चंद्रयान-2: 12 घंटे के अंदर भारत बनेगा अंतरिक्ष का ‘बादशाह’, जानिए मिशन ‘बाहुबली’ की A to Z जानकारी

भारत का चंद्रयान-2 सीधे चंद्रमा के साउथ पोल पर उतरेगा. इतिहास में आज से पहले किसी भी देश ने चंद्रमा के साउथ पोल पर लैंडर नहीं उतरा है. हमेशा अंधेरे में रहने वाले दक्षिणी ध्रुव पर पानी होने की संभावना सबसे ज्यादा है.

श्रीहरिकोटा: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष के. सिवन ने रविवार को बताया कि आज शाम 6.43 बजे से चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग की उल्टी गिनती शुरू हो जाएगी. इस दौरान रॉकेट और अंतरिक्ष यान प्रणाली की जांच की जाएगी और रॉकेट के इंजन को शक्ति प्रदान करने के लिए ईंधन भरा जाएगा.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने चंद्रयान-2 की तैयारियां पूरी कर ली हैं. इससे पहले 15 जुलाई की रात इस मिशन को लॉन्च किए जाने वक्त मुकर्रर किया गया था लेकिन तकनीकि खराबी के कारण ऐन वक्त पर लॉन्चिंग टाल दी गई थी.

चंद्रयान-2 चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव के पास लैंड करेगा
सोमवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से 22 जुलाई की दोपहर 2 बजकर 43 मिनट बजे मिशन मार्स-2 लॉन्च होगा. ये भारत का सबसे महत्वकांक्षी मिशन है. चंद्रयान-2 को भारत में निर्मित जीएसएलवी मार्क III रॉकेट अंतरिक्ष में लेकर जाएगा. हमें बहुत खुशी है कि हमने मिशन की सफलता के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ा है. सारी तैयारियां सफलता पूर्वक पूरी हो गई है. लांच होने के बाद चंद्रयान-2 चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव के पास लैंड करेगा.

चांद की कक्षा में पहुंचाया जाएगा
जीएसएलवी को लां‍च करने के लिए वैज्ञानिकों के पास सिर्फ 10 मिनट का ही वक्त होगा. इसलिए प्रक्षेपण से पहले चंद्रयान-2 को ले जाने वाले जीएसएलवी मार्क-3 की बारीकी से अंतिम जांच हो रही है. 22 जुलाई को मार्स-2 लांच होने के बाद कुछ इस तरह आसमान में उड़ान भरेगा.

बाहुबली जीएसएलवी मार्क-3 चंद्रयान 2 आर्बिटर और लैंडर को धरती की कक्षा में स्थापित करेगा. जिसके बाद उसे चांद की कक्षा में पहुंचाया जाएगा. चांद की कक्षा में चंद्रयान-2 के पहुंचने के बाद लैंडर निकलकर चांद की धरती पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा.

नई तकनीक से लैस चंद्रयान-2
चांद की धरती पर सॉफ्ट लैंडिंग के बाद रोवर बाहर निकलेगा और चांद पर चहलकदमी करते हुए इसरो के मिशन और प्रयोग को अंजाम देगा. इसरो डायरेक्टर के सिवन ने बताया कि चंद्रयान-2 को भारत में निर्मित बाहुबली रॉकेट जीएसएलवी मार्क-3 अंतरिक्ष में लेकर जाएगा. नई तकनीक से लैस चंद्रयान-2 सीधे चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव के पास लैंड करेगा.

दुनिया की निगाहें मिशन चंद्रयान-2 के ऊपर
इसरो के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि भारत के महत्वकांक्षी मिशन चंद्रयान- 2 की कमान इसरो की दो महिला वैज्ञानिकों प्रोजेक्ट डायरेक्टर एम वनीता और मिशन डायरेक्टर रिति करिधाल के हाथ में होगी. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन सोमवार को अंतरिक्ष की दुनिया में नया इतिहास रचने जा रहा है.

