Ayodhya Case: ‘1949 में हिंदुओं ने मूर्तियां अंदर रखीं…मुस्लिमों ने बवाल पैदा करने के लिए कहानी बनाई’

वैद्यनाथन ने कहा कि दीवार पर गंगा का वाहन मगरमच्छ बना हुआ है. यह 16 नंबर दीवार पर बना हुआ था. यह 950-1050 शताब्दी के हैं.
Ayodhya, Ayodhya Case: ‘1949 में हिंदुओं ने मूर्तियां अंदर रखीं…मुस्लिमों ने बवाल पैदा करने के लिए कहानी बनाई’

अयोध्या मामले (Ayodhya Case) की 36वें दिन की सुनवाई गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में ख़त्म हो गयी. आइये जानते हैं किस पक्ष ने क्या दी कोर्ट में दलील.

  • PN मिश्रा ने कहा कि संविधानिक बेंच को सभी तरह के दस्तावेज और सबूतों को सुनना चहिए. CJI ने कहा हम संविधानिक बेंच नहीं हैं. यह मामले की सुनवाई करने के लिए 5 जजों की बेंच है. हम एक अपील की सुनवाई कर रहे हैं.
  • PN मिश्रा की जिरह पूरी हुई. सुशील कुमार जैन ने फिर से जिरह शुरू की.
  • PN मिश्रा हिंदू डिक्शनरी से कुछ शब्दों के मतलब बता रहे थे,जिस पर राजीव धवन ने आपत्ति जताते हुए कहा कि हिन्दू डिक्शनरी इन मामले में दस्तावेज नहीं है. सिर्फ इस्लामिक डिक्शनरी ही मामले में दस्तावेज के तौर पर दर्ज है.
  • सुप्रीम कोर्ट ने PN मिश्रा के नए सबमिशन को लेने से इनकार किया.
  • PN मिश्रा ने जिरह करते हुए स्कंद पुराण के बारे में बताते हुए रामसेतु के बारे में बताया. राजीव धवन ने कहा कि PN मिश्रा कोई नया सबूत या दस्तावेज नहीं पेश कर रहे हैं. अगर इनकी जिरह को कोर्ट मानेगा तो यह लगातार वेद और पुराण पर ही जिरह करेंगे. CJI ने PN मिश्रा से कहा कि आप कुछ नया नहीं बता रहे हैं. आप अपने मुख्य जिरह पर लगे हुए हैं.जस्टिस DY चंद्रचूड़ ने कहा कि आप राम सेतु के बारे में बात नहीं कर. राजीव धवन ने कहा कि स्कंद पुराण भगवान राम के जन्म स्थान के बारे में नहीं बताता.
  • सुशील कुमार जैन की दलील पूरी हुई. राम जन्मस्थान पुनरोद्धान समिति के वकील पी एन मिश्रा ने जिरह शुरू की.
  • बीस मिनट के अंदर दो हिंदू पक्षकारों की दलील समेटने के बाद जब मुख्य न्यायाधीश ने निर्मोही अखाड़े के वकील के पास महज डेढ़ घंटे का समय है. निर्मोही अखाड़े के वकील सुशील जैन ने टिप्पणी करते हुए कि सुनवाई 20-20 मैच की तरह चल रही है. मुख्य न्यायाधीश ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि आप कैसी बात कर रहे हैं. हमने आपको 4-5 दिन विस्तार से सुना है फिर भी आप इस तरह की बात कर रहे हैं. आप इसकी तुलना 20-20 मैच से कर रहे हैं. सुशील जैन ने अपने बयान के लिए खेद जताया.हिंदू पक्षकार गोपाल सिंह विशारद के वकील रंजीत कुमार को बमुश्किल 5 मिनट का समय ही मिला था जवाब देने के लिए. रामलला के वकील नरसिम्हन को 15 मिनट का समय मिला था.
