मेनका से पहले बेटे वरुण गांधी के मुस्लिम विरोधी बयान पर मचा था हंगामा, जाना पड़ा था जेल

मेनका गांधी ने शुक्रवार को मुसलमानों को लेकर एक विवादित बयान दिया. उनके बयान की जमकर आलोचना हो रही है. कुछ साल पहले मेनका के बेटे वरुण गांधी ने भी कुछ ऐसा ही बयान दिया था जिस पर खूब हंगामा मचा था.

नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी मुसलमानों पर दिए गए अपने विवादित बयान को लेकर मीडिया की सुर्खियों में हैं. चुनाव आयोग इस बयान के लिए मेनका को नोटिस भेज चुका है और विपक्षी पार्टियां लगातार उन पर हमला बोल रही हैं.

मेनका ने शुक्रवार को सुल्तानपुर में एक चुनावी रैली में चेतवानी भरे लहजे में कहा था कि मुसलमानों के बगैर मेरी जीत होगी तो मुझे बहुत अच्छा नहीं लगेगा.

केंद्रीय मंत्री ने कहा था, “जीत तो मेरी पहले हो चुकी है. मैं मुस्लिमों के समर्थन से जीतना चाहती हूं. अगर मुसलमानों के समर्थन के बगैर मेरी जीत होगी तो मुझे अच्छा नहीं लगेगा.”

उन्होंने कहा था कि ‘दिल खट्टा हो जाता है जब कोई मुसलमान काम लेकर आता है. तब मैं सोचती हूं कि रहने ही दो, क्योंकि नौकरी भी तो आखिर सौदेबाजी होती है. हम महात्मा गांधी की छठी औलाद तो हैं नहीं कि देते ही जाएंगे और इलेक्शन में मार खाते जाएंगे.”

‘आधे-अधूरे ढंग से पेश हुआ बयान’
हालांकि मेनका गांधी ने बयान पर विवाद बढ़ता देखकर मीडिया में इसकी सफाई दी. मेनका ने कहा कि उनके बयान को आधे-अधूरे ढंग से पेश किया गया. उन्होंने कहा कि मैंने खुद अपने अल्पसंख्यक सेल की एक मीटिंग बुलाई थी. आप सभी जानते हैं कि इतने सालों में अल्पसंख्यक लोगों को बहुत चाहती हूं.

उन्होंने कहा, “मैंने बहुत खुशी के साथ बोला था कि मैं जीत रही हूं. अगर आप इस जीत का हिस्सा बनेंगे तो आप इस दाल का छौंका बनेंगे, जो मुझे अच्छा लगेगा. आप पूरा भाषण देखिए तो आपको पता चलेगा कि वह प्यार भरा था.”


सुल्तानपुर-पीलीभीत से है पुराना नाता 
मालूम हो कि मेनका गांधी के पति संजय गांधी का कार्यक्षेत्र सुल्तानपुर ही रहा है. ये उस समय अमेठी संसदीय क्षेत्र में आता था. मेनका इस बार सुल्तानपुर से भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ रही हैं. इससे पहले वो पीलीभीत से छह बार सांसद रह चुकी हैं.

भाजपा के युवा और एक समय आक्रामक नेता की छवि रखने वाले वरुण गांधी मेनका गांधी के बेटे हैं. वरुण इस बार पीलीभीत लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के उम्मीदवार हैं, जबकि 2014 लोकसभा चुनाव में वो सुल्तानपुर सीट से सांसद चुने गए थे.

इस प्रकार से 2019 लोकसभा चुनाव में मां-बेटे के बीच अपनी-अपनी पारंपरिक सीटों की अदला-बदली हुई है. मां-बेटे के बीच सीटों की अदला-बदली भले ही हुई हो लेकिन एक समुदाय विशेष के प्रति दिए गए इनके बयानों में भी अदला-बदली या फिर कहें कि समानता नजर आती है.

वरुण गांधी पर जहर उगलने का था आरोप
बात साल 2009 की है. वरुण ने 7 मार्च 2009 को पीलीभीत संसदीय क्षेत्र में एक चुनावी सभा करते हुए कथित तौर पर मुसलमानों के खिलाफ खूब जहर उगला था. उन्होंने इस दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को लेकर भी काफी भला-बुरा कहा था.

अदालती दस्तावेज़ों के मुताबिक, उन्होंने कहा था कि ‘हिंदू पर हाथ उठा या कार्यकर्ता को डराने-धमकाने या हक छीनने के लिए शिकायत मिलती है तो वरुण गांधी हाथ काट देगा. कमल *** (मुसलमानों के लिए अपमानजनक शब्द) के गले काट देगा. मुस्लिम एक बीमारी है, चुनाव के बाद खत्म हो जाएगी.’

“…मैं उस हाथ को काट डालूंगा!”
उन्होंने कथित तौर पर कहा था, “अगर कोई हिंदुओं की तरफ उंगली उठाएगा या समझेगा कि हिंदू कमजोर हैं और उनका कोई नेता नहीं हैं, अगर कोई सोचता है कि ये नेता वोटों के लिए हमारे जूते चाटेंगे तो मैं गीता की कसम खाकर कहता हूं कि मैं उस हाथ को काट डालूंगा.”

उन्होंने कहा था, “गांधीजी कहा करते थे कि कोई एक गाल पर थप्पड़ मारे तो उसके सामने दूसरा गाल कर दो ताकी वो इस गाल पर भी थप्पड़ मार सके. यह क्या है. अगर आपको कोई एक थप्पड़ मारे तो आप उसका हाथ काट डालिए कि आगे से वह आपको थप्पड़ नहीं मार सके.”

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खूब मचा था हंगामा
वरुण गांधी के इस बयान पर उस समय खूब हंगामा हुआ था. विपक्ष तो विपक्ष वरुण का आक्रामक तेवर देखकर भाजपा आलाकमान भी सकते में आ गया था. किसी को इस पर सफाई दिए नहीं बन रही थी. भाजपा ने तत्परता दिखाते हुए वरुण के बयानों से खुद को अलग कर लिया था.

अदालतल से हुए बरी
वरुण गांधी को इस विवादित बयान के चलते जेल जाना पड़ा था. इसे लेकर तीन साल तक मुकदमा चला. हालांकि बाद में अदालत ने उन्हें बरी कर दिया.

वरुण अदालत से भले ही बरी हो गए हों. लेकिन उनकी छवि एक समुदाय विशेष में जो बनी वो उससे अभी तक पीछा नहीं छुड़ा पाए हैं. राजनीति के जानकार मानते हैं कि वरुण ने अपने राजनीतिक करियर के शुरुआत में ये बयान जानबूझकर दिए. भाजपा में रहते हुए वो अपनी एक कट्टर हिंदू नेता की छवि बनाना चाहते थे.

जानकारों का मानना है कि वरुण की योजना काम आई. उनकी एक खास छवि भी बनी. हालांकि बाद के सालों में वो अपनी उस छवि से दूर जाते दिखे. 2009 के बाद समुदाय विशेष को लेकर उनका ऐसा कोई बड़ा या आक्रामक बयान नहीं आया.