बाजार मंदा मगर खूब चल रहा है लिपस्टिक का धंधा

‘लिपस्टिक इंडेक्स’ के मुताबिक लैकमे और लॉरियल जैसे बड़े ब्रांड्स के लिपस्टिक की सेल दोगुनी तेजी के साथ बढ़ी है, जोकि सुस्ती का इशारा करती है.
lipstick, बाजार मंदा मगर खूब चल रहा है लिपस्टिक का धंधा

भारत में आजकल आर्थिक सुस्ती का दौर चल रहा है, जिसके चलते सभी वस्तुओं की बिक्री प्रभावित है. बावजूद इसके लिपस्टिक आर्थिक सुस्ती का कोई फर्क मालूम नहीं हो रहा है. भारत में लिपस्टिक की खूब सेल हो रही है. कॉस्मेटिक इंडस्ट्री के लिए ये अच्छी बात है लेकिन ऐसा होना आर्थिक सुस्ती की तरफ इशारा करता है.

‘लिपस्टिक इंडेक्स’ के मुताबिक लैकमे और लॉरियल जैसे बड़े ब्रांड्स के लिपस्टिक की सेल दोगुनी तेजी के साथ बढ़ी है, जोकि सुस्ती का इशारा करती है.

क्या है लिपस्टिक इंडेक्स?

‘लिपस्टिक इंडेक्स’ के फ़ॉर्मूले के मुताबिक आर्थिक सुस्ती के वक्त लिपस्टिक की डिमांड बढ़ जाती है. इस दौरान महिलाएं महंगे कॉस्मेटिक और फैशन की तुलना में लिपस्टिक पर ज्यादा पैसे खर्च करते हैं. ‘एस्टी लॉडर’ के पूर्व चेयरमैन लियोनार्ड लॉडर ने साल 2000 में आई मंदी के वक्त ‘लिपस्टिक इंडेक्स’ का प्रयोग कंपनी की कॉस्मेटिक सेल में हुई बढ़त समझाने के लिए किया था.

लैकमे ऑनर HUL की वाइस प्रेसीडेंट प्रभा नरसिम्हन ने कहा, ‘आर्थिक सुस्ती से कलर कॉस्मेटिक अछूत है. इसकी वजह ये है कि अभी भी कंज्यूमर यूजेस कम है. महिलाएं जैसे-जैसे ब्रांड्स के प्रति जागरूक हो रही हैं, अपग्रेड होना चाहती हैं. कई ब्रैंड्स प्रीमियम प्रॉडक्ट्स कुछ अधिक कीमत पर उपलब्ध करा रहे हैं.’

इन वजहों से बढ़ी है सेल

  • लोगों में फैशन अवेयरनेस बढ़ रही है.
  • ऑनलाइन ‘हाउ टू विडियोज’ सर्च करके भी लोग प्रोडक्ट यूज करना शुरू कर रहे हैं.
  • टियर-2, 3 शहरों में भी ई-कॉमर्स की वजह से उपलब्धता हुई है.
  • कलर कॉस्मेटिक में लो बेस की वजह से वृद्धि के लिए पर्याप्त जगह.
  • छोटे खर्च के लिए कस्टमर्स के पास पैसे हैं.

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