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपको बात पूरी करने में कितना समय लगेगा. सुशील कुमार जैन ने कहा कि मैं कोर्ट का एक मिनट भी बर्बाद नहीं करूंगा, जल्द से जल्द अपनी बात रखूंगा. मैं सबसे बेचारी पार्टी से हूं. मै जनता हूं कि आपके पास फैसला लिखने का समय नहीं, लेकिन मेरी बात सुने बिना आपका फैसला अधूरा रहेगा, क्योंकि मेरा पूरा केस कब्ज़े पर आधारित है. जैन ने कहा कि यह दावा बिल्कुल गलत है कि दिसंबर 1949 में हिंदुओं ने मूर्तियां अंदर रखीं. मुस्लिम पार्टियों ने बवाल पैदा करने के लिए इस कहानी को बनाया. जैन अभी पज़ेशन के बारे में कोर्ट को बता रहे हैं. जैन ने कहा कि पज़ेशन दो तरह की होती है. डिफेक्ट पज़ेशन और डिफॉर पज़ेशन.
  • जैन ने कहा कि निर्मोही अखाड़े को पूरे क्षेत्र के लिए अलग याचिका दाखिल करने ज़रूरत नहीं थी. जब पहले से ही इसका एक हिस्सा हमारे प्रबंधन के तहत था. जब वाद आंतरिक आंगन के लिए दायर किया गया था तो अखाड़ा बाहरी आंगन के कब्जे में था.
  • सुशील कुमार जैन ने कहा कि निर्मोही अखाड़ा का शेबेट का अधिकार है और वहां पर कब्ज़े और शेबेट के अधिकार की मांग करते हैं. बाहरी हिस्से पर निर्मोही अखाड़ा का कब्ज़ा था और अंदरूनी हिस्से पर कब्ज़े की मांग के लिए फैजाबाद के मजिस्ट्रेट के सामने मांग की थी.सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप अपनी पुरानी बात को दोहरा रहे हैं. सुशील कुमार जैन ने कहा कि हम बाहरी हिस्से और अंदरूनी हिस्से को अलग मंदिर नहीं मांगते. हमारे शेबेट के अधिकार को किसी ने भी चुनौती नहीं दी. यहां तक कि मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने हमारे शेबेट के अधिकार को भी माना है.
  • सुशील कुमार जैन ने अपनी जिरह शूरू करी.
  • धर्मदास के वकील ने उनको सुने जाने की मांग की. कहा कि हम भी इस मामले में पार्टी हैं, हमको भी सुना जाना चाहिए.धवन ने कहा कि धर्मदास सुनवाई के पहले दिन से यहां पर आ रहे हैं, तो आज क्यों वह खुद को सुनने के लिए कह रहे हैं.धवन ने कहा कि वह महंत धर्मदास से रोज़ आशीर्वाद भी लेते हैं.सुप्रीम कोर्ट ने महंत धर्मदास के वकील की मांग पर कुछ नहीं कहा.
  • नरसिम्हन ने कहा- सबसे भरोसेमंद दस्तावेज स्कंद पुराण है जिस पर विश्वास किया जा सकता है. हिन्दू धर्म में अंत में मोक्ष प्राप्त होता है, यह जानना ज़रूरी है. हिंदुओं के लिए विश्वास क्यों ज़रूरी है कि भगवान राम का जन्म स्थान अयोध्या में है.नरसिम्हन ने स्कंद पुराण का श्लोक पढ़ते हुए कहा कि जन्म स्थान की परिक्रमा करके मोक्ष प्राप्त होगा.
  • रामलला के वकील नरसिम्हन ने जिरह शुरू की. नरसिम्हन ने कहा- सुप्रीम कोर्ट आस्था को साबित करने के लिए कह रहा है. आज़ादी से पहले कई फैसले ऐसे हैं, जिसमें विश्वास के आधार पर फैसला दिया गया.
