मार्च-अप्रैल में नहीं लगा होता लॉकडाउन तो देश में 25 लाख से ऊपर पहुंचता मौत का आंकड़ा- केंद्रीय पैनल

पैनल ने यह भी कहा कि भारत ने कोरोनावायरस के पीक को पार कर लिया है. साथ ही यह भी अनुमान लगाया कि अगर सभी उपायों का सही तरह से पालन किया जाता है, तो अगले साल की शुरुआत तक महामारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है.

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भारत में कोविद-19 की प्रगति का अध्ययन करने के लिए केंद्र ने NITI आयोग के सदस्य वीके पॉल की अध्यक्षता में 10 सदस्यीय समिति नियुक्त की थी, जिसने रविवार को कहा कि अगर मार्च-अप्रैल में लॉकडाउन नहीं किया जाता, तो अगस्त तक देश में मौत का आंकड़ा 25 लाख के पार जा सकता था.

इसके अलावा पैनल ने यह भी कहा कि भारत ने कोरोनावायरस के पीक को पार कर लिया है. साथ ही यह भी अनुमान लगाया कि अगर सभी उपायों का सही तरह से पालन किया जाता है, तो अगले साल की शुरुआत में इस महामारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है.

पैनल की तरफ से कही गईं मुख्य बातें…

  • भारत में त्योहार के मौसम के कारण एक महीने में 26 लाख मामलों की बढ़ोतरी देखी जा सकती है, यदि सावधानियों का पालन नहीं किया जाता है.
  • केरल, कर्नाटक, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल में अभी भी मामलों की संख्या में बढ़ रही है, जबकि दूसरे राज्यों महामारी का असर स्थिर हो गया है.
  • सर्दियों में कोरोनावायरस की दूसरी लहर से इनकार नहीं किया जा सकता है.
  • स्थानीय लॉकडाउन अब प्रभावी नहीं हैं, लेकिन मार्च-अप्रैल में अगर लॉकडाउन नहीं हुआ होता, तो अगस्त तक देश में मौत का कुल आंकड़ा 25 लाख के पार जा सकता था. अभी देश में मरने वालों की संख्या 1.14 लाख है.
  • देश में अब तक केवल 30 प्रतिशत आबादी की ही इम्यूनिटी विकसित हो पाई है.
  • कोरोनावायरस भारत में सितंबर के महीने में चरम पर पहुंच गया, लेकिन अब यह नीचे की ओर बढ़ रहा है.
  • फरवरी 2021 तक संकट खत्म होने की संभावना है. उस समय तक, देश में 10.5 मिलियन मामले हो सकते हैं.

केंद्र की कमेटी का दावा, भारत में कोरोना का पीक खत्म, अगले साल की शुरुआत तक हो सकता है काबू

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