पूरी दुनिया की निगाहें भारत के अंतरिक्ष मिशन चंद्रयान-2 के ऊपर लगी हुई हैं. इसरो को पूरी उम्मीद है भारत का मिशन चंद्रयान-2 साल 2008 में भारत के मिशन चंद्रयान-1 से ज्यादा कामयाब होगा. चांद की धरती पर चंद्रयान-2 के कदम रखते ही इसरो की इस शानदार कामयाबी पर भारत ही नहीं पूरी दुनिया भी नाज करेगी.

कैसे होगी चन्द्रयान-2 की लॉन्चिंग?
इसरो के मुताबिक, चंद्रयान-2 एक बॉक्स की तरह है. जिसके अंदर रॉकेट लोडेड होगा.

वैज्ञानिक चंद्रयान-2 को पृथ्वी की ऑरबिट में भेजेंगे.

जैसे ही यान ऑर्बिट में जाएगा तो वैज्ञानिक इसकी गति बढ़ा देंगे और चांद की सतह में जाने के बाद इसकी गति धीमी हो जाएगी.

100 किलोमीटर की रफ्तार तय की गई
चंद्रयान-2 की लांचिंग के लिए इसरो ने पूरी तैयारी कर ली है. ये मिशन फेल न हो इसके लिए वैज्ञानिकों ने इसका पूरा ख्याल रखा है. चंद्रयान-2 को ऑरबिट में भेजने के लिए करीब 100 किलोमीटर की रफ्तार तय की गई है. जो इसको थरस्टर्स ताकत प्रदान करेंगे. जब यान चांद पर लैंड करेगा, तब लैंडर विक्रम यान से अलग हो जाएगा और ऑर्बिटर अपना काम करना शुरू कर देगा.

वहीं, वैज्ञानिक चंद्रयान-2 को सुरक्षित स्थान पर उतराने के लिए पहले खोज करेंगे और फिर जाकर लैंड करवाएंगे. करीब 55 दिन बाद चंद्रयान-2 चांद की कक्षा में पहुंचेगा. फिर लैंडर चांद की सतह पर उतरेगा. इसके बाद रोवर उसमें से निकलकर अलग-अलग प्रयोग करेगा.

अभी तक चंद्रमा के साउथ पोल पर लैंडर नहीं उतरा
भारत का चंद्रयान-2 सीधे चंद्रमा के साउथ पोल पर उतरेगा. इतिहास में आज से पहले किसी भी देश ने चंद्रमा के साउथ पोल पर लैंडर नहीं उतरा है. हमेशा अंधेरे में रहने वाले दक्षिणी ध्रुव पर पानी होने की संभावना सबसे ज्यादा है.

चंद्रयान-2 को भारत में बना प्रक्षेपण यान जीएसएलवी मार्क-3 चांद पर लेकर जाएगा. चंद्रयान-2 के सभी पेलोड भारत में बने हैं. चंद्रयान-1 के ऑर्बिटर में यूरोप के 3 और अमेरिका के 2 पेलोड थे. दस साल में दूसरी बार चांद पर फतेह हासिल करने के बाद भारत मिशन चंद्रयान-3 की तरफ बहुत जल्द आगे कदम बढ़ाएगा.

भरत के सबसे महत्वाकांक्षी मिशन मून को पूरा करने के लिए श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र पर चंद्रयान-2 उड़ान भरने के लिए पूरी तरह तैयार है. उल्टी गिनती खत्म होते ही चंद्रयान-2 उड़ान भरने के बाद सीधे चंद्रमा के साउथ पोल पर उतरेगा. आज से पहले चंद्रमा के साउथ पोल पर किसी भी देश का लैंडर नहीं उतरा है.

