‘Pawar’ गेम में हार गए देवेंद्र फडणवीस लेकिन महाराष्‍ट्र में तीन दशक के सबसे बेदाग सीएम

देवेंद्र फडणवीस ने जब राज्य की सत्ता संभाली थी तो महाराष्ट्र आदर्श घोटाले को लेकर सुर्खियों में था.
Devendra Fadnavis, ‘Pawar’ गेम में हार गए देवेंद्र फडणवीस लेकिन महाराष्‍ट्र में तीन दशक के सबसे बेदाग सीएम

महाराष्ट्र (Maharashtra) की सियासत में आया भूचाल अब ख़त्म होता दिख रहा है. लेकिन लगभग एक महीने के इस सफर में राजनीति के कई रंग देखने को मिले. राजनीति के छात्रों के लिए महाराष्ट्र (Maharashtra) की सियासत एक प्रयोगशाला जैसी साबित हुई. जहां उन्हें सियासी दाव-पेंच, राजभवन के अधिकार और संवैधानिक मूल्यों को बचाने में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका से रू-ब-रू होने का मौक़ा मिला.

इन सब के बीच शनिवार सुबह जो कुछ हुआ वो महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजनीति के लिए सबक है या कलंक, यह तो आने वाली पीढ़ी तय करेगी. लेकिन इस दौरान देवेंद्र फडणवीस की छवि काफी धुमिल हुई.

देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) इससे पहले 5 साल और 12 दिनों के लिए बीजेपी-शिवसेना के नेतृत्व में महाराष्ट्र के सीएम रहे. उनका पूरा कार्यकाल बेदाग़ रहा.

फडणवीस ने महज़ 47 साल की उम्र में मुख्यमंत्री बनकर राज्य के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री होने का इतिहास अपने नाम कर लिया.

ब्राह्मण वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाले देवेंद्र गंगाधर फडणवीस पर पार्टी के भरोसे की वजह भी बेदाग़ और युवा जोश से भरी सियासी यात्रा रही. हालांकि वो सीएम बनने से पहले महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष रह चुके थे. इसलिए उनकी प्रशासनिक कुशलता से पार्टी पूरी तरह अवगत थी. संघ से जुड़ाव की वजह से वो निजी जीवन में भी अनुशासित रहे.

गोपीनाथ मुंडे के असामयिक निधन के बाद उभरे फडणवीस 

फडणवीस के मुख्यमंत्री बनने की एक वजह दिवंगत नेता गोपीनाथ मुंडे से क़रीबी भी बताई जाती है. गोपीनाथ मुंडे के असामयिक निधन के बाद उपजे राजनीतिक खालीपन को फडणवीस ने ही भरा.

2014 के महाराष्ट्र चुनाव में बीजेपी (BJP) को मिली भारी जीत के बाद फडणवीस का सीएम चुना जाना ही आश्चर्यचकति करने वाला था, क्योंकि तब लोगों को लग रहा था कि नितिन गडकरी को महाराष्ट्र की ज़िम्मेदारी मिल सकती है.

राज्य के सबसे युवा सीएम फडणवीस ने लोकसभा चुनाव से पहले मराठा आरक्षण कार्ड खेला. तब उनके सामने पिछड़ों के आरक्षण को बचाने की चुनौती थी. उन्होंने पिछड़े वर्ग के कोटे को बिना छेड़े अगड़े वर्ग को साधने का काम किया. अगड़ों को बीजेपी का कोर वोटर माना जाता है.

मराठाओं के लिए 16 फीसदी आरक्षण

ज़ाहिर है पिछले साल मराठाओं ने आरक्षण मुद्दे को लेकर हिंसक आंदोलन किया था. जिसके बाद राज्य के 30 फीसदी मराठाओं के लिए सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 16 फीसदी आरक्षण देने का बिल पारित किया गया.

देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र में विकास के एजेंडे पर आगे बढ़ रहे थे. उन्होंने राज्य में सिंचाई व्यवस्था पर ज़ोर दिया. इसके अलावा पांच साल के कार्यकाल में उन्होंने महानगरों में इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी काफी ज़ोर दिया.

देवेंद्र फडणवीस सरकार के कार्यकाल में छगन भुजबल की गिरफ्तारी से बड़ा संदेश भेजने की कोशिश की. लेकिन किसानों के मोर्चे पर फडणवीस सरकार का कर्जा माफ न करने वाला फैसला गैर सियासी लगता है.

जनसंघ से जुड़े थे फडणवीस के पिता

देवेंद्र फडणवीस का जन्म 22 जुलाई 1970 को नागपुर के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ. उनके पिता गंगाधर राव आरएसएस और जनसंघ से जुड़े थे. वो महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य भी थे. पिता से मिली राजनीतिक विरासत और सियासी अनुभव का देवेंद्र को फायदा मिला.

वो कॉलेज की पढ़ाई के दौरान एबीवीपी (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) से जुड़ गए. इसके अलावा नागपुर में संघ की शाखा से भी जुड़े. 21 साल की उम्र में देवेंद्र फडणवीस नागपुर के नगर निगम के नगरसेवक नियुक्त किए गए.

साल 1997 में मात्र 27 साल की उम्र में वो मेयर बने और साल 1997 से 2001 तक महापौर रहे. साल 1999 में वो नागपुर से विधायक बने तो साल 2001 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रहे. साल 2014 के विधानसभा चुनाव में देवेंद्र फडणवीस नागपुर के दक्षिण पश्चिम से विधायक बने.

देवेंद्र लॉ से ग्रेजुएट हैं और उन्होंने एमबीए किया हुआ है. साल 2006 में उन्होंने अमृता रानाडे से शादी की. इन दोनों की एक बेटी है, जिसका नाम दिविजा फडणवीस है.

महाराष्ट्र में पिछले तीन दशक के मुख्यमंत्रियों के इतिहास को देखें तो कहीं न कहीं सब पर कोई न कोई आरोप लगते रहे. देवेंद्र फडणवीस ने जब राज्य की सत्ता संभाली थी तो महाराष्ट्र आदर्श घोटाले को लेकर सुर्खियों में था. लेकिन तब से अब तक के इतिहास को देखें तो इस तरह के कोई भी आरोप बीजेपी सरकार पर नहीं लगी.

Related Posts