मोहन भागवत बोले- संविधान के अलावा कोई दूसरा शक्ति केंद्र होगा तो हम करेंगे विरोध

संघ प्रमुख ने कहा, 'जो जो आरोप हम पर लगाते हैं वो आरोप उन पर ही लगते हैं. वो एक वहम पैदा करके भीड़ जमा कर रहे हैं. लेकिन हमें भीड़ जमा नहीं करना है.'

उत्तर प्रदेश के बरेली में संघ प्रमुख (RSS Chief) मोहन भागवत ने कहा कि संविधान कहता है कि हमें भावनात्मक एकीकरण लाने की कोशिश करनी चाहिए. लेकिन भावना क्या है?वो भावना है- यह देश हमारा है, हम अपने महान पूर्वजों के वंशज हैं और हमें अपनी विविधता के बावजूद एक साथ रहना होगा. इसे ही हम हिंदुत्व कहते हैं.

‘संघ समाप्त नहीं हुआ’

उन्होंने कहा कि हम शक्ति का कोई दूसरा केंद्र नही चाहते. संविधान के अलावा कोई शक्ति केंद्र होगा तो हम उसका विरोध करेंगे. क्योंकि ये विचार पहले से तय है. संघ को समाप्त करने न जाने कितने लोग आए लेकिन संघ समाप्त नहीं हुआ. संघ को समाप्त करने वाले लोग समाप्त हो गए.

‘हमें भीड़ जमा नहीं करना’

संघ प्रमुख ने कहा, ‘जो जो आरोप हम पर लगाते हैं वो आरोप उन पर ही लगते हैं. वो एक वहम पैदा करके भीड़ जमा कर रहे हैं. लेकिन हमें भीड़ जमा नहीं करना है. हमारे मन मे गुस्सा नहीं है. संघ की शाखाओं में भारत से प्रेम करना सिखाया जाता है. संघ में भारत की सभी पूजाओं को प्रतिनिधि है.’

उन्होंने कहा कि हम और आप सभी एक देश के नागरिक हैं. अगर कोई कहता है कि हम हिंदू नहीं कहेंगे, भारतीय कहेंगे तो हमें इसमें भी कोई ऐतराज नहीं है.

दो बच्चों के कानून से जुड़ी खबरों का किया खंडन

जनसंख्या नियंत्रण के तहत दो बच्चों के कानून को आरएसएस के समर्थन की खबरों को लेकर भागवत ने कहा, ‘कई जगह यह प्रकाशित किया गया था कि मैंने कहा कि सभी के दो बच्चे होने चाहिए, लेकिन मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा. मैंने कहा कि जनसंख्या समस्या के साथ-साथ संसाधन भी है, इसलिए इस संबंध में एक नीति का मसौदा तैयार किया जाना चाहिए.’ उन्होंने कहा कि सरकार की नीति तय करेगी कि एक व्यक्ति के कितने बच्चे होने चाहिए.

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