सितंबर के आखिर में क्यों हो रही उमस भरी गर्मी? जानें कब तक राहत मिलने के आसार

विशेषज्ञों का कहना है कि अगले 10-13 दिनों तक ऐसी ही उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ेगा, जब तक कि मानसून (Monsoon) बिना बारिश के इलाके से पूरी तरह से नहीं चला जाता. मानसून के जाने के बाद मौसम काफी खुशनुमा हो जाएगा. लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिलेगी.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 8:20 am, Sun, 20 September 20

उत्तर भारत (North India) के लोग पिछले कुछ दिनों से बढ़ी हुई गर्मी (Heat) और उमस (Humidity) का सामना कर रहे हैं. सितंबर (September) महीने में उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत से मानसून (Monsoon) जा चुका है. ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा गर्मी और उमस इस सीजन का आखिरी दौर है. दरअसल, इस बार बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) से मानसून का गर्त सामान्य उत्तर-पश्चिम की बजाय पश्चिमी दिशा की ओर जा रहा है.

विशेषज्ञों का कहना है कि अगले 10-13 दिनों तक ऐसे ही उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ेगा, जब तक कि मानसून बिना बारिश कराए इलाके से पूरी तरह से नहीं चला जाता. मानसून के जाने के बाद मौसम काफी खुशनुमा हो जाएगा. लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिलेगी.

सितंबर में कई इलाकों से सामान्य से कम बारिश

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, सितंबर में भारत के उत्तरी इलाके में सामान्य से 99 फीसदी तक कम बारिश हुई, जो कि देश के किसी भी क्षेत्र के लिए सबसे अधिक है. वहीं कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे दक्षिणी राज्यों में इसी अवधि के दौरान 50 फीसदी अधिक बारिश हुई. कर्नाटक में चित्रदुर्ग जिले में 245 फीसदी से अधिक बारिश हुई.

हिमाचल के जनजातीय जिले किन्नौर, जो इस महीने स्वादिष्ट शाही सेब के लिए जाना जाता है, में 88 फीसदी कम बारिश हुई. यह राज्य के किसी भी जिले के लिए सबसे अधिक है. सितंबर में ही उत्तर प्रदेश में बुलंदशहर और मथुरा जिलों में 100% बारिश की कमी की रिकॉर्डिंग के साथ पश्चिमी हिस्से लगभग सूखे थे.

मानसून के अक्टूबर में जाने की संभावना 

आईएमडी के क्षेत्रीय पूवार्नुमान केंद्र के प्रमुख कुलदीप श्रीवास्तव के अनुसार, दक्षिण पश्चिम मानसून जोकि 25 जून को दिल्ली आया था उसे लंबे समय तक टिकने के बाद अक्टूबर में जाने की संभावना है.

निजी पूवार्नुमान एजेंसी स्काईमेट वेदर ने कुछ दिनों पहले बताया था कि ‘चार महीने का रेनी सीजन लगभग 80 प्रतिशत समाप्त हो चुका है. इस दौरान देश में अब तक 800 मिमी बारिश हुई है, जो एलपीए का 9 प्रतिशत सरप्लस है.’