दिल्ली: जंतर-मंतर पर कल हिंदू राव अस्पताल के डॉक्टर-कर्मचारियों का प्रदर्शन, सैलरी नहीं मिलने से आक्रोश

उत्तरी दिल्ली नगर निगम के मेयर जयप्रकाश (Mayor Jai Prakash) का कहना है कि, कल ही हिंदू राव- कस्तूरबा गांधी समेत करीब 6 अस्पतालों के स्टाफ की 1 महीने की सैलरी (Salary) दे दी गई है. और बकाया सैलरी भी जल्द दे दी जाएगी.

हिंदू राव अस्पताल के डॉक्टर और कर्मचारियों ने 16 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन करेंगे.

हिंदू राव अस्पताल (Hindu Rao Hospital) के डॉक्टर और कर्मचारियों ने 16 अक्टूबर को जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर विरोध-प्रदर्शन (Protest) करने का फैसला लिया है. अस्पताल (Hospital) के डॉक्टर और दूसरे कर्मचारी चार महीने से सैलरी न मिलने की वजह से पिछले कई हफ्तों से हड़ताल (Strike) पर हैं. अब तक मेडिकल स्टाफ अस्पताल परिसर में ही विरोध-प्रदर्शन कर रहा था, लेकिन अब उन्होंने सड़क पर उतरने का फैसला लिया है.

वहीं सैलरी न मिलने से परेशान कस्तूरबा गांधी अस्पताल (Kasturba Gandhi Hospital) के मेडिकल स्टाफ और कर्मचारी भी हड़ताल पर चले गए हैं. वहीं उत्तरी दिल्ली नगर निगम के मेयर (Mayor) जयप्रकाश का कहना है कि उन्होंने कल ही हिंदू राव, कस्तूरबा गांधी समेत करीब 6 अस्पतालों के स्टाफ की 1 महीने की सैलरी दे दी (Release One Month Salary) है और बकाया सैलरी भी जल्द से जल्द दे दी जाएगी.

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एमसीडी से जल्द बकाया सैलरी देने की मांग

हिंदू राव और कस्तूरबा गांधी अस्पताल के मेडिकल स्टाफ और कर्मचारियों की एमसीडी से मांग है कि जल्द से जल्द उनकी बकाया सैलरी का भुगतान किया जाए. हिंदू राव अस्पताल और कस्तूरबा गांधी अस्पताल उत्तरी दिल्ली नगर निगम के अधीन हैं, ऐसे में दोनों अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टर्स और मेडिकल स्टाफ को सैलरी देने की जिम्मेदारी भी उत्तरी दिल्ली नगर निगम की है, लेकिन नगर निगम ने फंड की कमी होने का हवाला देकर स्टाफ की सैलरी अटका रखी है.

वहीं उत्तरी दिल्ली नगर निगम के मेयर जयप्रकाश का कहना है कि, उन्हें सिर्फ डॉक्टर्स की ही नहीं पूरे 77000 कर्मचारियों की चिंता है, उन्होंने कल ही हिंदू राव, कस्तूरबा गांधी समेत करीब 6 अस्पतालों के स्टाफ की 1 महीने की सैलरी दे दी है और बकाया सैलरी भी जल्द से जल्द दे दी जाएगी.

‘दिल्ली सरकार ने नहीं दिया ग्रांट का पैसा’

उन्होंने कहा कि नगर निगम की कमाई के दो साधन हैं, पहला राजस्व, संपत्ति कर, विज्ञापन, कार पार्किंग, लाइसेंस, नक्शे पास करने की फीस, चालान और जुर्माने इकट्ठा होने वाला पैसा और दूसरा साधन वो पैसा है, जो ग्रांट के तौर पर दिल्ली सरकार से मिलता है. उनका कहना है कि पिछले चार-पांच महीने से दिल्ली सरकार ने एक रुपया नहीं दिया है.

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उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की सिर्फ तीन महीने की सैलरी बकाया है. जून तक की सैलरी उनको दी जा चुकी है, जुलाई अगस्त और सितंबर की सैलरी ही बाकी बची है.

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