मिलिए, देश के उस पहले शख्‍स से जिसे मिला ‘नो कास्ट, नो रिलीजन, नो गॉड’ सर्टिफिकेट

रवि नास्तिक ने नेताओं से अपील की है कि वो धर्म व जाति के आधार पर राजनीति न करें नहीं तो देश के टुकड़े-टुकड़े हो जाएंगे.

हरियाणा: देश चुनाव के माहौल से गुजर रहा है. चुनाव आयोग के पास भी धर्म-जाती के इस्तेमाल से संबधित शिकायतें जा रही हैं. कोई भी इस रेस में पीछे नहीं दिखाई नहीं देता. इस रेस में कहीं न कहीं भेड़चाल में बड़ा वर्ग शामिल देखा जाता है. क्या ऐसा ही सच में है? कोई इससे हट कर भी है क्या? तो इसका जवाब हरित का्रन्ति से निकले हरियाणा की नहरी नगरी टोहाना से आ रहा है.

टोहाना के रवि ने खुद के विचार को अपनाते हुए पहले कोर्ट के माध्यम से नास्तिक कहलवाने का अधिकार लिया है. अब रवि नास्तिक ने इसमें दो कदम बढ कर धर्म, जाति व भगवान को नकारते हुए खुद के नाम प्रमाण पत्र जारी करवाया है, जिसे जारी करवाने के लिए उसे गहरी मशक्त करनी पड़ी. स्थानीय प्रशासन ने जब इसे नहीं बनाया तो रवि ने उपायुक्त महोदय को इस बारे में गुहार लगाई कि उनके मत के अनुसार उसे नो कास्ट, नो रिलिजन, नो गॉड प्रमाण पत्र जारी करवाया जाए.

रवि ने बताया कि उन्होनें पहले कोर्ट से नास्तिक कहलाने का हक जताया था. इसके बाद उन्होनें स्थानिय प्रशासन से अनुरोध किया था कि उनका नो कास्ट, नो रिलिजन, नो गॉड का प्रमाण बनाया जाए. यह संभवत पहला प्रमाण पत्र है जिसे प्रशासन के माध्यम से हासिल किया गया है.

इसको जारी करने से तहसीलदार साहब ने मना कर दिया था जिसके बाद रवि जिला स्तर पर उपायुक्त महोदय से मिला उसके बाद यह प्रमाण पत्र उसे जारी हुआ. इसका सिरियल नंबर भी एक ही है. मेरा उददेश्य भी यही है धर्म की राजनीति, जात की राजनिति समाप्त हो. राजनेता भी धर्म के नाम पर बुरा बोल रहे है. इस प्रमाण पत्र के बनने पर उन्होनें खुशी जाहिर की.

इसके साथ ही इस चुनावी माहौल में उन्होनें अपील भी की कि जो राजनेता धर्म और जात के नाम पर लोगों को बांट रहे है ऐसा ना करे. सबसे पहले इन्सानियत है बाकि तो बाद में है. इन्सान और इंसानियत सबसे पहले है, इसके बारे में सोचो समझो. युवाओं की सोच को दबाओं मत. क्योकि आने वाला समय युवाओं का है इन जैसे नेताओं का नहीं. ऐसा चलता रहा तो देश आने वाले समय में टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा.

बता दें कि नास्तिक होने को लेकर शहीद भगत सिंह ने शहादत से पहले ‘मैं नास्तिक क्यों हूं’ का चर्चित लेख लिखा था. इसके पहले नास्तिक व आस्तिक विचार को लेकर पक्ष रहे हैं, मगर लिखित में ये लेख आने के बाद युवाओं के एक पक्ष ने इसे अपनाते हुए अपनी अलग राह बनाई थी.

आज रवि ने संभवत देश का ये पहला अनोखा प्रमाण पत्र खुद के नाम जारी करवाया है. देखना ये होगा कि उसकी धर्म जाति को ने मानने की अपील का समाज पर क्या असर पड़ता है. ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा पर जब देश चुनावों के दौर से गुरज रहा है ऐसे में रवि नास्तिक का ये कदम चर्चा का विषय बना हुआ है.

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