आतंकी मसूद अजहर को इंडियन आर्मी जवान ने मारा थप्पड़ तो बोला…

Share this on WhatsAppजम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में हुए आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 42 जवान शहीद हो गए. इस कायराना हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर ने ली है. आज से 25 साल पहले आतंकी मसूद अजहर जम्मू की कोट भलवाल जेल में बंद था. मसूद साल 1994 […]

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में हुए आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 42 जवान शहीद हो गए. इस कायराना हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर ने ली है. आज से 25 साल पहले आतंकी मसूद अजहर जम्मू की कोट भलवाल जेल में बंद था. मसूद साल 1994 से 1999 तक हिरासत में रहा. इस दौरान इंटेलिजेंस व्यूरो के अधिकारी रहे अविनाश मोहनानी ने मसूद अजहर से लगातार पूछताछ की थी. इस पूछताछ में मसूद ने कई सारी बातों का खुलासा किया था. अविनाश मोहनानी ने उस समय को याद करते हुए एक अंग्रेजी समाचारपत्र में लेख लिखा है.

अविनाश मोहनानी लिखते हैं कि मसूद अजहर अपने बारे में बहुत ढींगे हांका करता था. अजहर ने दावा किया कि जब वह Heathrow Airport पर उतरा था तो वहां दो घंटे के लिए भारी जाम लग गया था. भारी तादात में लोग उसे देखने और रिसीव करने के लिए आए हुए थे. मोहनानी के मुताबिक, मसूद यह बार-बार कहता रहता था कि तुम लोग मुझे बहुत दिनों तक हिरासत में नहीं रख पाओगे. उसने कहा, “तुम्हें यह नहीं पता है कि पाकिस्तान और ISI के लिए मैं कितना अहम हूं. तुम मेरी लोकप्रियता का अंदाजा लगाओ. ISI मुझे यहां से छुड़ाकर जल्द ही पाकिस्तान वापस लेकर जाएगी.”

ऐसे पकड़ा गया था आतंकी मसूद अजहर
मसूद अजहर को 11 फरवरी, 1994 में जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले से गिरफ्तार किया गया था. मसूद उस समय सज्जाद अफगानी के साथ एक ऑटो से यात्रा कर रहा था. जम्मू-कश्मीर पुलिस ने रूटीन चेकअप के दौरान उनके ऑटो को रोकने का प्रयास किया तो वे भागने लगे. लेकिन सुरक्षाबलों ने उन दोनों को पीछा करके पकड़ लिया. मोहनानी ने मसूद अजहर को उमर सईद शेख की तस्वीर दिखाई थी. वह उमर से उसके रिश्ते के बारे में जानना चाहते थे. लेकिन मसूद ने उमर सईद शेख को पहचानने से इनकार कर दिया था.

पुछताछ के दौरान गाना गाने लगता था मसूद
अविनाश मोहनानी बताते हैं कि मसूद अजहर पूछताछ के दौरान प्रेशर हैंडल नहीं कर पाता था और बीच-बीच में गाना गाने लगता था. मजूद ने पूछताछ में सज्जाद अफगानी की पहचान भी उजागर कर दी थी. इससे सज्जाद मसूद से काफी खफा हुआ और वे दोनों जेल में भी एक-दूसरे से उखड़े रहते थे. मसूद अजहर उस समय नए आतंकी संगठन हरकत-उल-अंसार का जनरल सेक्रिटेरी था. भारतीय आर्मी को इस बात का अंदाजा तभी लग गया था कि मसूद अजहर और सज्जाद अफगानी की गिरफ्तारी एक बड़ी कामयाबी है.

“मेरे पिता ने कभी मुझे थप्पड़ नहीं मारा”
मसूद अजहर ने पुछताछ के दौरान अविनाश मोहनानी को एक चौंकाने वाली बात बताई थी. मसूद ने कहा, “मेरे पिता ने कभी मुझे थप्पड़ नहीं मारा. लेकिन एक आर्मी जवान से मुझसे कोई सवाल किए बिना ही मुझे थप्पड़ जड़ दिया. ऐसा मेरे जीवन में पहली बार हुआ.” मसूद अजहर ने कहा, “मुझे हथियारों के ट्रेनिंग के लिए शारीरिक रूप से असमर्थ पाया गया था. इसलिए मुझे अफगानिस्तान के कुनार इलाके में स्थित हरकत-उल-अंसार के ट्रेनिंग कैंप से वापस करांची भेज दिया गया.”

कश्मीर को अफगानिस्तान समझता था मसूद
मसूद अजहर ने बताया था कि वह फर्जी पुर्तगाली पासपोर्ट के जरिए जम्म-कश्मीर में घुसा था. कश्मीर आकर वह HuM और हरकत-उल-जिहाद-ए- इस्लामी(HuJI) का विलय करना चाहता था जो कि पाकिस्तान में रहकर नहीं हो सकता था. मसूद अजहर अपने संगठन को लेकर काफी भड़का हुआ था. क्योंकि संगठन के मुजाहिदों ने मसूद को कश्मीर के बारे में कई गलत जानकारियां दी थी. मसूद से कहा गया था कि कश्मीर भारत से आजाद होने के करीब है और भारतीय सेना वहां से पीछे हट रही है. मसूद ने कहा, “उसे लगा था कि कश्मीर के हालात अफगानिस्तान की तरह हैं. जहां पर पाकिस्तान से आसानी से पहुंचा जा सकता है.”

मसूद अजहर को छुड़ाने की हुई तीन कोशिशें
पाकिस्तान की ओर से आतंकी मसूद अजहर को जेल से छुड़ाने की कुल तीन कोशिशें हुई थीं. इनमें से दो कोशिशें असफल रहीं जबकि तीसरी बार में उसे छुड़ाया जा सका. 31 दिसंबर, 1999 को इंडियन एयरलाइंस के विमान IC-814 को आतंकियों ने किडनैप कर लिया. सात दिनों तक चली बातचीत और तमाम कोशिशों के बाद भारत को विमान को मुक्त कराने में सफलता मिली. लेकिन इसके बदले में तीन कुख्यात आतंकियों को रिहा करना पड़ा जिनमें से एक मसूद अजहर भी था.