Ayodhya Case: CJI ने कहा- 17 अक्टूबर सभी पक्ष तक पूरी करें बहस

राजीव धवन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 142 के तहत मिली अपरिहार्य शक्तियों के तहत दोनों ही पक्षों की गतिविधियों को ध्यान में रखकर इस मामले का निपटारा करे.
Ayodhya, Ayodhya Case: CJI ने कहा- 17 अक्टूबर सभी पक्ष तक पूरी करें बहस

अयोध्या विवाद मामले (Ayodhya Case ) में 37वें दिन की सुनवाई शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में ख़त्म हो गयी. अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को कहा कि 17 अक्टूबर तक बहस पूरी करे. पहले सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी पक्षों को 18 अक्टूबर तक बहस पूरी करने के लिए कहा था. 14 अक्टूबर को मुस्लिम पक्ष की ओर से राजीव धवन बहस जारी रखेंगे. बाकी सब पक्षकार 15-16 को दलीलें देंगे. आइये जानते हैं सुनवाई के दौरान किस पक्ष ने क्या कहा….

  • हिन्दू पक्षकार के वकील ने कहा कि हमको नही लगता कि धवन सोमवार (14 अक्टूबर) तक बहस पूरी कर पाएंगे.CJI ने कहा कि हमको यकीन है कि धवन की जिरह सोमवार (14अक्टूबर) को खत्म हो जाएगी. उसके बाद मंगलवार और बुधवार को हिन्दू पक्ष को समय दिया जाएगा. गुरुवार को क्या मोल्डिंग ऑफ रिफिल ( विकल्पों रिलीफ) पर पक्षाकर बहस करेंगे. CJI ने कहा कि इस हिसाब से लगता है गुरुवार 17 अक्टूबर तक सुनवाई पूरी हो जाएगी.
  • धवन ने कहा कि हिंदुओं ने पहले सिर्फ बाहरी आंगन में पूजा के अधिकार की मांग की जिसको कोर्ट ने स्वीकार भी किया. मस्जिद के बाहरी दीवार पर अल्लाह लिखा हुआ था. धवन ने कहा कि 1882 में मुस्लिम ने एक याचिका दाखिल की थी, जिसमें कहा गया कि बाबरी मस्जिद के गेट के पास या बाबरी मस्जिद के अहाते में राम चबूतरा है जिसके किराया की मांग रघुबरदास से की गई थी. जिसको कोर्ट ने खारिज कर दिया था. बाबरी मस्जिद के मुतावल्ली मोहम्मद अज़गर ने इसको चैलेंज नहीं किया.जस्टिस नज़ीर ने पूछा कि कोर्ट ने किस आधार पर इसको खारिज किया था.धवन ने कहा कि वह इस बारे में चेक करके कोर्ट को बताएंगे.
  • धवन ने कहा कि हिंदुओं को पहले यह साबित करना होगा कि वह मंदिर था और उसके बाद यह साबित करना होगा कि मुस्लिम ने उस पर कब्ज़ा किया. हम जानना चाहते हैं कि 1885 से पहले वहां पर क्या हुआ? दरअसल 1885 में पहली बार यह मामला कोर्ट में आया था, जिसको लेकर मुस्लिम पक्ष का कहना है 1885 से पहले का कोई भी दस्तावेज कोर्ट को नही मानना चाहिए. धवन ने कहा कि चबूतरे को मस्जिद के अंदरूनी हिस्से में एक मक़सद के तहत बनाया गया.
  • धवन ने बताया कि 1885 में गैरकानूनी तरीके से चबूतरे को मस्जिद के पास बनाया गया. आपकी ट्रैवलर की स्टोरी है लेकिन उसमें चबूतरे के बारे में नहीं बताया गया है.
  • धवन ने कहा कि बाबर के ज़रिए मस्जिद को अनुदान दिया जाता था, जिसको लखनऊ के नवाबों ने जारी रखा.जस्टिस नज़ीर- अनुदान का मतलब यह है कि वह अनुदान सिर्फ मस्जिद के लिए था ना कि पूरी ज़मीन के लिए. सूट 5 में भी मस्जिद की बात मानी गई है.
