शहरों में प्रवासियों को मिलेगा किराए का घर, इन दो मॉडल पर काम कर रही सरकार

आवास और शहरी विकास मंत्रालय इस योजना (Pradhan Mantri Awas Yojana) को धरातल पर उतारने के लिए कुल दो मॉडल पर काम करने में जुटा है.

  • IANS
  • Publish Date - 11:53 pm, Fri, 18 September 20

गांवों से रोजी-रोजगार के सिलसिले में पहुंचने वाले प्रवासियों को मामूली किराए पर घर देने की योजना पर अब काम तेज हुआ है. ताकि कम पैसे में लोग शहरों में गुजारा कर सकें. आवास और शहरी विकास मंत्रालय इस योजना (Pradhan Mantri Awas Yojana) को धरातल पर उतारने के लिए कुल दो मॉडल पर काम करने में जुटा है. बीते 31 जुलाई से शुरू हुई इस योजना (PM Awas Yojana) को सरकार जल्द से जल्द धरातल पर उतारने की कोशिशों में जुटी हुई है.

ये है पहला मॉडल, एआरएचसी के तहत मिलेगा सस्ता किराए का घर

मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, पहला मॉडल है कि शहरों में सरकारी पैसे से बने आवासों को अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग कॉम्प्लेक्स में बदल दिया जाए. जिसके बाद जरूरतमंद प्रवासियों को एक हजार से तीन हजार रुपये में किराए पर उपलब्ध कराए जाएं. सरकार इस योजना को पीपीपी मोड में संचालित करना चाह रही है. बताया जा रहा है कि ये आवास 25 वर्षों के लिए अलॉट होंगे. फिर इन्हें लोकल बॉडीज के हवाले कर दिया जाएगा और फिर नए सिरे से आवंटन होगा.

दूसरा मॉडल, सार्वजनिक संस्थानों की खाली पड़ी जमीन पर बनेंगे घर

शहरी विकास मंत्रालय ने दूसरा मॉडल भी तय किया है. इस मॉडल के तहत निजी और सार्वजनिक संस्थानों को उनकी खाली पड़ी जमीन पर किराए के घर बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा. मसलन, अगर शहरी क्षेत्र में कोई फैक्ट्री है और उसके पास खाली जमीन है तो प्रवासियों के लिए वहां कॉम्प्लेक्स बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा. इसमें सरकार भी मदद देगी. खास बात है कि निजी क्षेत्र के ऐसे कॉम्प्लेक्स बनाने पर उन्हें स्पेशल इंसेंटिव्स दिए जाएंगे.

छह सौ करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी

खास बात है कि बीते गुरुवार को छह सांसदों ने लोकसभा में इस मसले पर लिखित में सवाल पूछा था, जिस पर आवास और शहरी कार्य राज्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि शहरी प्रवासियों और गरीबों को किफायती किराए पर आवास उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के तहत अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग कॉम्प्लेक्स (एआरएचसी) 31 जुलाई को शुरू हुई. बता दें कि कोरोना काल में 20 लाख करोड़ के पैकेज के तहत यह योजना भी आती है. शुरूआत में इस पर छह सौ करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी है.