महात्मा गांधी की याद में दिल्ली में “मानस-हरिजन”, मोरारी बापू सुनाएंगे रामकथा

रामकथा "मानस हरिजन" का शुभारंभ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों होगा.

रामराज्यवादी बापू (महात्मा गांधी) की याद में रामकथावादी बापू(मोरारी बापू) की रामकथा “मानस हरिजन”।

देश को रामराज्य की संकल्पना और सपना देने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (बापू) की 150वीं जन्म जयंती सेलिब्रेशन के उपलक्ष्य में रामकथा को देश-विदेश में प्रसिद्धि देने वाले मशहूर संत-कथाकार मोरारी बापू (बापू) का दिल्ली में रामकथा होने जा रहा है.

मोरारी बापू के हरेक रामकथा का कोई ना कोई थीम होता है इसी कड़ी में महात्मा गांधी के विचारों को समर्पित इस रामकथा का थीम और नाम होगा “मानस-हरिजन”. रामकथा “मानस हरिजन” का आधार तुलसीदास के रामचरित मानस ही होगा.

“मानस हरिजन” का आयोजन हरिजन सेवक संघ में

यह रामकथा “मानस हरिजन” दिल्ली के हरिजन सेवक संघ, गांधी आश्रम, किंग्सवे कैम्प में आयोजित होगा. अस्पृश्यता के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे महात्मा गांधी ने हरिजन सेवक संघ की स्थापना पूना समझौता के महज 5 दिन बाद ही 1932 में किया था. तब इसका नाम “आल इंडिया एन्टी एंटीटचीब्लिटी लीग” रखा गया था जो बाद में हरिजन सेवक संघ के नाम से जाना गया.

अप्रैल 1946 से जून 1947 के बीच महात्मा गांधी इस हरिजन सेवक संघ के एक कमरे वाले “बाल्मीकि भवन” में 14 महीने तक रहे. संघ ग़ैर सरकारी संस्था के तौर पर करता रहा. अब हरिजन सेवक संघ के देखरेख का जिन्ना संस्कृति और पर्यटन मंत्रालय के अंतर्गत है. लिहाज़ा रामकथा उद्घाटन के दिन केंद्रिय संस्कृति और पर्यटन मंत्री प्रह्लाद पटेल विशेष अतिथि के तौर पर मौजूद रहेंगे.

24 सितम्बर को रामकथा की शुरुआत क्यों है ख़ास –

मोरारी बापू रामकथा “मानस हरिजन” की शुरुआत सदभावना दिवस के दिन 24 सितम्बर से करेंगे. 9 दिनों तक चलने वाला रामकथा “मानस हरिजन” महात्मा गांधी के जन्मदिन यानि अहिंसा दिवस 2 अक्टूबर को ख़त्म होगा. 24 सितम्बर को देश के कैलेंडर में सदभावना दिवस के रूप में इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन प्रसिद्ध “पूना पैक्ट” पर साइन हुआ था.

24 सितम्बर 1932 में पूना के यरवदा सेंट्रल जेल में महात्मा गांधी और भीमराव अंबेडकर के मध्य हुए इस ऐतिहासिक समझौता में डॉ अम्बेडकर ने दलितों के लिए अलग निर्वाचन मंडल की मांग को छोड़ दिया था लेकिन प्रांतीय विधानमंडल में दलितों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या 71 से बढ़ा कर 148 कर दी गयी थी और केंद्रीय विधायिका में दलित वर्ग के लिए आरक्षित सीटों की अनुपात 18% कर दिया गया था.

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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद रामकथा द्वारा उद्घाटन के मायने

रामकथा “मानस हरिजन” का शुभारंभ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों होगा. चूंकि देश के प्रथम नागरिक राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी दलित वर्ग से आते हैं लिहाजा उनके हाथों रामकथा का शुभारंभ होने से देश के दलित विमर्श और चिंतन को एक नया आयाम मिलेगा. इससे गांधी के समतामूलक समाज और दलित उत्थान के सिद्धांत की ओर बढ़ते भारत की संकल्पना को बल विशेष मिलेगा.

इससे अलग श्री कोविंद का मोरारी बापू के प्रति असीम श्रद्धा भी है. राष्ट्रपति कोविंद लंबे समय से बापू का कथा सुनते रहे हैं. बापू से जुड़े उनके मानने वाले बताते हैं कि जब राष्ट्रपति कोविंद बिहार के राज्यपाल थे तब मोरारी बापू पटना में रामकथा कर रहे थे, एक दिन कथा के बाद जब श्री कोविंद बापू से मिलने पहुंचे तो बापू ने उन्हें आशीर्वाद स्वरूप दिल्ली में किसी बड़े पद पर जाने की भविष्यवाणी कर दी थी. उसके कुछ ही महीनों बाद उन्हें राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बना दिया गया था. तब से उनकी श्रद्धा और बढ़ती चली गयी.

सदभावना दिवस से अहिंसा दिवस तक रामकथा-

कुल मिलाकर महात्मा गांधी के 150वीं जन्म-जयंती के उपलक्ष्य में 1932 में राष्ट्रपिता बापू द्वारा दिल्ली में स्थापित दलित चेतना का केंद्र हरिजन सेवक संघ में “मानस हरिजन” का शुभारंभ देश के महामहिम राष्ट्रपति महोदय (जो स्वयं दलित वर्ग से आते है) के हाथों होगा. कथा की शुरुआत पूना पैक्ट के लिए मशहूर सदभावना दिवस यानी 24 सितम्बर को होगा और अंत महात्मा गांधी के जन्मदिन यानी अहिंसा दिवस पर 2 अक्टूबर को होगा.