1952 से लेकर 17वीं लोकसभा का यह सत्र लोकसभा का सबसे स्वर्णिम सत्र रहा- ओम बिरला

लोकसभा स्पीकर ने बताया कि इस सत्र में बजट पर 23 घंटे, रेलवे अनुदानों पर 13 घंटे, सड़क अनुदान मांगों पर 7 घंटे, ग्रामीण विकास अनुदानों पर 9 घंटे, युवा मामलों की मांगों पर 4 घंटे तक चर्चा चली.

नई दिल्ली: राज्यसभा के बाद लोकसभा में भी धारा 370, राज्य पुनर्गठन बिल पास हो गया. इसके साथ ही लोकसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया. लोकसभा स्पीकर ने कहा कि सभा ने 24 जून को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव को 13 घंटे की चर्चा के बाद स्वीकार किया. साथ ही अहम विधायी कामों को निपटान हुआ.

लोकसभा स्पीकर ने बताया कि इस सत्र में बजट पर 23 घंटे, रेलवे अनुदानों पर 13 घंटे, सड़क अनुदान मांगों पर 7 घंटे, ग्रामीण विकास अनुदानों पर 9 घंटे, युवा मामलों की मांगों पर 4 घंटे तक चर्चा चली. अन्य बकाया अनुदान मांगों को 17 जुलाई को रखा गया और स्वीकार किया गया. वर्तमान सत्र में कुल 36 विधेयक पारित हुए और संसद के अंदर 1992 से आजतक सबसे ज्यादा बिल आप सभी ने पारित किए हैं.

लोकसभा आज अनिश्चित काल के लिए स्थगित की जा रही है. इस मौके पर स्पीकर ओम बिड़ला ने कहा कि 1952 से लेकर 17वीं लोकसभा का यह सत्र लोकसभा का सबसे स्वर्णिम सत्र रहा है. उन्होंने कहा कि 17वीं लोकसभा का पहला सत्र 17 जून से शुरू हुआ था जो आज खत्म हो रहा है, जिसमें कुल 37 बैठकें हुआ, जो करीब 280 घंटे तक चली. सत्र की पहली बैठक कुछ देर मौन रहकर शुरू हुई थी. 17 और 18 जून को कुल 539 सदस्यों ने शपथ ली. 19 जून को लोकसभा अध्यक्ष के निर्वाचन का प्रस्ताव रखा गया और सभा को मुझे चुनने के लिए गर्व महसूस कर रहा हूं.

राज्यसभा में बिल पास होने के बाद लोकसभा में सर्वसम्मति से बिल पास कर दिया गया. जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांटे जाने संबंधी जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक को राज्यसभा की मंजूरी मिलने के एक दिन बाद लोकसभा की भी मंजूरी मिल गई. लोकसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने सभी सवालों के जवाब भी दिए. इसके अलावा जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने संबंधी आर्टिकल 370 के प्रावधानों को हटाने का प्रस्ताव भी पास होगया.

अमित शाह ने संसद में जवाब देते हुए कहा कि सदस्यों के मन के भाव को समझ रहा हूं क्योंकि सब लोग 70 साल से एक दर्द को दबाकर बैठे हैं. उन्होंने कहा कि कहा जाता है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है लेकिन किसी अन्य राज्य को नहीं बोलते, उसकी वजह 370 है क्योंकि इसी ने जनमानस के मन में शंका पैदा की थी, कश्मीर भारत का अंग है या नहीं. धारा 370 कश्मीर को भारत से जोड़ती नहीं बल्कि जोड़ने से रोकती है, जो आज सदन के आदेश के बाद खत्म हो जाएगी.

जम्मू कश्मीर के लोगों को दिलाया भरोसा
बिल पर घंटों चली चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने सदन को भरोसा दिया कि जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य होने पर उसे फिर से पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जा सकता है. बिल के तहत जम्मू-कश्मीर से अलग हो लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश बनेगा, लेकिन वहां विधानसभा नहीं होगी. जम्मू-कश्मीर भी अब केंद्रशासित प्रदेश होगा लेकिन उसके पास विधानसभा भी होगी. बिल पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के हर सवाल और संदेह का विस्तार से जवाब दिया.

धारा 370 आतंकवाद की जड़- शाह
गृह मंत्री अमित शाह ने आर्टिकल 370 की वजह से जम्मू-कश्मीर को हुए नुकसान को बताया और इसे आतंकवाद की जड़ करार दिया. उन्होंने आर्टिकल 370 को विकास विरोधी, महिला, दलित और आदिवासी विरोधी बताया और जम्मू-कश्मीर को दिए विशेष राज्य के दर्जे को खत्म किए जाने को एक ऐतिहासिक भूल को सही करने वाला ऐतिहासिक कदम बताया. इसके साथ ही गृह मंत्री ने सदन को भरोसा दिया कि जम्मू-कश्मीर में हालात जैसे ही सामान्य होंगे, उसे फिर राज्य का दर्जा देने पर सरकार विचार कर सकती है. शाह ने बिल पास कराए जाने की प्रकिया पर उठे सवाल का भी जवाब दिया और तर्कों के साथ बताया कि बिल संविधानसम्मत प्रक्रिया के तहत ही लाया गया है.

अमित शाह ने दिया नारा
गृह मंत्री अमित शाह ने ‘भारत माता की जय’, ‘जहां हुए बलिदान मुखर्जी वह कश्मीर हमारा है’ के नारों बीच चर्चा पर जवाब देना शुरू किया. शाह ने कहा ’70 सालों की टीस खत्म होने का आनंद व्यक्त नहीं किया जा सकता. हम कभी क्यों नहीं बोलते कि यूपी, पंजाब या तमिलनाडु भारत का अभिन्न अंग है, यह इसलिए था कि 370 ने जनमानस में एक संशय था. आज यह कलंक मिट गया. कहा जाता है कि आर्टिकल 370 भारत को कश्मीर से जोड़ता है. धारा 370 भारत को कश्मीर से नहीं जोड़ती है बल्कि जोड़ने से रोकती है और आज यह रुकावट हमेशा के लिए दूर हो जाएगी.

