जयराम रमेश बोले- किसानों के हित में नहीं कृषि संबंधित तीनों अध्यादेश, कांग्रेस भी इनके खिलाफ

जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने बताया कि पंजाब के विधानसभा में भी इसके खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया गया था. हमारा मानना है कि ये तीन कृषि संबंधित अध्यादेश किसानों के हित में नहीं हैं. किसान संगठन भी इसका विरोध कर रहे हैं.

लोकसभा (Lok Sabha) और राज्यसभा (Rajya Sabha) का मानसून सत्र (Monsoon Session) शुरू होने वाला है. पिछले 3-4 महीनों में इस सत्र के लिए जो 11 अध्यादेश प्रख्यापित किए गए हैं, वो पार्लियामेंट में विधेयक के रूप में पेश किए जाएंगे. इन 11 अध्यादेशों को लेकर लोकसभा और राज्यसभा में कांग्रेस ने अपना स्टैंड साफ कर दिया है. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बताया कि तीन अध्यादेशों का हम बिल्कुल स्पष्ट तरीके से विरोध कर रहे हैं. इसमें कोई किंतु नहीं है, परंतु नहीं है. स्पष्ट तरीके से 100 प्रतिशत कृषि संबंधित तीन अध्यादेश, जो जारी किए गए थे, इसके हम खिलाफ हैं.

उन्होंने कहा, “जैसा कि आप लोग जानते होंगे ये 2 अध्यादेश एग्री मार्केटिंग पर हैं और तीसरा वाला इसेंशियल कमोडिटी कानून पर है. इसके संबंध में हमारे मुख्यमंत्री, पंजाब के मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, राजस्थान के मुख्यमंत्री, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री… सब लोगों ने प्रधानमंत्री को खत लिखा.”

‘किसानों के हित में नहीं हैं ये अध्यादेश’

जयराम रमेश ने बताया कि पंजाब के विधानसभा में भी इसके खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया गया था. हमारा मानना है कि ये तीन कृषि संबंधित अध्यादेश किसानों के हित में नहीं हैं. किसान संगठन भी इसका विरोध कर रहे हैं. कई प्रदेशों में और जो कृषि पर आधारित राज्य हैं, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, इनके रेवेन्यू पर भी काफी नकारात्मक असर पड़ेगा. इससे सिर्फ निजी कंपनियां फायदा उठा सकती हैं. कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग होगा, कॉर्पोरेट फार्मिंग होगा और जो पिछले 50 सालों में एक हमारी प्रणाली है, एमएसपी की प्रणाली, न्यूनतम समर्थन मूल्य की प्रणाली, उसको खत्म किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि पब्लिक प्रोक्योरमेंट और फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, जो अनाज खरीदती है, सार्वजनिक वितरण के लिए, उसको भी खत्म किया जा रहा है. जनवरी, 2015 में हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के सांसद शांता कुमार के नेतृत्व में एक समिति की एक रिपोर्ट आई थी. वो रिपोर्ट सरकार को भी पेश की गई थी और उसी रिपोर्ट की सिफारिशों के आधार पर ये अध्यादेश आए हैं.

‘सभी राज्यों में हो रहा इनके खिलाफ प्रदर्शन’

कांग्रेस नेता ने कहा, “हमारा ये मानना है, जैसा कि मैंने कहा मैं फिर से दोहराऊंगा, इसमें कोई शक नहीं होना चाहिए, हम इसका कड़ा विरोध करेंगे. हरियाणा, पंजाब, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, सभी राज्यों में इसके खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं. एमएसपी और पब्लिक प्रिक्योरमेंट, जो हमारे खाद्य सुरक्षा के स्तंभ हैं, वो ना केवल कमजोर होंगे, बल्कि वो खत्म हो जाएंगे. ये किसानों के हित में नहीं है.”

उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में कृषि से उनकी आमदनियों में फायदा होता है, जैसा मिसाल के तौर से पंजाब, हरियाणा, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, इन राज्यों के खिलाफ है. सबसे बड़ी बात केन्द्र सरकार ने राज्य सरकारों के साथ कोई विचार-विमर्श नहीं किया. कृषि तो एक राज्यों की सूची में आती है, संविधान में. पर ये कृषि संबंधित अध्यादेश के बारे में अफसरों के स्तर पर या मंत्रियों के स्तर पर कोई विचार-विमर्श नहीं हुआ और अचानक ये अध्यादेश प्रख्यापित किए गए.

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