  • सीजेआई ने गोपाल सिंह विशारद के वकील रंजीत कुमार और निर्मोही अखाड़ा परिषद के वकील सुशील जैन से कहा कि आप दोनों 4 बजे तक अपनी दलीलें पूरी करें. इसके बाद राजीव धवन को कोर्ट सुनेगी.
  • सीजेआई ने साफ किया कि वह हिंदू पक्षकार गोपाल सिंह विशारद और निर्मोही अखाड़ा को आज शाम चार बजे तक सुनेंगे. इसके बाद सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन को सुनेंगे. रामलला विराजमान ने अपनी दलीलें समाप्त की.
  • वैद्यनाथन ने कहा कि मेरे वरिष्ठ परासरन पहले यह स्पष्ट कर चुके हैं, 1959 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में साफ किया था कि रेस ज्युडी काटा में इसका उपयोग सिर्फ अपीलकर्ता की घोषणा के आधार पर किया जाता है.
  • राजीव धवन ने बीच में कहा कि ASI ने इलाहाबाद HC के सवाल पर कोई जवाब नहीं दिया था. ASI के निष्कर्ष पर हम सवाल उठाते हैं जो गलत भी हो सकती है. धवन ने कहा कि ASI की रिपोर्ट ने कहीं नहीं कहा कि पुराने ढांचे को तोड़कर मस्जिद खड़ी की गई. वहां पर कोई स्ट्रक्चर अगर था तो वह कैसे गिरा? क्या उसको गिराया गया या वह प्राकतिक आपदा में गिरा? कुछ स्पष्ट नहीं था.CJI ने बहस के दौरान CS वैद्यनाथन से कहा कि आपके पास अपनी जिरह पूरी करने के लिए सिर्फ 1 घंटे का समय है.CS वैद्यनाथन ने कहा ASI की खुदाई में सामने आया कि वहां पर जो हड्डियां मिली वो कई परतों में थीं.वैद्यनाथन ने कहा कि आस्था के संबंध में यह साक्ष्य है कि ऐतिहासिक किताबों, श्लोक से यह साफ होता है कि वहां पर रामजन्मस्थली है.
  • वैद्यनाथन ने कहा- पुरातत्व विभाग की खुदाई में जो सामने आया कि वहां पर जो हड्डियां मिलीं, वो कई परतों में थीं. आस्था के संबंध में यह साक्ष्य है कि ऐतिहासिक किताबों, श्लोक से यह साफ होता है. इसके अलावा पुरातत्व विभाग को मिली सामग्री बहुत कुछ कहती है.
  • वैद्यनाथन ने कहा कि पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट के आधार पर यह साफ कि यह स्थल राम जन्मस्थली है, क्योंकि यह किसी और धर्म से जुड़ी हुई नहीं है.
    जस्टिस चंद्रचूड़- कैसे आप इसे राम जन्मभूमि से जोड़ रहे हैं. हम आस्था पर सवाल नहीं उठा रहे कि यह राम जन्मस्थली है पर क्या अंदाजे से यह साफ होता है कि यह रामजन्मभूमि है.राजीव धवन ने कहा कि पुरातत्व रिपोर्ट ने अदालत के सवाल पर कोई जवाब नहीं दिया था. निष्कर्ष पर हम सवाल उठाते हैं, जो गलत भी हो सकता है. उन्होंने कहीं नहीं कहा कि पुराने ढांचे को तोड़कर मस्जिद खड़ी की गई. कुछ स्पष्ट नहीं था.
  • वैद्यनाथन ने कहा कि जो सामग्री वहां मिली और यह जब विभाग को साफ हो गया कि वहां पर बड़ा हिंदू धार्मिक स्थल था, तब उन्होंने अपनी रिपोर्ट में इस अंदाजे से कहा कि वहां पर था. पुरातत्व विभाग ने कहा कि कुल मिलाकर अपनी रिपोर्ट में वहां पर मिली दीवार, खंभों उन पर उकेरी गई आकृतियों के आधार पर निष्कर्ष निकाला.
