कुमारस्वामी के वक्त कमिश्नर बनने के लिए लॉबिंग, येदियुरप्पा ने पूरी कर दी हसरत!

कर्नाटक में सियासी ड्रामे के बाद अब एक और ड्रामा शुरू हो गया है. इस प्रकरण से मालूम चल रहा है कि पुलिस विभाग में नियुक्ति पर राजनीति किस कदर हावी है.

एक बार फिर कर्नाटक में भूकंप आ गया है, लेकिन इस बार केंद्र सियासत नहीं बल्कि नौकरशाही है. पुलिस विभाग में अफरातफरी मची है लेकिन असर राजनीति में महसूस किया ही जाना था. दरअसल न्यूज़ 18 कन्नड ने एक ऑडियो क्लिप प्रसारित की है जिसकी वजह से बैंगलोर पुलिस कमिश्नर भास्कर राव परेशानी में फंसते दिख रहे हैं. साथ ही परेशान नए नवेले सीएम येदियुरप्पा भी होंगे. आपको बताते हैं कि ऐसा क्यों?

असल में फोन पर हुई इस बातचीत के प्रामाणिक होने की पुष्टि नहीं हो सकी है लेकिन बताया जा रहा है कि बातें छह महीने पुरानी हैं. फोन पर राव की बात एक शख्स फराज़ से हो रही है. राव की बातों से पता चल रहा है कि वो कुमारस्वामी सरकार के दौरान कांग्रेस की मदद से खुद को बैंगलोर का कमिश्नर बनवाना चाह रहे हैं. बातचीत से ही अनुमान लग रहा है कि आईपीएस आलोक कुमार को तत्कालीन मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी का भरोसा प्राप्त है जबकि वो एडीजीपी रैंक के अफसरों में सबसे जूनियर हैं. राव परेशान दिख रहे हैं कि उनकी जगह आलोक कुमार को सीएम की ओर से तवज्जो मिल रही है.  उधर फराज़ की घुसपैठ कांग्रेस नेतृत्व में भी साफ-साफ दिखाई पड़ रही है.

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यहां पेश है दोनों के बीच हुई वो पूरी बातचीत जिसने नई येदियुरप्पा सरकार को अपने पहले संकट में डाल दिया है.

पहली क्लिप
फराज़- सर, मैं सुबह दिल्ली आया हूं. अहमद साहब कल नहीं आ सके क्योंकि बीमार हो गए थे. वेणुगौपाल बैंगलोर में हैं… अहमद भूपिंदर हुड्डा के साथ बैठक में हैं. एक बार वो बैठक खत्म कर लें मैं उनसे मिलकर सीधी बात कर लूंगा.

राव- बढ़िया, बढ़िया… सीएम कल फिर दिल्ली जा रहे हैं.

फराज़- कम हम राहुल जी से मिल सकते हैं. मौका है, जो भी अच्छा विकल्प होगा, देख लेंगे.

राव- क्या वो AP (अहमद पटेल) साहब से मिलेंगे?

फराज़- मेरे हिसाब से AP साहब दो दिन बाद बैंगलोर में विस्तार के लिए होंगे जो हो रहा है.. वो सब मिलजुलकर तय कर लेंगे. बुलवा दूंगा.

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अहमद पटेल

दूसरी क्लिप
राव- फराज़, सॉरी मैंने तुम्हारी कॉल मिस कर दी थी.

