संसद में असहमति की जगह लेकिन मर्यादा का रखना होगा ध्यान: ओम बिरला

लोकसभा अध्यक्ष (Lok Sabha Speaker) ने कहा, “कोरोना काल में सत्र कराना वाकई कठिन था. संसद सत्र को चलाना संवैधानिक कर्तव्य था. हमारी यह जिम्मेदारी थी कि उच्च स्तरीय सुरक्षा मानकों का पालन किया जाए. इसलिए हमने सभी सुरक्षा संबंधी दिशानिर्देशों का ध्यान रखा.”

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 4:07 pm, Sat, 26 September 20

लोकसभा अध्यक्ष (Lok Sabha Speaker) ओम बिरला (Om Birla) ने कोरोना काल (Corona Period) में खत्म हुए संसद (Parliament) के मानसून सत्र (Monsoon Session) को लेकर मीडिया से बातचीत की. ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था है. कोरोना काल में हुए सत्र ने देश भर के संस्थानों को लोकतंत्र का संदेश दिया है. ओम बिरला ने कहा कि हमारे सांसद बड़ी संख्या में मतदाताओं द्वारा चुने गए हैं और हर सांसद 10-15 लाख लोगों का प्रतिनिधित्व करता है. ऐसे में हम कोशिश करते हैं कि जितना अधिक संभव हो उतना सांसदों को अपनी बात रखने का मौका दिया जाए.

उन्होंने कहा, “एक यह संदेश भी गया है कि जितना संभव था, हमने संसद चलाने की कोशिश की. यह बहस करने की जगह है. यहां पर अपनी असहमतियों को रखा जा सकता है लेकिन हर एक चीज संसदीय मर्यादा के तहत होनी चाहिए.”

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‘मौटे तौर पर सत्र को चलाने में सफल रहे’

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, “कोरोना काल में सत्र कराना वाकई कठिन था. संसद सत्र को चलाना संवैधानिक कर्तव्य था. हमारी यह जिम्मेदारी थी कि उच्च स्तरीय सुरक्षा मानकों का पालन किया जाए. इसलिए हमने सभी सुरक्षा संबंधी दिशानिर्देशों का ध्यान रखा. मुझे लगता है कि मौटे तौर पर हम सत्र को चलाने में सफल रहे हैं.”

‘सभी विकल्पों पर किया गया था विचार’

ओम बिरला ने कहा कि मैंने सत्र को लेकर राज्यसभा के अध्यक्ष से लंबी बातचीत की. हमने कई विकल्पों पर विचार किया. अंत में हम इस बिंदु पर पहुंच कि संसद में ही सत्र आयोजित किया जा सकता है. यह पहला मौका था जब लोकसभा के सदस्य राज्यसभा में बैठे और उच्च सदन के सांसद लोकसभा में आए.

‘हमारी जिम्मेदारी बिलों पर बहस कराना’

उन्होंने कहा कि विधेयक लाना सरकार का काम है और हमारी जिम्मेदारी बिलों पर अधिकतम बहस सुनिश्चित करना है. हम प्रत्येक बिल पर बहस के लिए समय आवंटित करने का प्रयास करते हैं. जब किसी मामले पर सर्वसम्मति विकसित नहीं होती है, तो हम आम सहमति बनाने के लिए कठिन प्रयास करते हैं.

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