नजरबंदी के दौरान झगड़ पड़े महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला, रखे गए अलग-अलग

उमर अब्दुल्ला बहस के दौरान महबूबा मुफ्ती पर चिल्ला पड़े. उमर ने महबूबा और उनके दिवंगत पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद पर बीजेपी से 2015 और 2018 में गठबंधन करने के लिए ताना मारा.

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से कई इलाकों में धारा 144 लगाई गई है. साथ ही राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती तथा नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला को नजरबंद करके रखा गया है. दोनों ही नेता पिछले एक हफ्ते से हरि निवास में कैद हैं.

महबूबा और उमर के बीच हिरासत के दौरान विवाद होने की खबर है. अधिकारियों का कहना है कि दोनों के बीच विवाद इतना अधिक बढ़ गया कि उन्हें अलग करना पड़ा. दरअसल, दोनों एक-दूसरे पर राज्य में भारतीय जनता पार्टी को लाने का आरोप लगा रहे थे.

महबूबा पर चिल्ला पड़े उमर
बताया जा है कि उमर बहस के दौरान महबूबा पर चिल्ला पड़े. उमर ने महबूबा और उनके दिवंगत पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद पर बीजेपी से 2015 और 2018 में गठबंधन करने के लिए ताना मारा.

वहीं, महबूबा ने भी उमर का खूब जवाब दिया. महबूबा ने उमर से कहा कि क्या वो भूल गए कि फारूक अब्दुल्ला का गठबंधन अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में बीजेपी से था.

एक अधिकारी ने बताया कि महबूबा ने काफी जोर से उमर से कहा कि आप को वाजपेयी सरकार में विदेश मामलों के जूनियर मिनिस्टर थे. महबूबा ने उमर के दादा शेख अब्दुल्ला को भी 1947 में जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय के लिए जिम्मेदार ठहराया.

महबूबा-उमर को रखा गया अलग-अलग
दोनों में कहा-सुनी होने के बाद उमर को महादेव पहाड़ी के पास चेश्माशाही में वन विभाग के भवन में रखा गया जबकि महबूबा हरि निवास महल में ही हैं. जब ये दोनों आपस में झगड़े थे उस वक्त उमर हरि निवास की ग्राउंड फ्लोर पर थे और महबूबा पहली मंजिल पर.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, महबूबा मुफ्ती कैद में रहने के दौरान भूख हड़ताल पर हैं लेकिन फल खा रही हैं. उनके लिए रोज कश्मीरी सेब और नाशपती पहुंचाए जा रहे हैं. कुछ दिनों पहले महबूबा ने ब्राउन बेड खाने की इच्छा जाहिर की थी लेकिन उन्हें वह दी नहीं जा सकी क्योंकि मेन्यू में हिरासत में लिए गए वीवीआईपी लोगों के लिए ऐसा कुछ नहीं है.

बता दें कि हरि निवास वही जगह है जिसे पहले मुख्यमंत्री आवास के तौर पर बनाया गया था और गुलाम नबी आजाद मुख्यमंत्री के तौर पर यहां रहे भी थे लेकिन बाद में यहां कोई नहीं रहा जिस वजह से इसे गेस्ट हाउस में बदल दिया गया.

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