सोनिया ने अध्यक्ष बनते ही कसे नेताओं के पेंच, अब बैठक में नहीं लाएगा कोई फोन

सोनिया गांधी कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष बनीं तो आते ही उन्होंने बड़ा फैसला ले लिया. अब कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में नेता फोन नहीं ले जा सकेंगे.

कांग्रेस के लिए मुश्किल वक्त चल रहा है. केंद्र में सत्ता से बाहर होने के बाद संगठन में भी अफरातफरी मची है. राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़ा तो पार्टी एक अदद अध्यक्ष नहीं खोज सकी जिस पर गांधी परिवार और संगठन के दूसरे नेता एकमत हो सकें. ऐसे में सोनिया गांधी को ही लौटना पड़ा और अब वो अंतरिम अध्यक्ष हैं. सोनिया गांधी ने लौटते ही सबसे पहले पार्टी को अनुशासन के मोर्चे पर कसा है. उसमें भी सबसे पहला फैसला आया है कि आइंदा कार्यसमिति की बैठकों में मोबाइल फोन ऑफ रखे जाएंगे.

sonia gandhi, सोनिया ने अध्यक्ष बनते ही कसे नेताओं के पेंच, अब बैठक में नहीं लाएगा कोई फोन

सोनिया गांधी ने कांग्रेस की कमान संभालते ही पहला फैसला ही मोबाइल के संबंध में लिया है. उन्होंने किसी भी नेता को कार्यसमिति की बैठक में फोन लेकर आने से मना किया. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कांग्रेसियों को अनुशासन संबंधी कई नए फैसलों से दो-चार होना पड़ेगा. लगातार हार की वजह से नेताओं ने आलाकमान को कमज़ोर मानते हुए खूब मनमानी की है. इसका सबसे ताज़ा उदाहरण अनुच्छेद 370 पर कांग्रेस नेताओं की बयानबाज़ी थी जो कई बार पार्टी की आधिकारिक लाइन से उलट थी.

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आने वाले दिनों में दिल्ली, झारखंड, हरियाणा, महाराष्ट्र में चुनाव होने हैं. लोकसभा चुनावों में हार के बाद देशभर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं में फिर से जोश भरकर उन्हें विधानसभा चुनावों में पूरी ताकत झोकने के लिए तैयार करना भी सोनिया गांधी के लिए बड़ी चुनौती है. हाल ही के दिनों में पार्टी के कई बड़े नेता और पदाधिकारी पार्टी छोड़कर दूसरे दलों में शामिल हो गए हैं, जिनमें बीजेपी प्रमुख है. ऐसे में कांग्रेस संगठन के भीतर प्रदेश स्तर के कई पद खाली पड़े हैं. ऐसे में उन पदों पर नए चेहरों की नियुक्ति सोनिया को ही करनी पड़ेगी. आलम ये है कि जिस दिल्ली और झारखंड में चुनाव होने हैं वहां तक कांग्रेस के पास कोई अध्यक्ष नहीं है.

हरियाणा में भी जल्द चुनाव होने वाले हैं और वहां पार्टी में अंदरूनी कलह बढ़ती जा रही है. चुनावों से पहले हरियाणा में संगठन को एकजुट करना भी सोनिया गांधी के लिए बेहद चनौतीपूर्ण होगा. इसके अलावा महाराष्ट्र में पार्टी को शरद पवार की राकांपा के साथ सीट बांटकर सत्तासीन बीजेपी-शिवसेना को चुनौती देनी है.