आठ दिन पहले खत्म हुआ संसद का मानसून सत्र, लोकसभा में हुआ 167 फीसदी अधिक काम

कोरोना (Corona) के चलते संसद का मानसून सत्र (Monsoon Session) भले ही कम अवधि का रहा हो लेकिन इस सत्र में 167 फीसदी अधिक काम हुआ.

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कोरोना (Corona) के चलते अपनी तय अवधि से 8 दिन पहले स्थगित लोकसभा के मानसूत्र सत्र (Monsoon Session) में 167 फीसदी अधिक काम हुआ. इस दौरान कई अहम बिल पास हुए. सत्र के आखिरी दिन विपक्ष ने रविवार को राज्यसभा में हुए उपद्रव के विरोध में वॉक आउट किया.

मानसून सत्र 2020 में लोकसभा से 25 विधेयक पारित हुए. लगातार 10 दिनों तक लोकसभा की बैठकें बिना किसी अवकाश के हुईं, जिसमें कुल 37 घंटे की तुलना में 60 घंटे की कार्यवाही पूरी हुई. इस दौरान 68 प्रतिशत समय में विधायी कामकाज और बाकि बचे हुए समय में शून्य काल और डिबेट हुईं.

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स्पीकर ओपी बिरला ने कहा, ‘यह सत्र एक अनोखे समय में आयोजित हुआ है. मुझे खुशी है कि सभी सदस्यों ने अपना सक्रीय सहयोग दिया और सकारात्मक भागीदारी निभाई. शून्यकाल में 370 सांसदों ने अपने मुद्दों को सदन में उठाया, इनमें से 88 सांसदों को 20 सितंबर को बोलने का मौका मिला जब सदन की कार्यवाही देर रात तक चली. इस सत्र में नियम 377 के तहत 181 मामले लोक महत्व के भी उठाए गए.

10 दिनों की कार्यवाही में 78 महिला सांसदों में से 60 को सदन में बोलने का अवसर मिला. सरकार ने 2300 प्रश्नों के उत्तर दिए. कोरोना काल में चुनौतियों का सामना करते हुए सदन की कार्यवाही को संचालित करने के लिए संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने स्पीकर ओम बिरला की प्रशंसा की. कोरोना काल के चलते सत्र की अवधि कम कर दी गई थी इसलिए कोई प्राइवेट मेंबर (सांसद) बिल सदन में पेश नहीं हुआ.

इस साल सदन के मानसून सत्र में कई अहम बिल पास हुए. इसमें आवश्यक वस्तु अधिनियम (संशोधन) 2020, कृषक उत्पाद व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरण) बिल 2020, कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौता बिल, 2020, लेबर कोड बिल, FCRA संशोधन जैसे बिल अहम हैं.

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