मायावती का अकेले चुनाव लड़ने का फाइनल फैसला, अखिलेश से राहें जुदा होने की इनसाइड स्टोरी

आखिरकार मायावती ने अखिलेश से अपनी राहें जुदा कर ली हैं. जानिए मायावती-अखिलेश के अलग होने की इनसाइड स्टोरी.

लोकसभा चुनाव में हार के बाद मायावती और अखिलेश यादव के रास्ते अलग हो गए हैं. यूपी में गठबंधन की करारी हार के बाद से इस टूट की औपचारिक घोषणा का इंतज़ार था. हालांकि अखिलेश सपा-बसपा की जोड़ी पर चुप ही रहे हैं लेकिन मायावती मौका मिलते ही समाजवादी पार्टी पर जमकर बरसी हैं. हाल ही में उन्होंने उत्तरप्रदेश का उपचुनाव अलग होकर लड़ने की बात कही थी लेकिन इसे स्थायी टूट नहीं माना जा रहा था.akhilesh yadav

अब ये स्पष्ट हो चला है कि उत्तरप्रदेश में होने वाले उपचुनाव में मायावती और अखिलेश अलग-अलग प्रत्याशी उतारेंगे और एक बार फिर पुरानी अदावत को ताज़ा करेंगे.

आइए जानते हैं कि आखिर क्यों माया और अखिलेश के रास्ते अलग हो गए-

  1. बहनजी ने चुनाव में करारी हार के बाद अखिलेश यादव पर बदले व्यवहार का आरोप लगाया है. उन्होंने लखनऊ में संपन्न हुई पार्टी की बैठक में खुलकर कहा कि गठबंधन के चुनाव हारने के बाद अखिलेश ने फोन तक करने की ज़रूरत नहीं समझी. उधर बसपा के वरिष्ठ नेता सतीशचंद्र मिश्र ने भी अखिलेश को फोन करने के लिए कहा था लेकिन मायावती को फोन नहीं आया. मायावती ने ये भी खुलासा किया कि बड़े होने का फर्ज़ निभाते हुए उन्होंने 23 तारीख को अखिलेश को फोन कर यादव परिवार की हार पर अफसोस जताया था.
  2. मायावती ने बताया कि तीन जून को दिल्ली की बैठक में गठबंधन तोड़ने की बात कहे जाने के बाद अखिलेश यादव का एक फोन सतीशचंद्र मिश्र को गया था. मिश्र ने अखिलेश से तब मायावती को फोन करने के लिए कहा लेकिन तब भी फोन नहीं किया गया.
  3. मायावती ने खुद ही कहा है कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में उन्हें कई मामलों में फंसाने की कोशिश हुई. ताज कॉरिडोर मामले में उन्हें घसीटने के पीछे मुलायम सिंह यादव का भी अहम रोल था. शायद अब मायावती को सारी पुरानी कड़वाहट फिर याद आ गई है.akhilesh yadav, mulayam singh yadav
  4. समाजवादी पार्टी ने अपने शासनकाल में दलित विरोधी फैसले लिए थे. गैर-यादवों के साथ सपा सरकार ने जो नाइंसाफी की उसके चलते लोगों ने गठबंधन के पक्ष में मतदान नहीं किया. मायावती आगामी चुनाव में नहीं चाहेंगी कि एक बड़ा तबका जो सपा शासन में खुद को पीड़ित मानता रहा वो उन्हें और अखिलेश को एक ही मंच पर देखे.
  5. मायावती ने प्रमोशन में आरक्षण के सपा विरोध को भी मुद्दा बनाया है. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी से दलितों की नाराज़गी की बड़ी वजह ये भी था.
  6. मायावती ने चुनाव में सपा का वोट ट्रांसफर ना होने की बात भी बोली. बहनजी ने कहा कि यादव वोट बैंक ट्रांसफर ना करा के कई जगहों पर उसे बीजेपी को दिला दिया गया. मायावती ने कुछ सपा नेताओं की शिकायत अखिलेश से की भी मगर पार्टी नेतृत्व मौन रहा.
  7. मायावती अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव का नाम भी खुलकर पहले ले चुकी हैं. वो कह चुकी हैं कि शिवपाल की पार्टी ने कई सीटों पर नुकसान पहुंचाया है और बीजेपी को जिताया है.
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