Lockdown: लंबा सफर और जेब में 10 रुपये, नोएडा से सारण लौट रहे माइग्रेंट मजदूर की आपबीती

एक ट्रक ड्राइवर (Truck Driver) अपने ट्रक के नीचे दाल-बाटी पकाता है. वह अपने साथ-साथ अपने संग काम करने वालों और ट्रक पर आगरा से लखनऊ की यात्रा करने वाले 30 प्रवासी मजदूरों (Migrant Workers) को भी खाना खिलाता है.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 1:38 pm, Tue, 12 May 20

उत्तर प्रदेश (UP) के ग्रेटर नोएडा में 20 वर्षीय श्रमिक ओम प्रकाश बिहार के सारण में अपने घर पहुंचने के लिए 1,000 किलोमीटर लंबी यात्रा कर रहा है. आगरा तक जाने के लिए उसे 200 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा, जहां से उसे 350 किलोमीटर दूर लखनऊ तक जाने के लिए एक ट्रक ड्राइवर मिला. ट्रक के किराए का भुगतान करने के बाद, उस प्रवासी मजदूर (Migrant Worker) के पास केवल 10 रुपये ही बचे.

ओम प्रकाश ने कहा, “मेरी जेब में केवल 10 रुपये हैं.” उसने कहा कि आगरा से लखनऊ के बीच ट्रक से यात्रा करने पर 400 रुपये का किराया लगा. उसने कहा कि उसे नहीं पता कि अब वह आगे क्या करेगा. इस तरह इस कठिन यात्रा में उसके लिए काफी समस्याएं खड़ी हो रही हैं.

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सैकड़ों किलोमीटर पैदल चल रहे हैं प्रवासी मजदूर

ओम प्रकाश जैसे हजारों प्रवासी मजदूर लखनऊ के पास एक टोल प्लाजा पर घूम रहे हैं. अपने घरों को वापस जाने के लिए सैकड़ों किलोमीटर पैदल चल रहे हैं. कुछ मजदूर ट्रक ड्राइवरों को भारी किराया चुकाते हुए पहुंचे. अधिकतर मजदूर अभी घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर हैं और उनके पास पैसे भी नहीं बचे हैं.

एक ट्रक ड्राइवर इस तरह कर रहा लोगों की मदद

वहीं, कुछ ट्रक ड्राइवर (Truck Driver) इस कठिन समय में अपनी तरफ से जितना हो सके, समाज की सहायता करने की कोशिश कर रहे हैं. महेंद्र कुमार नाम का एक ट्रक ड्राइवर अपने ट्रक के नीचे दाल-बाटी पकाता है. वह अपने साथ-साथ अपने संग काम करने वालों और ट्रक पर आगरा से लखनऊ की यात्रा करने वाले 30 प्रवासी मजदूरों को भी खाना खिलाता है.

एक यात्री ने बताया कि इसके लिए उसने कभी कोई पैसा नहीं मांगा. जब उस ट्रक ड्राइवर से पूछा गया कि दूसरे ट्रक ड्राइवर तो यात्रियों से इतना किराया ले रहे हैं तो उसने अपने यात्रियों से कभी कोई पैसा क्यों नहीं मांगा. तो उसने जवाब दिया कि “ऐसा करना मेरे मन को मंजूर नहीं है.”

देश के अलग-अलग हिस्से में फंसे हैं हजारों मजदूर

कोरोनोवायरस लॉकडाउन (Coronavirus, Lockdown) की वजह से लाखों प्रवासी मजदूर बिना नौकरी और पैसे के देश के अलग-अलग हिस्सों में फंसे हुए हैं. केंद्र सरकार ने प्रवासी मजदूरों के फेरी लगाने के लिए विशेष ट्रेनों की व्यवस्था की है. कुछ राज्यों ने फ्री बेसिस पर बसों की व्यवस्था की है. अन्य किराए पर काम कर रहे हैं.

वहीं, सारी उम्मीदें खोकर कई हजारों मजदूरों ने घर वापस जाने के लिए पैदल चलने या साइकिल चलाने का फैसला किया है. पिछले हफ्ते शुक्रवार को, महाराष्ट्र (Maharashtra) के औरंगाबाद जिले में एक मालगाड़ी की चपेट में आने से 16 प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई थी.

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