मानसून सत्र: प्रश्नकाल हटाए जाने पर विपक्ष का सरकार पर हमला, ओवैसी ने बताया- संसदीय लोकतंत्र की हत्या

हालांकि, संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि यह फैसला लेने से पहले सभी दलों की सहमति ली गई थी. बावजूद इसके कांग्रेस (Congress), तृणमूल कांग्रेस (TMC) और AIMIM के सांसदों ने फैसले का विरोध किया.

कोरोना काल में संसद के मानसून सत्र का आज पहला दिन है. इस दौरान विपक्ष ने सत्र से प्रश्नकाल हटाए जाने का मुद्दा उठाया. इसी कड़ी में AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार के इस फैसले को संसद के लोकतंत्र की हत्या करार दिया है.

हालांकि, संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि यह फैसला लेने से पहले सभी दलों की सहमति ली गई थी. बावजूद इसके कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और AIMIM के सांसदों ने फैसले का विरोध किया.

ANI न्यूज एजेंसी के मुताबिक, असदुद्दीन ओवैसी ने प्रश्नकाल को खत्म करने के मुद्दे पर विभाजन की मांग की, जिसे लोकसभा स्पीकर ने नकार दिया. इतना ही नहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी विपक्ष को यह कह कर चुप कराने की कोशिश की कि उन्होंने भी इस मुद्दे पर कई नेताओं से बात की थी.

राजनाथ सिंह ने की विपक्ष को शांत करने कोशिश

राजनाथ सिंह ने कहा, “ये सामान्य स्थितियां नहीं हैं और सदन चार घंटे बैठेगा. हमने शून्य काल की अनुमति दी, जहां आप तारांकित प्रश्न पूछ सकते हैं और उत्तर आपको दिया जाएगा. साथ ही अगर आप जवाब से संतुष्ट नहीं हैं तो मंत्री से पूछ सकते हैं.” चौधरी ने कहा, “प्रश्नकाल को संसद के सार के रूप में पहचाना जाता है. यह हमारे लिए एक सुनहरे मौके की तरह है. अगर हम सत्र चला रहे हैं, तो प्रश्नकाल को शामिल क्यों नहीं किया गया. यह लोकतंत्र की हत्या है.”

“हम अपनी असहमति दर्ज करना चाहते हैं”

वहीं ओवैसी ने असहमति दर्ज करने के लिए प्रश्नकाल को समाप्त करने के मुद्दे पर विभाजन की मांग की. ओवैसी ने बहस के बीच चिल्लाते हुए कहा, “हम अपनी असहमति दर्ज करना चाहते हैं. आप प्रश्नकाल की अनुमति नहीं देकर संसद के लोकतंत्र को नष्ट कर रहे हैं.” इसी तरह, तृणमूल कांग्रेस सांसद कल्याण बनर्जी ने स्पीकर से प्रश्नकाल की अनुमति न देकर प्रश्न पूछने के अधिकार का लाभ नहीं लेने को कहा.

लोकसभा सचिवालय ने बताया कि मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा की कार्यवाही में 359 सदस्यों ने भाग लिया है.

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