धार थी और तर्कपूर्ण तरीके से संसदीय सीमा में बात करने में उन्हें महारथ हासिल थी. उन्होंने आगे कहा, “सुषमा स्वराज जी ने बहुत कम समय में राजनीतिक जीवन में अपना स्थान प्रदेश से देश में स्थापित किया. बहुत से काम ऐसे किए जिससे उन्होंने राजनीति और सरकार में एक अमिट छाप छोड़ी.”

सुषमा स्वराज, पीएम मोदी ने बताया कौन सा सबक सिखा कर गईं सुषमा स्वराज, बताया पूरा किस्सा

राजनाथ सिंह ने उन्हें याद करते हुए कहा कि 1994 में सत्र समाप्त होने पर मैंने उन्हें सुषमा दी कहा, पहले भी कहता था पर तब उन्हें लगता था कि सुषमा जी कहता हूं, पर उस दिन उन्हें समझ आया कि दी कहा. जिसके बाद वो आकर मेरे दोनों हाथ पकड़कर भावुक हो गईं. वह जन-मन की नेता थीं. बिरले नेता होते हैं जो लोगों के मन पर राज करते हैं.

रक्षा मंत्री ने कहा कि 11 जून 1996 की उनकी स्पीच में जिस तरह एनडीए के पक्ष को रखा उसकी सब जगह चर्चा होती है. उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और आर्टिकल 370 हटाने की वकालत की, उनका लास्ट ट्वीट भी 370 को लेकर था. वह जो भी बोलती थी अंतरमन से बोलती थी.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सुषमा स्वराज को याद करते हुए कहा कि जब मैं पार्टी का अध्यक्ष था तब भी सार्वजनिक सभाओं के लिए सबसे ज्यादा उनकी मांग होती थी. राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में जब संगठन में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव हुआ. दूसरी मीटिंग में कुछ डिफरेंस ऑफ ओपिनियन थे पर सुषमा ने इतने प्रभावशाली ढंग से बात रखी कि प्रस्ताव पास हो गया.

विपक्षी दलों ने भी किया सुषमा स्वराज को याद, दी श्रद्धांजलि

एलजेपी अध्यक्ष राम विलास पासवान ने कहा कि मेरी उनसे 1977 में मुलाकात हुई थी. वह मेरी छोटी बहन थीं. हमारे बीच कभी किसी मुद्दे पर कोई कन्फ्यूजन नहीं रहा. हमने ऐसा क्या पाप किया था जो आप हमें छोड़कर चली गईं. बीएसपी नेता सतीश मिश्रा ने कहा कि उनसे किसी भी प्रकार का कोई द्वेष नही था. मैं जोहान्सबर्ग में तीन दिनों तक रहा. तब उन्होंने बड़ी बहन की तरह व्यवहार किया था.

आरजेडी नेता प्रेम चंद गुप्ता ने भी सुषमा स्वराज को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनसे जुड़ा एक किस्सा सुनाया कि विदेश यात्रा के दौरान उन्होंने मुझसे शाकाहारी खाने को पूछा था. सुषमा जी जब चौधरी देवीलाल की कैबिनेट में मंत्री थे तब नौजवान महिला नेता ने गुस्सा जाहिर किया. तो पता चला कि वह सुषमा स्वराज थीं. उन्होंने कहा था कि वह एक दिन काफी आगे जाएंगी.

अकाली दल नेता सुखबीर सिंह बादल ने दिवंगत पूर्व विदेश मंत्री को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि सुषमा जी सच्चे अर्थों में एक राष्ट्रीय नेता थीं, जिसने केवल दोस्त बनाए. वहीं शिवसेना के अरविंद सावंत ने सुषमा स्वराज से जुड़ी एक याद साझा करते हुए कहा कि वह उन्हें दीदी कहकर बुलाते थे. उन्होंने बताया कि सुषमा स्वराज बाला साहेब ठाकरे की लाडली थीं.

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