फराज़- कोई बात नहीं सर, मैंने बात की साहब से और उन्हें सब डीटेल में एक्स्प्लेन किया आपके कौशल विद्यार्थी के पास जाने से लेकर, सेवा दल के बारे में आपकी योजनाओं तक सब. मैंने उनको बताया कि वो इस्तीफा देना चाहते हैं और फिर संगठन में आ जाएंगे. मैंने भी एडवाइज़ किया और दूसरों ने भी कि उनकी नौकरी के अभी कुछ और साल हैं… मैंने सारा एक्स्प्लेन किया और मैंने कहा कि प्रियंका जी को मिलना का टाइम लें क्या. उनका मूड अच्छा था आज और कुमारस्वामी का आना.. शायद वो राहुल जी से मिलें. मैंने उसको इसके बारे में भी बताया..कमिश्नर का.. अगर एक साल वो रह जाएंगे, सरकार गिरती भी है तो अपना एक आदमी है राजीवन. वो सब जानते हैं. वो जानते हैं कि मुद्दा क्या है.. पहले उन्होंने मुझसे पूछा कि तुम क्यों आए.. तुम्हें बैंगलोर में रुकना चाहिए था.. वेणुगोपाल वहां हैं. मुझे उनसे झूठ बोलना पड़ा.. नहीं कुछ काम था और आ गया.. कल चला जाऊंगा वापस.

वे (अहमद पटेल) उनके (कुमारस्वामी के) पिता (एच डी देवेगौड़ा) की गुडबुक्स में हैं.. मैंने उनको कहा (अहमद पटेल) कि अगर आप हल्के से बोल देंगे तो कृपा कर देंगे.. मना नहीं करेंगे आपको. तो वो बोले ठीक है मै बोल दूंगा.. ये ठीक वक्त नहीं है.. दो तीन दिन गुज़रने दो.. क्योंकि अगर वो तीन-चार दिन कहते हैं… तो वो चार-पांच दिन से आठ दिन बन जाएंगे, तब तक किसी को कमिट कर दिया तो प्रॉब्लम हो जाएगा.. इसीलिए मैंने उनको बताया कि सर, अभी वो चेंज करनेवाले हैं… वो (कुमारस्वामी) कैंडीडेट चुन रहे हैं… वो (अहमद पटेल) बोले एक काम करो, वेणुगोपाल को बोल देना बोलने के लिए कि ना करे और मेरा नाम ले के बोल देना. उन्होंने कहा मेरा नाम ले के बोल देना. मैं झूठ तो नहीं बोल सकता वेणुगोपाल को. अब मैं विश्वास से कह सकता हूं अहमद साहब ने कहा है आप कुमारस्वामी को बोल दीजिए कि अभी सेलेक्ट ना करे. मैंने कहा ठीक है सर, मैं बोल देता हूं. बस उतनी बात सुननी थी मुझे, कल सुबह आकर वेणुगोपाल को सुना देता हूं ये बात.

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भास्कर राव

राव- तब तो बहुत लंबी बात हुई है…

फराज़- हां सर, लंबा बात हुआ सर, मैं उनके साथ शाम तक था.. तो भी रोज़ा साथ में खोल दिए.. फिर मैंने उनको बताया.. ये बड़ी बात है सर, चार-पांच दिन ये बात खोलना सही नहीं होगा, अभी बाकी सारे मुद्दे चल रहे हैं, मेरा उनको कहना अच्छा नहीं होगा. तब मुझे उनको बताना पड़ा कि चार-पांच दिन में सलेक्ट कर देंगे किसी को.. कमिट कर देंगे.

राव- चार-पांच दिन मतलब.. आज से…

फराज़- वेणुगोपाल जी को बोल दो वो कुमारस्वामी जी को बोल देंगे

राव- अच्छा… ये बहुत बढ़िया है.

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आलोक कुमार

तीसरी क्लिप
फराज़- मैं AICC में हूं सर. मैडम बड़े दिन बाद AICC में आई हैं. मैं बस यहां खत्म ही कर रहा हूं, निपटा रहा हूं. अगले दस मिनट में आपको कॉल करता हूं सर.

राव- मैं एक डीजीपी के मीटिंग में जा के.. क्या साढ़े 12 बजे कॉल कर लूं?

फराज़- ठीक, सर. अगले दस मिनट में खत्म कर लूंगा. आप कॉल कर लेना सर, तब तक निपटा लूंगा.

