‘अल्पसंख्यक कट्टरता’ से बचें, ओवैसी के बहाने ममता बदल तो नहीं रहीं रणनीति?

पश्चिम बंगाल में 2021 में विधानसभा चुनाव होना है. लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मिली बड़ी जीत के बाद टीएमसी काफी चौकन्नी है और फूंक-फूंक कर क़दम रख रही है.

अब तक पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के निशाने पर बीजेपी हुआ करती थी. लेकिन लगता है अब ममता अपना राजनीतिक स्टाइल बदल रही है. अपने राजनीतिक जीवन में पहली बार उन्होंने ‘अल्पसंख्यक कट्टरता’ के खिलाफ लोगों को सचेत रहने की सलाह दी है.

उन्होंने कहा, ‘मैं देख रहा हूं कि अल्पसंख्यकों के बीच कई कट्टरपंथी हैं. इनका ठिकाना हैदराबाद में है. आप लोग इन पर ध्यान मत दें.’ इसके साथ ही उन्होंने हिंदू समुदाय के लोगों से भी ‘हिंदू कट्टरपंथी’ ताकतों के बहकावे में नहीं आने की अपील की है.

दरअसल, ममता कूचबिहार में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ एक बैठक कर रही थीं. जहां उन्होंने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलीमीन (एमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर इशारों-इशारों में निशाना साधा. इस बैठक के बाद ममता बनर्जी कूचबिहार स्थित मदन मोहन मंदिर गईं और प्रार्थना की.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी से मुक़ाबला करने के लिए ममता बनर्जी ने नई रणनीति तैयार की है. इसी को देखते हुए सीएम ममता ने ‘अल्पसंख्यक कट्टरता’ की बात की और बाद में कूच बिहार में मंदिर यात्रा भी की.

दरअसल कूचबिहार में हिंदू वोटरों की संख्या ज्यादा है और तृणमूल कांग्रेस अपना वोट बैंक खोना नहीं चाहती.

पश्चिम बंगाल में 2021 में विधानसभा चुनाव होना है. लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मिली बड़ी जीत के बाद टीएमसी काफी चौकन्नी है और फूंक-फूंक कर क़दम रख रही है.