पहाड़ काटकर नहर बनाई तो पद्मश्री मिला, अब चींटियों के अंडे खाने को मजबूर दैतारी नायक

नायक ने ओडिशा में पहाड़ काटकर सिंचाई के लिए 3 किलोमीटर लंबी नहर का रास्‍ता बना दिया था.

नई दिल्‍ली: इस साल पद्मश्री पाने वाले ओडिशा के दैतारी नायक ने सम्‍मान वापस करने की पेशकश की है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नायक का कहना है कि देश का चौथा सर्वोच्‍च नागरिक सम्‍मान उनके लिए आजीविका पाने की राह में रोड़ा बन रहा है. नायक ने ओडिशा में पहाड़ काटकर सिंचाई के लिए 3 किलोमीटर लंबी नहर का रास्‍ता बना दिया था.

पहाड़ी नदी की एक धारा का पानी गांव तक पहुंचाने के लिए अथक परिश्रम किया. उन्‍होंने कुदाल के सहारे पहाड़ काटते हुए तीन किलोमीटर लंबी नहर खोद डाली थी. 2018 में उनकी मेहनत रंग लाई जब उनकी बनाई नहर का पानी गांव तक पहुंचा और 100 एकड़ से ज्‍यादा जमीन की सिंचाई हो सकी.

दैतारी नायक ने कहा है कि पद्मश्री मिलने के बाद कोई उन्‍हें काम नहीं दे रहा. उन्‍होंने कहा, “पद्मश्री सम्‍मान ने मेरी कोई मदद नहीं की. पहले मुझे दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम मिल जाता था. अब लोग मुझे कोई काम नहीं दे रहे क्‍योंकि उन्‍हें लगता है कि यह मेरी शान से कमतर है. हम इस वक्‍त चींटियों के अंडे खाकर जी रहे हैं.”

जहां बकरियां बांधी, वहीं टांग रहा है पद्मश्री मेडल

नायक ने बताया कि घर चलाने के लिए वह तेंदू के पत्‍ते और आम के पापड़ बेचते हैं. उन्‍होंने कहा कि वह अवार्ड लौटाना चाहते हैं ताकि उन्‍हें कोई काम मिल सके. नायक को हर महीने 700 रुपये की पेंशन मिलती है, जिसमें उनके परिवार का गुजारा नहीं चलता. कुछ साल पहले इंदिरा आवास योजना के तहत उन्‍हें जो घर अलॉट हुआ था, वह अधूरा ही पड़ा है इसलिए वह पुराने घर में ही रहने को मजबूर हैं.

दैतारी ने बकरियों को बांधने वाली जगह पर अपना पद्मश्री मेडल टांग दिया है. नायक के बेटे आलेख ने कहा कि सरकार ने उनके पिता से किए वादे नहीं निभाए. एक सड़क और नहर की कटान रोकने का इंतजाम करने का वादा था, मगर कुछ नहीं हुआ.

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