  • धवन ने फिर कहा कि वैरागियों ने बाबरी मस्जिद पर हमला किया, जिसके बाद उसके रेनोवेशन के लिए बड़ी रकम चहिए थी. इसके बाद कोर्ट के आदेश पर ग्रांट के ज़रिए वहां पर मरम्मत का काम कराया गया. दरअसल राजीव धवन यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि वहां पर ग्रांट दी जाती थी.सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- बाबर के समय के ग्रांट को लेकर वहां पर कोई दस्तावेज है.धवन ने कहा कि हमारे पास इस बारे में कोई दस्तावेज नहीं है.
  • राजीव धवन- 1934 में मस्जिद पर हमले के दौरान मुसलमानों को मुआवजा दिया गया था. यहां तक ​​कि इसके रखरखाव के लिए मस्जिद को साफ करने की अनुमति भी दी गई थी. एक निरंतरता थी- बाबर की तरफ से.जस्टिस चंद्रचूड़- क्या बाबर द्वारा दिए गए अनुदान के लिए कोई प्रमाण है?राजीव धवन- हमारे द्वारा कोई रिकॉर्ड नहीं दिया जा सकता है और यहां तक ​​कि हिंदू भी अपनी कहानियों के अलावा कुछ भी नहीं दिखा सकते हैं.
  • राजीव धवन- अयोध्या में ब्रिटिश गवर्नर जनरलों और फैजाबाद के उपायुक्त द्वारा मस्जिद के लिए जमीन देने से संबंध मान्यता दी गयी. उनके द्वारा बाबर अनुदान अंग्रेजों ने स्वीकार किया था. पहले यह किराया मुक्त था और अब इसका राजस्व मुफ्त अनुदान है. ऐसा अवैध कब्जे से नहीं हुआ और यह अनुदान के माध्यम से उचित तरीके से हुआ.
  • धवन ने सुप्रीम कोर्ट को अपनी बहस के नोट का कंपाइलेशन दिया. धवन ने कहा कि दलीलों को सुनने के बाद ऐसा लगा कि फेल अभिनेता एक्टिंग कर रहे हैं. रियल अभिनेता जैसी की गई एक्टिंग देखने को नहीं मिली. जैसे राजकपूर और आमिर खान करते हैं.
  • धवन ने कहा कि कोई भी यह नहीं दावा खारिज कर रहा कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में नहीं हुआ है, लेकिन विवादित स्थल में ही जन्म हुआ, यह कैसे? धवन ने कहा कि विवाद इस पर है कि भगवान राम का जन्म सेंट्रल डोम के नीचे हुआ.
  • पहले यही विश्वास था कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में कहीं पर हुआ, लेकिन हिंदुओं ने याचिका दाखिल कर कहा कि तीन गुंबद की संरचना के बीच गुंबद के नीचे भगवान राम का जन्म हुआ, जिसको मुस्लिम ने कहा कि साबित करो, जिनते भी ट्रेवलर गुज़रे सबने कहा कि अयोध्या में मंदिर था.
  • धवन ने निर्मोही अखाड़े की याचिका का अंश पढ़ते हुए बताया कि याचिका में कहा गया है कि बाबर ने नहीं मीर बाकी ने मंदिर को गिराया. उसने ऐसा इसलिए किया, क्योंकि वह एक फकीर से बहुत प्रभावित था.
  • धवन ने निर्मोही अखाड़ा की याचिका का अंश पढ़ते हुए कहा कि याचिका में कहा गया है कि वहां पर तीन गुम्बद की कोई मस्जिद नहीं थी. भारतवर्ष में इस्लामिक कानून लागू नहीं होता. यह भी कहा गया कि गुम्बद वैदिक समयकाल से मिलता जुलता है.
  • धवन ने कहा कि हिंदुओं ने हमारी मस्जिद को गिरा दिया और हिंदुओं ने उलटा कहा कि उनको प्रताड़ित किया गया. दो राष्ट्र की बात कही गई. धवन ने कहा कि वक़्फ़ को अंग्रेजों ने भी अप्रूवल दिया था.
