महबूबा मुफ्ती ने गौतम गंभीर को किया ब्लॉक, ‘हिंदुस्तानियों के मिटने’ पर हुई थी बहस

महबूबा मुफ्ती ने एक ट्वीट में लिखा था, "...ना समझोगे तो मिट जाओगे ये हिंदुस्तान वालों. तुम्हारी दास्तां तक भी ना होगी दास्तानों में." इस ट्वीट के बाद ही गंभीर के साथ पूरा विवाद खड़ा हुआ.

नई दिल्ली: हाल ही में भाजपा में शामिल हुए पूर्व सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर और जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के बीच मंगलवार को ट्विटर पर तीखी बहस हो गई. इस बहस के बाद महबूबा मुफ्ती ने गंभीर को ट्विटर पर ब्लॉक कर दिया.

ये पूरा विवाद महबूबा मुफ्ती के ट्वीट के बाद शुरू हुआ. महबूबा ने ट्वीट किया था, “कोर्ट में समय क्यों बर्बाद करना… धारा 370 को हटाने के लिए बीजेपी का इंतजार करें. ये खुद ही हमें चुनाव लड़ने से रोक देगा क्योंकि भारतीय संविधान अब जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होगा. ना समझोगे तो मिट जाओगे ये हिंदुस्तान वालों. तुम्हारी दास्तां तक भी ना होगी दास्तानों में.”

दरअसल महबूबा मुफ्ती और फारूक अब्दुल्ला के लोकसभा चुनाव लड़ने पर रोक लगाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है. महबूबा ने इसी याचिका पर प्रतिक्रिया देते हुए ये ट्वीट किया था.

महबूबा के इस ट्वीट से गंभीर काफी ख़फ़ा मालूम हुए. उन्होंने लिखा, “यह भारत है, आपकी तरह कोई दाग नहीं, जो गायब हो जाएगा.”


महबूबा ने इसके जवाब में लिखा, “उम्मीद करती हूं कि भाजपा में आपकी राजनीतिक पारी आपके क्रिकेट करियर की तरह बहुत छोटी न रहे.”


गंभीर ने इसका जवाब दिया, “ओह, आपने मेरे ट्विटर हैंडल को अनब्लॉक कर दिया. मेरे ट्वीट का जवाब देने में आपको 10 घंटे लगे. बहुत धीमा. यह आपके व्यक्तित्व में गहराई की कमी को दिखाता है. इसमें कोई हैरानी नहीं कि आप लोग इन मुद्दों को हल करने के लिए संघर्ष किया है.”


इसके जवाब में महबूबा ने गंभीर पर तीखा हमला किया. उन्होंने लिखा, “मुझे आपके मानसिक स्वास्थ्य की चिंता है. आपको ब्लॉक कर रही हूं ताकि आप दो रुपये प्रति ट्वीट के हिसाब से कहीं और जाकर ट्रोलिंग कर सकें.”


गंभीर ने इस पर कहा, “धन्यवाद मैडम, एक व्यक्ति विशेष द्वारा ब्लॉक करने के बेहद खुशी हुई. वैसे इस ट्वीट को करते समय 1,365,386, 456 भारतीय मौजूद हैं, उन्हें कैसे ब्लॉक करेंगी.”


गौरतलब है कि गंभीर को इससे पहले भी कुछ मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखते हुए देखा जा चुका है. हाल ही में उनकी कश्मीर की स्वायत्तता के मद्दे को लेकर उमर अब्दुल्ला से भी बहस हुई थी.