36 के चक्कर में फंस सकते हैं अजित पवार, चाचा शरद ने कराई बागी विधायकों की परेड

माना जा रहा है कि अजित पवार के पक्ष में ( Ajit Pawar ) NCP के 22 विधायक हैं. दल बदल कानून के तहत अजित पवार को कम से कम दो तिहाई विधायकों को अपने पास रखना होगा.
BJP NCP alliance anti defection law, 36 के चक्कर में फंस सकते हैं अजित पवार, चाचा शरद ने कराई बागी विधायकों की परेड

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी –  Nationalist Congress Party ( NCP ) के नेता शरद पवार ( Sharad Pawar ) ने प्रेस के सामने उन विधायकों की परेड कराई जो राजभवन गए थे. ये NCP के बागी नेता और अब डिप्टी सीएम Ajit Pawar के लिए बड़ी चुनौती है. उनके समर्थन से ही देवेंद्र फड़नवीस महाराष्ट्र के नए सीएम  ( Maharashtra Chief Minister Devendra Fadnavis ) बने हैं. अब दोनों को दल-बदल कानून ( Anti Defection Law ) से निपटना होगा.

माना जा रहा है कि अजित पवार के पक्ष में ( Ajit Pawar ) NCP के 22 विधायक हैं. दल बदल कानून के तहत अजित पवार को कम से कम दो तिहाई विधायकों को अपने पास रखना होगा. महाराष्ट्र विधानसभा ( Maharashtra Assembly )   में एनसीपी के 54 विधायक हैं. इस लिहाज से उनके पास कम से कम 36 विधायकों का समर्थन जरूरी है.

Party/AllianceSeat  
BJP10525.75%
SS5616.41%
CONG4415.9%
NCP5416.7%
OTH29

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ( Bhagat Singh Koshyari ) ने देवेंद्र फड़नवीस और अजित पवार को शपथ तो दिला दी है पर असली परीक्षा सदन के भीतर होगी.  एसआर बोम्मई मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 1994 के फैसले में कहा था कि बहुमत का फैसला सदन के भीतर ही हो सकता है.

अब विधानसभा का अंक गणित देखें. 288 सदस्यीय सदन में बहुमत का जादुई आंकड़ा 145 है. बीजेपी के 105 विधायक हैं जो पूर्ण बहुमत से 40 कम है. ऐसे में देवेंद्र फड़नवीस सरकार का दोरामदार अजित पवार पर है.

क्या है एंटी डिफेक्शन कानून ?

70 के दशक में दल-बदलू नेताओं ने अजीबोगरीब हरकत किए. हरियाणा के गया प्रसाद तो एक दिन में ही तीन पार्टियां बदलने वाले विधायक बने. ऐसी स्थिति में एक कानून की जरूरत महसूस हुई.

राजीव गांधी ने इसी के मद्देनजर 1985 में 52वां संविधान संशोधन विधेयक पेश किया. इसके तहत दल बदल कानून बनाया गया जो संविधान की दसवीं अनुसूची में है.

10वीं अनुसूची के पैरा 2(1) में स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता छोड़ने वाले विधायक को अयोग्य ठहराने का प्रावधान है. पैरा 4 में इस मामले में छूट दी गई है.

छूट दो शर्तों पर पर आधारित है.  विधायक की पार्टी का किसी अन्य राजनैतिक दल के साथ विलय हो गया हो.  इस विलय के लिए पार्टी का दो-तिहाई बहुमत तैयार हो. इन दो शर्तों पर सदन का अध्यक्ष, किसी विधायक को अयोग्य होने से बचा सकता है.

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