  • धवन ने कहा कि 1934 से किसी भी मुस्लिम को प्रवेश नहीं करने दिया गया, जबकि उनका कब्जा अवैध था और जो दावा उनकी ओर से किया गया कि प्रबंधन उनके हाथ में था, यह गलत था.
  • धवन ने कहा कि मस्जिद को गिराने की योजना मार्च 1992 में थी, जिसे दिसंबर में अंजाम दिया जा सका. यह एक सोची समझी साजिश थी.
  • धवन ने कहा कि निर्मोही अखाड़ा की जो दलीलें हैं, वह पूरी तरह से गलत हैं. उनकी ओर से कोई स्पष्ट साक्ष्य नहीं दिए गए हैं.
  • धवन ने कहा कि हिंदू पार्टी की तरफ से मध्यस्थता की बातों को भी मीडिया में बताया गया. इस पर भी CS वैद्यनाथन ने आपत्ति जताई और कहा कि इस तरह के आरोप कोर्ट में नहीं लगाने चाहिए.
  • धवन ने कहा कि मध्यस्थता से पहले ट्विटर और सोशल मीडिया पर फैलाया गया था कि 500 मस्जिद ऐसी हैं, जिसकी लिस्ट तैयार की गई है. जो मंदिर की जगह पर बनाई गई हैं.CS वैद्यनाथन ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि कोर्ट में इस तरह से ड्रामा नहीं होना चाहिए.
  • राजीव धवन- जब बाबर 1526 में आया था तो उस जगह पर कुछ नहीं था. वहां पर खाली जमीन पड़ी थी.मस्जिद एक जगह है, जो सीधे अल्लाह से जोड़ती है. इस्लाम में दिन में 5 बार नमाज़ होती है, जो अल्लाह से जोड़ती है. मस्जिद अल्लाह का घर है.कोर्ट- आप जो कह रहे हैं हम उससे जुड़ी हुई और जानकारी चाहेंगे.मुस्लिम धर्म में सिर्फ अल्लाह से दुआ करते हैं न कि परमशक्ति के अलग-अलग अवतारों से.
  • धवन ने दलील दी कि अयोध्या विवाद को लेकर हिंदू पक्षकार कहानी बना रहे हैं. हिंदू पार्टियों के बयान में विरोधाभास है. वो ये नहीं साबित कर पा रहे हैं कि वहां पर मस्जिद बनाई गई थी या नहीं. मस्जिद को बाबर ने बनाया था या औरंगजेब ने इस पर भी एकमत नहीं हैं.
  • धवन ने कहा कि न्यायिक व्यक्ति के हिसाब से वहां पर शेबेट का अधिकार किसका होगा यह भी सवाल है. धवन ने कहा कि वह किसी पूजा कर रहे हिंदुओं के ट्रैवलर का हवाला दिया गया और उसके अनुसार वहां एक धर्मिक स्थान था. देश की सभी मस्जिद भी धर्मिक स्थान हैं, इसलिए हमको 1885 से 1989 के बीच देखना चाहिए कि वह कहां पूजा कर रहे थे. सभी पूजनीय स्थल न्यायिक व्यक्ति नहीं हो सकते.धवन ने कहा हिंदू कहते हैं कि वह भगवान की पूजा कर रहे हैं. यह बिल्कुल सही है कि भगवान होंगे, तभी पूजा होगी. पिछले 140 सालों से वह किसी की पूजा कर रहे हैं. आप यह नहीं कह सकते वो स्वयंभू न्यायकि व्यक्ति हैं और हम उसकी पूजा कर रहे हैं.
  • धवन ने कहा कि क्या न्यायिक व्यक्ति होने के लिए धार्मिक विश्वास होना काफी है? कोर्ट को तय करना है कि न्यायिक व्यक्ति क्या होगा? अगर सिर्फ विश्वास पर मामला आधारित है तो सभी मुस्लिम का विश्वास है वहां पर मस्जिद थी.
