असम में लोगों की 1951 कट-ऑफ के आधार पर हो पहचान, सामने आई MHA की रिपोर्ट

MHA की 14 सदस्यों की इस हाई लेवल कमेटी (High Level Committee) ने अपनी रिपोर्ट फरवरी में सरकार को सौंपी थी, हालांकि इसे मंगलवार को प्रेस को जारी किया गया.

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  • Publish Date - 9:29 am, Wed, 12 August 20

असम (Assam) में नागरिकता को लेकर असम अकॉर्ड के क्लॉज 6 (Clause 6 of the Assam Accord) को लागू करवाने के लिए गृह मंत्रालय (MHA) की हाई लेवल कमेटी ने अपनी सिफारिश में कहा है कि राज्य में असमिया लोगों (Assamese people) की पहचान 1951 के कट ऑफ के आधार पर होनी चाहिए.

14 सदस्यों की इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट फरवरी में सरकार को सौंपी थी, हालांकि इसे मंगलवार को प्रेस को जारी किया गया. जिन लोगों ने MHA की ये रिपोर्ट रिलीज की है उनमें से तीन सदस्य समुज्जल भट्टाचार्य, दीपांकर नाथ और लुरिनज्योति गोगोई असम के छात्र संघ (AASU) के सदस्य हैं, जबकि चौथे सदस्य निलय दत्ता एक प्रसिद्ध वकील हैं और अरुणाचल प्रदेश के एडवोकेट जनरल हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक असमिया लोगों को परिभाषित करना क्लॉज का उद्देश्य है, इसमें स्वदेशी आदिवासियों के साथ-साथ असम के अन्य स्वदेशी समुदायों और 1.1.1951 से या उससे पहले असम में रहने वाले स्वदेशी असमिया और उसके वंशजों को शामिल किया जाना चाहिए.

रिपोर्ट जारी करना दुर्भाग्यपूर्ण-सर्बानंद सोनोवाल

हालांकि मंगलवार शाम को जारी एक बयान में मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल (CM Sarbananda Sonowal) ने रिपोर्ट जारी करने को बहुत दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया. उन्होंने कहा कि सरकार समझौते के प्रत्येक पहलू को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने ये भी कहा कि किसी भी सरकार ने इससे पहले क्लॉज 6 को लागू करने के लिए कोई समिति नहीं बनाई थी.

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार भी इस संबंध में कदम उठा रही है, इसलिए निश्चित समय दिए बिना समिति की रिपोर्ट का खुलासा करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने ये भी कहा कि राज्य सरकार क्लॉज 6 के कार्यान्वयन के जरिए स्वदेशी लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने के लिए समर्पित है. किसी भी स्थिति में लोगों के अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

क्या है क्लॉज 6 को लागू करने का असल मकसद

रिपोर्ट के मुताबिक 1985 असम समझौते ने असम में अवैध विदेशियों का पता लगाने के लिए 24 मार्च 1971 की कट-ऑफ डेट निर्धारित की थी. असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) की तैयारी उसी कट-ऑफ का इस्तेमाल करती है, लेकिन अकॉर्ड में ये परिभाषित नहीं किया गया था कि कौन नागरिकता के लिए पात्र हैं.

समझौते के क्लॉज 6 में कहा गया है, “संवैधानिक, विधायी और प्रशासनिक सुरक्षा उपाय, जैसा भी उचित हो किए जा सकते हैं. असमिया लोगों की सांस्कृतिक, सामाजिक, भाषाई पहचान और विरासत की रक्षा, संरक्षण और संवर्धन के लिए इसे लागू किया जाना चाहिए. न्यायमूर्ति (रिटायर्ड) बिप्लब कुमार सरमा की अध्यक्षता में असमिया लोगों को परिभाषित करने के लिए इस समिति का गठन किया गया.

पिछले साल सोनोवाल सरकार ने कहा था ये

पिछले साल दिसंबर से असम भर में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के रूप में, सर्बानंद सोनोवाल की अगुवाई वाली राज्य सरकार ने धारा 6 को आंदोलन के प्रतिशोध के रूप में लागू करने वाला कहा था. साथ ही उन्होंने “स्वदेशी” लोगों के हितों की रक्षा करने का वादा भी किया था.

क्लॉज 6 में असमिया लोगों के आरक्षण की सिफारिश

रिपोर्ट में असमिया लोगों के लिए आरक्षण की सिफारिश भी की गई है. जिसमें संसद में असम की 80 से 100 फीसदी सीटें, विधानसभा और स्थानीय निकायों में समान अनुपात में हों. इसने असम में सभी सरकारी और निजी क्षेत्र की नौकरियों में ग्रुप सी और डी स्तर के पदों के लिए 80 से 100% आरक्षण की सिफारिश की.

सिफारिशों में राज्य में इनर लाइन परमिट शासन के कार्यान्वयन को भी शामिल किया गया है. ILP वह प्रणाली है जिसमें भारत के अन्य क्षेत्रों के लोगों को राज्य का दौरा करने के लिए एक विशेष परमिट की आवश्यकता होती है. इसने “एक उच्च सदन (असम की विधान परिषद)” बनाने की भी सिफारिश की, जिसकी सीटें असमिया लोगों के लिए आरक्षित ’होंगी.

भूमि अधिकारों पर भी रिपोर्ट में दिया गया ज़ोर

रिपोर्ट में भूमि के अधिकारों पर भी जोर दिया गया और कहा गया कि “असम के लोगों के लिए भूमि के अधिकार को” असमिया लोगों के अलावा अन्य व्यक्तियों के लिए किसी भी तरह से स्थानांतरित करने पर रोक हो.

लुरंज्योति गोगोई, महासचिव, एएएसयू ने कहा है कि रिपोर्ट हमने प्रस्तुत की है. लोगों को यह जानने का अधिकार है कि हमने क्या प्रस्तुत किया है. इसके अलावा, एक लोकतांत्रिक समाज में लोगों को इसे पढ़ने का अधिकार होना चाहिए और इंगित करना चाहिए कि क्या कोई सुधार या चूक हुई है.

गोगोई ने कहा, “यह एक सार्वजनिक दस्तावेज है और हमने इसे पांच महीने बाद जारी किया है. राज्य सरकार चुप क्यों है – हम उनसे पूछना चाहते हैं. अब तक हमारी सिफारिश को लागू करने की दिशा में एक कदम भी नहीं उठाया गया है, हालांकि उन्होंने इसे लागू करने का वादा किया था.