परिस्थिति सामान्य होते ही देंगे पूर्णराज्य का दर्जा
शाह ने कहा कि वोट बैंक के लिए 370 को हटाने का विरोध हो रहा है. आज 370 हट जाएगा और इतिहास में यह दिन स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा. विपक्ष के कई सदस्यों ने कहा है कि यह यूटी हमेशा के लिए रहेगा क्या, क्यों बनाया? मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि जहां तक यूटी का सवाल है तो परिस्थिति सामान्य होते ही पूर्ण राज्य का दर्जा देने में सरकार को कोई आपत्ति नहीं है.

पीओके पर बोले शाह
अमित शाह ने कहा कि कहा जा रहा है कि पीओके पाकिस्तान को दे दिया, नरेंद्र मोदी की सरकार पीओके को कभी दे ही नहीं सकती. पीओके पर हमारा दावा उतना ही मजबूत है, जितना पहले था…..बिल में पीओके और अक्साई चीन दोनों का जिक्र है. 20 जनवरी 1948 को संयुक्त राष्ट्र ने UNCIP का गठन किया और 13 अगस्त 1948 को UNCIP के प्रस्ताव को भारत, पाकिस्तान दोनों ने स्वीकार कर लिया। 1965 में पाकिस्तानी सेना ने हमारी सीमा का अतिक्रमण किया था और उसी वक्त UNCIP का प्रभाव खत्म हो गया था.

मनीष तिवारी का संबोधन
मनीष तिवारी ने इतिहास का जिक्र किया लेकिन एक सीमा पर आकर वह रुक गए. मैं पूछना चाहता हूं कि जब 1948 में हमारी सेना विजयी हो रही थी, सेना पाकिस्तानी कबीलों के कब्जा किए गए हिस्से को जीत रही थी तो एकतरफा संघर्षविराम किसने किया? नेहरूजी ने किया था और उसी वजह से आज पीओके है. सेना को नहीं रोका होता तो पीओके आज भी हमारे साथ होता. अधीर रंजनजी ने संयुक्त राष्ट्र का जिक्र किया. लेकिन यूएन में लेकर कौन गया. रेडियो पर संघर्षविराम का एकतरफा ऐलान किया गया. मामले को यूएन में नेहरूजी ही ले गए. आज की घटना का जब भी जिक्र होगा तो इतिहास नरेंद्र मोदी को सालों-सालों तक याद करेगा.

पाक भड़का रहा है अलगाववाद की भावना- शाह
370 जम्मू-कश्मीर राज्य के संबंध में अस्थायी उपबंध था. उसे हटाना इसलिए जरूरी था कि यह संसद के अधिकार को कम करता है. पाकिस्तान अलगाववाद की भावना भड़का रहा है तो 370 की वजह से. वहां के लोगों में अलगाववाद होता है. वहां की विधानसभा की मंजूरी के बिना देश का कोई कानून वहां लागू नहीं होता. 370 के अलावा 371 और दूसरे आर्टिकल भी विशेष और अस्थायी उपबंध करते हैं लेकिन उनमें कुछ गलत नहीं है तो उन्हें क्यों बदलें.

370 और 371 की तुलना नहीं हो सकती- शाह
370 और 371 की तुलना नहीं हो सकती. इसलिए नॉर्थ-ईस्ट या अन्य राज्यों को आश्वस्त करता हूं कि सरकार की कोई मंशा 371 को हटाने की नहीं है. इसी रास्ते पर 2 बार 370 पर संशोधन हो चुका है, तब यह रास्ता ठीक था और आज क्यों खराब है? वजह वोट बैंक राजनीति है. इंटरनेट बंद होने पर- 1989 से 1995 तक अक्सर कर्फ्यू लगा रहता था, फोन तो छोड़िए खाने के लिए भी कुछ नहीं मिलता था.

हम नहीं करेंगे हुर्रियत नेताओं से कोई चर्चा- शाह
70 साल तक इस मुद्दे पर चर्चा करते-करते थक गए, 3 पीढ़ियां आ गईं. किससे चर्चा करें? जो पाकिस्तान से प्रेरणा लेते हैं, उनसे चर्चा करें? हम हुर्रियत से चर्चा नहीं करेंगे. हम कश्मीरियों से चर्चा करेंगे, वे हमारे हैं, हम चर्चा से नहीं भांगेंगे. घाटी की जनता से जितनी ज्यादा हो सकेगी हम चर्चा करेंगे और उन्हें अपने कामों से आश्वस्त करा देंगे कि वे हमारे लिए खास हैं. हम प्यार से बात कर उनके विकास के लिए सब करेंगे, वे 100 कहेंगे तो हम 110 देंगे. पिछली सरकार में हमने वहां के लिए सवा लाख करोड़ दिया था, जिसमें 80 हजार करोड़ खर्च भी हो चुके हैं.

पश्चिमी पाकिस्तान से आए 2 शरणार्थी मनमोहन सिंह और इंद्र कुमार गुजराल देश के प्रधानमंत्री नहीं बन पाए होते अगर वे कश्मीर गए होते. आज वहां पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को नागरिकता नहीं मिली. मानवाधिकार की बात करते हैं, क्या कश्मीरी पंडितों का मानवाधिकार नहीं था? 370 महिलाविरोधी है, दलित विरोधी है, आदिवासी विरोधी है, विकास विरोधी है.’