क्या जवानों और शहीदों के साथ सियासत कर रही है मोदी सरकार?

सरकार को इसकी आशंका थी कि रैली की खबर पर बिहार के बेटे की शहादत की खबर हावी हो जाती. चुनाव के माहौल में रैली का फीका पड़ना मोदी सरकार को नागवार गुजरता. इसलिए सीआरपीएफ ने सरकार के दबाव में इंस्पेक्टर पिंटू की कुर्बानी की खबर परिवारवालों को पहुंचाने में देर की.

नई दिल्ली: जिस वक्त पूरा हिंदुस्तान वायुसेना के शूरवीर पायलट विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान की रिहाई का इंतजार कर रहा था, ठीक उसी समय कश्मीर के कुपवाड़ा में सीआरपीएफ और जम्मू कश्मीर पुलिस के जांबाज जवान आतंकवादियों से मुठभेड़ कर रहे थे. रात तक दो खबर आई. पहली खबर पर जश्न मना क्योंकि अभिनंदन की घर वापसी हो चुकी थी. दूसरी खबर पर आंसू बहे क्योंकि कुपवाड़ा के आतंकियों का सफाया करने में हमारे पांच योद्धा शहीद हो गए. इनमें से एक थे सीआरपीएफ के बहादुर इंस्पेक्टर पिंटू. जिनकी शहादत पर शायद सियासत हावी हो गई.

बिहार के बेगूसराय के रहने वाले पराक्रमी इंस्पेक्टर पिंटू ने शुक्रवार की रात आतंकवादियों से लड़ते हुए अपनी जान की बाजी लगा दी. ये खबर आग की तरह मीडिया में फैली. लेकिन चौंकाने वाली बात ये है खुद उनके परिवारवालों तक इस खबर को पहुंचने में कई घंटे लग गए. बताया जा रहा है कि सीआरपीएफ ने इसकी पुष्टि तक करने में घंटों लगा दिए. बिहार के एक निजी न्यूज चैनल के मुताबिक कुपवाड़ा के इस एनकाउंटर में बिहार के जमुई का एक जवान भी इंस्पेक्टर पिंटू के साथ आतंकवादियों का मुकाबला कर रहे थे. उन्होंने अपने घर फोन कर बेगूसराय में इंस्पेक्टर पिंटू के परिवारवालों को इसकी खबर देने को कहा. परिवारवालों ने इसकी पुष्टि के लिए कई बार सीआरपीएफ बेस कैंप में फोन किया. लेकिन कोई साफ जवाब नहीं आया. शहीद इंस्पेक्टर के परिवारवाले रात भर परेशान रहे. सुबह भी कोशिश की. बताया जाता है फिर बिहार के ही किसी जवान ने फोन पर इंस्पेक्टर पिंटू की शहादत की पुष्टि की.

सवाल ये है कि क्या एक शहीद की मौत को दबाने की कोशिश की गई? क्या इंस्पेक्टर पिंटू के परिवारवालों को अंधेरे में रखा गया? बिहार के निजी न्यूज चैनल का दावा है कि शहीद की मौत पर सियासत हो रही है. और इस सियासत की वजह बताई जा रही है 3 मार्च को पटना में होने वाली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की संपर्क रैली. पटना एयरपोर्ट इस रैली की वजह से वीवीआईपी मूवमेंट काफी तेज हो चुकी है.

चैनल का दावा है कि रैली की तैयारी में जुटी केन्द्र और बिहार सरकार इसमें कोई रुकावट नहीं चाहती. अगर रैली नहीं होती तो इंस्पेक्टर की शहादत की पुष्टि होने के साथ ही उनका पार्थिव शरीर परिवारवालों तक पहुंचाने की कार्रवाई तेज हो जाती. पार्थिव शरीर पहले पटना एयरपोर्ट पर उतारा जाता जिसके बाद काफिला उनके पैतृक शहर बेगूसराय के लिए निकलता. लेकिन रैली की तैयारी की बीच ऐसा करने से वीवीआईपी मेहमानों की आवाजाही में रुकावट होती.

इसके अलावा सरकार को इसकी आशंका थी कि रैली की खबर पर बिहार के बेटे की शहादत की खबर हावी हो जाती. चुनाव के माहौल में रैली का फीका पड़ना मोदी सरकार को नागवार गुजरता. इसलिए सीआरपीएफ ने सरकार के दबाव में इंस्पेक्टर पिंटू की कुर्बानी की खबर परिवारवालों को पहुंचाने में देर की. ताकि उनका पार्थिव शरीर लाने में देरी की गुंजाईश बनी रहे.. और रैली के बाद ही उनकी बॉडी पटना पहुंचाई जाए.

बिहार के निजी न्यूज चैनल का दावा है कि मुख्यमंत्री कार्यालय उनकी खबर के बाद हरकत में आई. दिल्ली में सीआरपीएफ मुख्यालय से संपर्क किया गया. और इंस्पेक्टर पिंटू के शहीद होने की पुष्टि हुई. जिसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस बारे में एक प्रेस विज्ञप्ति जारी किया. और शहीद के परिवार के साथ खड़े होने का भरोसा दिया.