राव- साढ़े 12?

फराज़- ठीक, सर. असल में मैडम कई साल बाद AICC की बैठक में आई हैं तो सब अधिकारियों के साथ उनकी बैठक है.

राव- सीनियर मैडम?

फराज़- हां, सीनियर मैम. उनकी मीटिंग थी… (अस्पष्ट)

राव- ओह इसलिए, कल भी आपको काफी रात हो गई थी..

फराज़- हां सर, वो पांडिच्चेरी के सीएम आ गए थे, मैं बताता हूं आपको, सब ठीक गया है.

राव- इसको पॉजिटिव कराना ही है, अपने हाथ में लेना ही है.. क्योंकि सब कुछ उनके हाथ में जा रहा है.

फराज़- कल मैं उसके पास गया सर, मैं अंदर गया और उनको सब एक्स्पेलन किया, जो जो पॉसिबल है.. मैंने पहले ही उनको बताया था, और अब दूसरी बार मैंने उन्हें समझाया कि वेणुगोपाल जी बैंगलोर साउथ के लिए आपके बारे में सोच रहे हैं और आप दिल से कांग्रेसी हैं.. कैसे आप इस्तीफा देना चाह रहे थे और पार्टी ज्वाइन करना चाहते थे और कैसे मैंने ही आपको समझाया कि ये सही वक्त नहीं है. एक साल निकल जाने दीजिए. उन्होंने (अहमद पटेल) मुझे थम्स अप दिखाया, मतलब फिज़िकली उन्होंने थम्स अप दिखाया और कहा – बेटा, कमिश्नर ऑफ पुलिस बनाऊंगा उनको. ये उनके शब्द थे. नारायणस्वामी इंतज़ार कर रहे थे.. पांडिच्चेरी के सीएम.. मैंने कहा कि मैं चलता हूं.. कुछ नहीं सर, अहमद पटेल का इतना बोलना बड़ी बात है.

राव- ग्रेट.. ग्रेट है.

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फराज़- मुझे आज उनके पास जाना होगा.. और मैं विस्तार से बात करूंगा क्योंकि पांडिच्चेरी के सीएम इंतज़ार कर रहे थे.. थम्स अप दिखाये और चार महीने बाद हंड्रेड परसेंट बनाऊंगा बोलने के लिए और सीएम के साथ कॉ-ऑर्डिनेट करने के लिए बोल दूंगा.

राव- चार महीने के बाद का आर्ग्युमेंट आप लो ही मत, क्योंकि चार महीने बाद किसी को साल भर से पहले हटा नहीं सकते. वो आदमी (आलोक कुमार) कोर्ट चला जाएगा क्योंकि भारत सरकार के नियम बहुत बहुत सख्त हैं. किसी को भी अगर एक्ज़ीक्यूटिवव पोस्ट पर रखा जाएगा तो साल भर के लिए नहीं हटा सकते. इस आर्ग्युमेंट में पड़ें ही मत. सबसे पहली बात है कि ये आदमी बहुत बहुत जूनियर है. चार साल जूनियर. कैडर का बाजा बज जाएगा.

फराज़- दूसरे ADGPs के बीच भी अशांति है.

राव- हां… सरकार की फालतू बदनाम होगी और इस आदमी पर बहुत आरोप हैं. इसी आदमी के ऊपर ये सीएम ऐलीगेशन किया था लॉटरी का पैसा खाया करके.. इन्क्वायरी चल रहा है अभी.. सीबीआई का इन्क्वायरी चल रहा है अभी… वो ये कर नहीं सकते.. और ज़बरदस्ती करके होगा तो ये सिर्फ पूरी गठबंधन सरकार के लिए शर्मनाक होगा.

फराज़- सीबीआई जांच अभी भी चल रही है सर?