  • DY चंद्रचूड़ ने पूछा कि HC के सभी जजों की ASI रिपोर्ट में दीवार पर क्या फाइंडिंग थी इस बारे में बताइए.CS वैद्यनाथन ने कहा कि वह इस बारे में एक नोट कोर्ट को दे देंगे.CS वैद्यनाथन ने 2 पिलर के बारे में बताते हुए कहा कि विवादित स्थल पर स्ट्रक्चर की फॉउंडेशन थी.CJI ने CS वैद्यनाथन से पूछा कि पिलर बेस और पिलर में क्या अंतर है?CS वैद्यनाथन ने कहा कि पिलर बेस वह है जिस पर पिलर खड़ा होता है. वहां पर ASI खुदाई में कई पिलर बेस भी मिले थे.DY चंद्रचूड़ ने कहा कि सभी पिलर बेस एक समयकाल के नही हैं. आप कैसे कह सकते हैं कि पिलर बेस उसी पिलर के हैं.CS वैद्यनाथन ने कहा कि सिर्फ 4 पिलर बेस अलग समयकाल के हैं. बाकी सारे पिलर बेस और पिलर एक ही समयकाल के हैं.CS वैद्यनाथन ने कहा कि ASI की रिपोर्ट से साफ है कि वहां पर एक मंदिर का स्ट्रक्चर था.
  • मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि रिपोर्ट में कहीं ऐसा नहीं कि किसी पुराने ढांचे को तोड़ा गया. जवाब में वैद्यनाथन ने कहा कि यह हिंदू पक्ष का विषय है कि वहां पर पुराना हिंदू धार्मिक ढांचा तोड़ा गया या नहीं.
  • वैद्यनाथन ने कहा कि पुरातत्व विभाग द्वारा की गई खुदाई के बाद तैयार की गई रिपोर्ट में स्पष्ट है कि दीवारें और खंभें 10-11वीं शताब्दी के थे, जिन पर नया ढांचा बाद में खड़ा किया गया. ऐसे में ईदगाह या अन्य इस्लामिक इमारत पुराने ढांचे पर खड़ी की गईं हैं.
  • वैद्यनाथन ने कहा कि दीवार और खंभे काफी पुराने हैं. इससे यह तो साफ है कि विवादित स्थल पर बनाया गया नया ढांचा पुराने पर था.
  • वैद्यनाथन ने कहा कि अंदरूनी दीवारें दीवार नंबर 16 से जुड़ी हुई थीं. खंभों की जहां तक बात है, खंभे का मूल दो आधारों पर छत से जुड़ा था. यह विवादित स्थल के ढांचे का फाउंडेशन था. जांच में यह पाया गया. उनके आधार पर पूर्व में कई मंजिलों का ढांचा पहले बना था.
  • उन्होंने कहा कि दीवार 16 दक्षिण मुखी नहीं थी और 18डी पूरबमुखी थी. दीवार नंबर 17 पश्चिम मुखी इनसे जुड़ी हुई थी. पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट में यह दिया गया है, जो साफ करती है कि यहां इस्लामिक ढांचा था. यह सही नहीं है, उससे पहले पुराना ढांचा था जो हिंदू धर्म का था. उन पर ईंटों की दीवार बनाई गई और प्लास्टर किया गया. यह 10 या 11वीं शताब्दी की थीं.
  • वैद्यनाथन ने कहा कि पेज नंबर 39 में चित्र है, जिसमें साफ है दीवार नंबर 16 दीवार नंबर 18d से जुड़ी हुई थी.
  • वैद्यनाथन ने कहा कि दीवार पर गंगा का वाहन मगरमच्छ बना हुआ है. यह 16 नंबर दीवार पर बना हुआ था. यह 950-1050 शताब्दी के हैं. उन्होंने कहा कि दीवार नंबर 5 हाल ही में बनी हुई है, जिसके पीछे दीवार नंबर 16 थी.
  • रामलला विराजमान की तरफ से सी वैद्यनाथन ने दलील देनी शुरू की.

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