  • धवन ने कहा कि वेदों में भी नहीं बताया गया है कि न्यायिक व्यक्ति क्या होता है और यह दावा किया जा रहा है कि भगवान राम का जन्मस्थान न्यायिक व्यक्ति है.
  • धवन- मस्जिद वह है, जहां कोई अल्लाह का नाम लेता है. नमाज अदा करता है.जस्टिस बोबड़े- क्या मस्जिद दैवीय है?धवन- यह हमेशा से ही दैवीय रहती है.जस्टिस बोबड़े- क्या यह अल्लाह को समर्पित होती है?धवन- हम दिन में 5 बार नमाज पढ़ते हैं. अल्लाह का नाम लेते हैं. ये अल्लाह को समर्पित ही है.
  • धवन ने कहा कि गैरकानूनी गतिविधि वह होती है, जहां दो समुदाय बंट जाएँ, क्योंकि हिंदू पक्ष की ओर से ऐसा हुआ जो 1934 की घटना से 6 दिसंबर, 1992 में हुआ, जिससे शांति भंग हुई. मस्जिद तोड़ने की घटना के बाद भारी तोड़फोड़ और हिंसक घटनाएं हुईं. इस पूरे मामले में अदालत यह गौर करे कि भारत के सेक्यूलरजम को भारी क्षति हुई, जबकि अदालत में मामला लंबित था.
    हिंदू पक्ष कहता है कि 12वीं शताब्दी में मंदिर था तो उसके तीन शताब्दी बाद बाबर आया. अदालत को यह देखने कि जरूरत है कि ऐतिहासिक घटनाओं में कितना गैप रहा.
  • धवन- हम कैसे देखते हैं कि इतिहास महत्वपूर्ण है. केके नायर के खिलाफ लगे आरोप पब्लिक डोमेन में हैं. गलत तरीके से आरोप लगाए गए. एक व्यक्ति को भी वहां पर सोने की अनुमति नहीं थी.धवन ने कहा कि वक़्फ़ की ज़मीन पब्लिक इस्तेमाल के लिए होती है. कोर्ट मानता है यह वक़्फ़ की प्रॉपर्टी है, लेकिन ये पब्लिक इस्तेमाल के लिए है ऐसा क्यों कहा गया?
  • राजीव धवन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 142 के तहत मिली अपरिहार्य शक्तियों के तहत दोनों ही पक्षों की गतिविधियों को ध्यान में रखकर इस मामले का निपटारा करे. इस मामले में मस्जिद पर जबरन कब्जा किया गया. लोगों को धर्म के नाम पर उकसाया गया. रथयात्रा निकाली गई. लंबित मामले में दबाव बनाया गया. मस्जिद ध्वस्त की गई और उस समय मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह ने एक दिन की जेल अवमानना के चलते काटी। अदालत से गुजारिश है कि तमाम घटनाओं को ध्यान में रखे.
  • धवन ने कहा कि 5 जनवरी 1950 में वहां पर रिसीवर नियुक्त किया गया, तो हम कह सकते हैं कि 1950-1990 के बीच किसी को भी वहां पर तस्वीर लेने की इजाज़त नही थी. हिंदू पक्षकार की तरफ से सुनवाई के दौरान कई तस्वीरें दिखाई गई थी.
  • राजीव धवन ने कहा कि वह राज्यसभा नहीं जाना चाहते हैं. धवन ने कहा कि कल कहा गया कि यह क्रिकेट टूर्नामेंट की तरह है, इस पर SC ने कहा था कि यह एक केस ही है. धवन ने कहा कि हमारे लिए भी यह एक केस की तरह है.
  • CJI रंजन गोगोई ने कहा कि अभी फिलहाल शनिवार को पीठ सुनवाई नहीं करेगी. SC ने कहा कि आज मामले की सुनवाई 4 बजे तक होगी.
  • मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि वह अपनी जिरह सोमवार 14 अक्टूबर तक खत्म कर लेंगे. कल से तेरह तक कोर्ट बंद रहेगी.
  • मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने जिरह शुरू की.

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