जानिए जरूरी बातें पॉइंट में
चंद्रयान-2 उड़ान भरने के बाद सीधे चंद्रमा के साउथ पोल पर उतरेगा
चंद्रमा के साउथ पोल पर किसी भी देश का लैंडर नहीं उतरा है
अंधेरे में रहने वाले दक्षिणी ध्रुव पर पानी होने की संभावना ज्यादा है
दक्षिणी ध्रुव के क्रेटर बेहद ठंडे हैं. जहां सोलर सिस्टम के पुराने जीवाश्म मिलने की उम्मीद है
चंद्रयान-2 को प्रक्षेपण यान जीएसएलवी मार्क-3 चांद पर लेकर जाएगा
बाहुबली जीएसएलवी मार्क-3 भारत में बना है
चंद्रयान-2 के सभी पेलोड भारत में बने हैं
चंद्रयान-1 के ऑर्बिटर में यूरोप के 3 और अमेरिका के 2 पेलोड थे
चंद्रयान-2 में 3 मॉड्यूल आर्बिटर, लैंडर और रोवर हैं
रोवर प्रज्ञान सोलर पावर उपकरणों से लैस है
27 किलो वजनी और 1 मीटर लंबा रोवर में 2 पेलोड होंगे
सोलर एनर्जी से चलने वाला रोवर अपने 6 पहियों की मदद से चांद की सतह से मिट्टी और चट्टानों के नमूने जमा करेगा
साल 2008 में चंद्रयान-1 मिशन की कमी से 29 अगस्त 2009 को ही खत्म हो गया था
अबकी बार रोवर के लिए पावर की कोई दिक्कत नहीं होगी
1400 किलो वजनी विक्रम नाम का लैंडर की लंबाई 3.5 मीटर है
3 पेलोड वजन का लैंडर चंद्रमा पर उतरकर रोवर को स्थापित करेगा
3500 किलो वजनी ऑर्बिटर की लंबाई 2.5 मीटर है
ऑर्बिटर अपने साथ 8 पेलोड को लेकर जाएगा
ऑर्बिटर अपने पेलोड के साथ चंद्रमा का चक्कर लगाएगा
ऑर्बिटर और लैंडर धरती से सीधे संपर्क करेंगे
रोवर धरती से सीधे कोई संवाद नहीं कर पाएगा
6 सितंबर को चंद्रमा के साउथ पोल पर चंद्रयान-2 उतरेगा
3800 किलो वजन वाले चंद्रयान-2 पर करीब 1000 करोड़ खर्च हुए हैं
चंद्रयान-2 को तैयार करने में इसरो को 11 साल का वक्त लगा है
चंद्रयान-2 चांद पर पूरे 52 दिन बिताएगा
भारत चांद की सतह पर लैंडिंग करने वाला चौथा देश बनेगा
चंद्रयान-2 की सफलता के बाद मिशन चंद्रयान-3

चंद्रयान-2 के चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश करते ही ऑर्बिटर, लैंडर से अलग हो जाएगा. लैंडर के चंद्रमा की सतह पर उतरते ही रोवर से अलग हो जाएगा. ऑर्बिटर और रोवर कई अत्याधुनिक और संवेदनशील उपकरणों, कैमरों और सेंसर्स से लैस हैं.

ऑर्बिटर और रोवर मिलकर चंद्रमा की सतह पर मिलने वाले मिनरल्स और अन्य पदार्थों के बारे में इसरो को डेटा भेजेंगे. जिसकी सहायता से इसरो चांद की स्टडी करेगा. इसरो का दावा है कि आजतक चंद्रमा के साउथ पोल पर किसी देश का लैंडर नहीं उतरा है.

चंद्रयान-2 चंद्रमा के मौसम के साथ खनिजों और उसकी सतह पर फैले रासायनिक तत्वों का भी अध्ययन करेगा. चंद्रयान-2 की कामयाबी पर चीन और अमेरिका के साथ पूरी दुनिया नजरे गड़ाए बैठी है. 10 साल में दूसरी बार चांद पर मिशन भेजने वाला इसरो चंद्रयान-2 की सफलता के बाद 2020 के अंत तक मिशन चंद्रयान-3 की तरफ कदम बढ़ाएगा.