बाबरी मस्जिद विध्वंस से पहले तोड़े गए गए थे कई मंदिर, आखिर क्या थी वजह

जमीन के अधिग्रहण, समतलीकरण और उन मंदिरों की तोड़-फोड़ को लेकर पूरे देश में माहौल गरम होने लगा.

विश्व हिंदू परिषद(विहिप) और प्रधानमंत्री नरसिंह राव के शह और मात के खेल से कारसेवकों का आक्रोश इस हद तक चला गया. इस ध्वंस से पहले जुलाई की कारसेवा में विवादित इमारत के आस-पास के कोई आधा दर्जन मंदिर तोड़े गए थे. ये सभी पुराने और सिद्ध मंदिर थे. विश्व हिंदू परिषद ने इन सभी मंदिरों का मालिकाना हक हासिल कर इन्हें तुड़वा दिया, ताकि विवादित इमारत तक जाने का रास्ता बने.

विवादित इमारत के आस-पास की 2.77 एकड़ जमीन का अधिग्रहण बीजेपी सरकार ने 10 जनवरी, 1991 को किया. सरकार ने जमीन अधिग्रहीत करते ही उसे राम जन्मभूमि न्यास को सौंप दिया. इस जमीन में चौबुर्जी के महंत रामआसरे दास का संकटमोचन मंदिर, साक्षीगोपाल मंदिर, सावित्री भवन, लोमष ऋिष का आश्रम, सीताकूप के अलावा और कई छोटे-छोटे मंदिर थे.

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अधिग्रहण के बाद दिन-रात काम कर कोई सौ मजदूरों ने इन भवनों को ढहा दिया. यह कार्रवाई कुछ दिनों तक चली. इसमें एक मंदिर ऐसा भी था, जिसमें शेषनाग की पूजा होती थी. इस मंदिर को गिराना अशुभ समझा गया. इसलिए कारसेवकों ने पड़ोस में भाई लक्ष्मण का मंदिर बनाना शुरू कर दिया. लक्ष्मण को शेषनाग का अवतार समझा जाता है.

समतलीकरण के दौरान विवादित परिसर के बाहर पहले से लगी लोहे की बैरिकेडिंग हटा ली गई. वैसे तो सभी मंदिरों के महंतों ने यह कहकर न्यास के नाम रजिस्ट्री की थी कि वे भव्य राममंदिर निर्माण के लिए अपना मंदिर दान दे रहे हैं, पर अयोध्या के वैरागियों को सब जानते हैं. वहाँ पैसे से किसी को वैराग्य नहीं था. ज्यादातर मंदिर राम जन्मभूमि न्यास ने खरीदे थे.

जमीन के अधिग्रहण, समतलीकरण और उन मंदिरों की तोड़-फोड़ को लेकर पूरे देश में माहौल गरम होने लगा. अयोध्या में मंदिर तोड़े जाने पर लोकसभा में गृहमंत्री को बयान देना पड़ा.

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राम जन्मभूमि के ठीक सामने संकटमोचन मंदिर था. वहाँ से हनुमानजी की प्रतिमा को कहीं और ले जाया गया. यह काम आधी रात को हुआ. संकटमोचन मंदिर के महंत रामआसरे दास की अगुवाई में यह काम हुआ.

उन्होंने अर्जी देकर कलेक्टर से राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए हनुमान की प्रतिमा हटाने की पहले ही इजाजत ले ली थी. इस दौरान देश भर में ऐसी गलतफहमी पैदा की गई कि अयोध्या में मंदिर तोड़े जा रहे हैं, लेकिन जल्द ही स्थिति साफ हो गई कि मंदिरों को तोड़े जाने का मकसद जमीन का समतलीकरण करना है. ये सब राममंदिर निर्माण से जुड़े सभी पक्षों की सहमति से हो रहा है.

जिलाधिकारी का कहना था कि भूमि समतलीकरण के लिए मंदिर तोड़े गए. मंदिर जिनके पास था, उन्होंने स्वयं तोड़ा. भूमि समतलीकरण और मंदिर को हटाने में कोई नियम और कोर्ट के आदेश बाधक नहीं हैं. जिस संकट मोचन मंदिर के तोड़े जाने को लेकर सबसे ज्यादा बवाल हुआ, उसके पीछे का सच यह है कि चौबुर्जी के आश्रम के महंत रामआसरे दास खुद मंदिर से हनुमानजी की मूर्ति निकालकर ले गए.

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