पराली जलाने से फैला धुआं-धुआं हुआ इलाका, स्मॉग के कारण हुए कई एक्सीडेंट, 4 लोगों की मौत

पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने के कारण बढ़ने वाले प्रदूषण से दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा दिन-प्रतिदिन बिगड़ रही है. पहले से ही प्रदूषण की मार झेल रहे एनसीआर में लोगों का सांस लेना भी दूभर हो गया है.
many accidents in the Barnala, पराली जलाने से फैला  धुआं-धुआं हुआ इलाका, स्मॉग के कारण हुए कई एक्सीडेंट, 4 लोगों की मौत

चंडीगढ़: बरनाला में धान की पराली जलाने के कारण फैले स्मॉग के कारण इलाके में हुए कई एक्सीडेंट हुए हैं. बताया जा रहा है कि इन अलग-अलग हादसों में लोगों की मृत्यु हो गई है जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल है.

पहला एक्सीडेंट देर रात सेखा रोड़ पर हुआ जहां एक इनोवा गाड़ी ट्रक के साथ टकरा गई जिसमें एक बच्चे सहित तीन लोगों की मौके पर ही मृत्यु हो गई है. जबकि एक अन्य एक्सीडेंट बरनाला की सब जेल के पास हुआ है जहां कई गाड़ियां आपस में आगे पीछे टकरा गई जिसमें करीब दो लोग जख्मी हुए हैं. एक अन्य एक्सीडेंट पत्ती रोड़ पर हुआ है जहां एक मोटरसाइकिल ट्रक से टकरा गया जिसमें मोटरसाइकिल सवार की भी मृत्यु हो गई है.

पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने के कारण बढ़ने वाले प्रदूषण से दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा दिन-प्रतिदिन बिगड़ रही है. पहले से ही प्रदूषण की मार झेल रहे एनसीआर में लोगों का सांस लेना भी दूभर हो गया है. मगर पड़ोसी राज्य पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे. पंजाब में पिछले साल की अपेक्षा इस बार पराली जलाने के मामलों में 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने किसानों से अपील की है कि वे पराली न जलाकर अन्य विकल्प अपनाएं.

आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, पंजाब में 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक फसल अवशेष (पराली) जलाने के 19,860 से अधिक मामले सामने आए हैं. अधिकारियों ने कहा कि पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान सामने आए मामलों की अपेक्षाकृत यह आंकड़ा 30 फीसदी अधिक है. पिछले साल पंजाब में धान की कटाई के मौसम में कुल 50,495 मामले देखे गए. यहां कटाई का सीजन 15 नवंबर तक रहता है.

पंजाब और हरियाणा के किसानों द्वारा आमतौर पर फसल अवशेषों को जलाने से सालाना 30 अरब डॉलर से अधिक का आर्थिक नुकसान होता है. इसके अलावा सांस लेने में तकलीफ व श्वसन संक्रमण का भी बड़ा जोखिम रहता है.

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