दूसरी बार सरकार बनाने निकले नमो, जानें कितनी जानदार है BJP की जीत

मोदी पांच साल का पूर्ण कार्यकाल पूरा करने के बाद सत्ता में वापसी करने वाले भारत के तीसरे प्रधानमंत्री होंगे.

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नई दिल्‍ली: राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 16वीं लोकसभा को तत्‍काल प्रभाव से भंग करने की कैबिनेट की सलाह मान ली है. उन्‍होंने शनिवार दोपहर को इससे जुड़े आदेश पर हस्‍ताक्षर किए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार शाम राष्‍ट्रपति से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे. जल्‍द ही 17वीं लोकसभा के नए सांसदों के शपथग्रहण का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा.

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का लोकसभा चुनाव में 300 सीटें जीतना देश के चुनावी इतिहास की 9वीं घटना है. इससे पहले 1952, 1957, 1962, 1967, 1971, 1980, और 1984 में कांग्रेस 300 से ज्‍यादा सीटें हासिल कर सत्‍ता पा चुकी है. 1977 में जनता पार्टी को 302 सीटें मिली थीं. संसद के 543 सदस्यीय निचले सदन लोकसभा में भाजपा 303 सीटें जीत चुकी है.

2019 के चुनावों में भाजपा के वोट शेयर में 2014 के मुकाबले 6.5 प्रतिशत का उछाल देखने को मिला. इस चुनाव में कुल 60.37 करोड़ वोट पड़े थे, जिनमें से 22.6 करोड़ से ज्‍यादा बीजेपी को मिले. पांच साल पहले बीजेपी को 17.1 करोड़ वोट मिले थे. इस लिहाज से देखें तो बीजेपी के वोटों में 32 प्रतिशत की बढोत्‍तरी हुई.

मोदी पांच साल का पूर्ण कार्यकाल पूरा करने के बाद दोबारा सत्ता में वापसी करने वाले भारत के तीसरे प्रधानमंत्री होंगे. इससे पहले जवाहरलाल नेहरू और मनमोहन सिंह पूर्ण कार्यकाल के बाद लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री बने थे.

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लोकसभा चुनाव 2019 में 10 से ज्‍यादा सीटें जीतने वाली पार्टियां

भारतीय जनता पार्टी : 303 सीटें
भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस : 52 सीटें
द्रविड़ मुनेत्र कणकम : 22
युवजन श्रमिक रितु कांग्रेस पार्टी : 22
ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस : 22 सीटें
शिवसेना : 18 सीटें
जनता दल (यूनाइटेड) : 16 सीटें
बीजू जनता दल : 12
बहुजन समाज पार्टी : 10 सीटें

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उत्तर प्रदेश में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 62 सीटें जीतीं हैं. सपा को पांच और बसपा को 10 सीटें मिली हैं. कांग्रेस केवल रायबरेली की सीट जीत पाई जहां से संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी जीती हैं. अन्य को दो सीट मिली हैं. महाराष्ट्र में भाजपा का अपनी सहयोगी शिवसेना से बहुत दोस्ताना नहीं था. लेकिन, फिर भी दोनों को साथ लड़कर शानदार सफलता मिली. भाजपा को 23, शिवसेना को 18, एनसीपी को चार और कांग्रेस को एक सीट मिली है. अन्य को दो सीट मिली हैं.

बिहार में भाजपा को 17 और जद-यू को 16 सीट पर विजय मिली है. कांग्रेस केवल किशनगंज की सीट जीत सकी. अन्य को छह सीट मिली है. सबसे बड़ी हार जेल में बंद लालू यादव की पार्टी राजद की हुई है जिसका सूपड़ा साफ हो गया है. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सभी सात और उत्तराखंड की सभी पांच सीटों पर भाजपा विजयी रही है. पार्टी ने गुजरात (26), हरियाणा (10) और हिमाचल (4) की भी सभी सीटें जीत लीं.

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सिर्फ पंजाब में आगे निकल पाई कांग्रेस

मध्य प्रदेश और राजस्थान में भाजपा केवल एक-एक सीट नहीं जीत पाने की वजह से सौ फीसदी सफलता नहीं हासिल कर सकी. पार्टी ने मध्य प्रदेश की 29 में से 28 और राजस्थान की 25 में से 24 सीटें जीतीं. मध्य प्रदेश में केवल छिंदवाड़ा सीट कांग्रेस के हिस्से में आई. यहां तक कि पार्टी के कद्दावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया गुना की सीट हार गए.

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कांग्रेस की उत्तर भारत में जीत केवल पंजाब में प्रभावी रही जहां मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में पार्टी ने आठ सीटें जीतीं. भाजपा और अकाली दल को दो-दो सीटें मिलीं. आम आदमी पार्टी महज एक सीट जीत पाई. पूर्वोत्तर के राज्य असम में भाजपा को नौ, कांग्रेस को तीन और अन्य को दो सीटें मिलीं. अरुणाचल की सभी दो और त्रिपुरा की दोनों सीट भाजपा ने जीती. मणिपुर में एक सीट भगवा दल ने जीती जबकि एक अन्य के खाते में गई.

तमिलनाडु में द्रमुक ने अपने गठबंधन के साथ शानदार वापसी की. राज्य की 38 में से 23 सीट द्रमुक ने और उसकी सहयोगी कांग्रेस ने आठ तथा अन्य ने छह सीटें जीतीं. अन्नाद्रमुक को महज एक सीट मिली. भाजपा का यहां भी खाता नहीं खुला. ओडिशा में कांटे का मुकाबला हुआ जिसमें नवीन पटनायक के नेतृत्व वाले बीजद ने 21 में 11 सीट जीतीं. भाजपा को नौ सीट मिलीं जो उसके पहले के प्रदर्शन से अधिक हैं. कांग्रेस को एक सीट मिली.

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