राव- हां, सीबीआई ने अभी बंद नहीं की है. इसके ऊपर सीबीआई जांच चल रहा है. अगर वो बोले हमारा खास आदमी आलोक कुमार है… अरे, उसके ऊपर तो सीबीआई इन्क्वायरी चल रहा है और क्यों फजीहत कर रहे हैं.. बोल देंगे तो बात खत्म हो जाएगा वहीं पर. इसके ऊपर, क्या है ना सारा पोस्टिंग उनका ही है, एक आदमी बोलो जो कांग्रेस का हो?

फराज़- कोई नहीं है, सर.

राव- आप मेजोरिटी में हो, बॉस.

फराज़- और जो भी वो चाहते थे, रेवन्ना ने हर जगह लूट का खेल खेला.

राव- हां, इसमें किस्मत से मुझे दोनों रेवन्ना और बिग मैन (देवेगौड़ा) का साथ हासिल है. यही (कुमारस्वामी) है जो है इसके (आलोक कुमार) पीछे लगा हुआ है. और कुछ नहीं है. AP साहब बोल दिए तो हंड्रेड परसेंट हो जाएगा.. ये कह दें कि तुम्हारे बहुत लोग हैं, हमारा आदमी को रखो.

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अब क्या हैं हालात?
जून 2019 में ADGP रैंक के सबसे जूनियर अफसर आलोक कुमार को बैंगलोर पुलिस कमिश्नर बना दिया गया, और भास्कर राव हाथ मलते रह गए.  हालांकि आलोक कुमार अपने पद पर 47 दिन ही रह सके और येदियुरप्पा सरकार आते ही उनका ट्रांसफर हो गया. नतीजतन उनका नाम सबसे कम वक्त के लिए बंगलौर कमिश्नर बनने वाले शख्स के तौर पर दर्ज हो गया. उनकी जगह भास्कर राव को भेजा गया जो पिछली सरकार के वक्त से ही इस ज़िम्मेदारी को संभालना चाह रहे थे.  ज़ाहिर है, आलोक कुमार इस प्रकरण से नाखुश थे और यही वजह थी कि उनकी जगह जब भास्कर राव को पद संभालने भेजा गया तो वो कार्यभार सौंपने से पहले चले गए.

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सरकार बदली को बदल गई ज़िम्मेदारी

अब सवाल येदियुरप्पा पर उठ रहे हैं क्योंकि जैसे उन्होंने 47 दिनों के अंदर एक कमिश्नर का तबादला किया वो काफी विवादित हुआ. ऊपर से उन्होंने भास्कर राव को पद के लिए चुना जिनके ऑडियो क्लिप अब वायरल हो रहे हैं. वैसे अब तक क्लिप को वैरिफाई नहीं किया जा सका है और राव ने भी ऐसी बातचीत किए जाने से साफ इनकार किया है. फिलहाल क्लिप की जांच का आदेश जारी हो गया है.

इस बीच प्रदेश में राव की नियुक्ति को राजनीति से प्रेरित माना जा रहा है. खुद येदियुरप्पा ने कहा था कि उनकी सरकार प्रतिशोध लेने के चक्कर में नहीं पड़ेगी मगर कुर्सी संभालते ही जिस तरह 5 आईपीएस अफसरों के तबादले हुए उनकी बात को ज़ुबानी जमाखर्च ही ज़्यादा माना गया.  इसके बाद छह और आईपीएस और 3 आईएएस अफसरों का भी स्थानांतरण किया गया. आपको बता दें कि आलोक कुमार से पहले भी बैंगलोर के 32वें पुलिस कमिश्नर की नियुक्ति बेहद विवादित रही थी. तब सीएम कुमारस्वामी ने आधी रात को कमिश्नर बदला था. वो ADGP रैंक के सबसे कनिष्ठ अधिकारी थे और उनके कमिश्नर बनने से 18 अफसरों को सुपरसीड करना पड़ा था. इससे आईपीएस लॉबी में बड़ा हंगामा मचा था.