कृष्‍णानंद राय हत्‍याकांड के सभी आरोपी बरी, जानें 13 साल पहले 400 गोलियां दागने की पूरी कहानी

जिस नित्यानंद राय हत्याकांड पर यूपी में खलबली मच गई थी उसकी 13 साल तक सुनवाई के बाद सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया है. सीबीआई उतने सबूत ही नहीं जुटा सकी कि अंसारी बंधुओं को दोषी ठहराया जाता.

बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से सभी आरोपियों को मुक्ति मिल गई है. साल 2005 में  अंजाम दिए गए इस हत्याकांड में बीएसपी विधायक मुख्तार अंसारी और मुन्ना बजरंगी के अलावा 5 लोगों पर इल्ज़ाम थे. बजरंगी की मौत पिछले दिनों जेल में ही कर दी गई थी. इन दो के अलावा संजीव माहेश्वरी, एजाजुल हक, राकेश पांडेय, रामू मल्लाह, मंसूर अंसारी, अफज़ाल अंसारी का नाम भी हत्याकांड में आया था.

दरअसल सीबीआई कोर्ट ने सभी को सबूतों के अभाव में बरी किया है. आपको बता दें कि साल 2005 में जब ये वारदात हुई तब इसने यूपी की राजनीति मे खलबली मचा दी थी. मौजूदा रक्षामंत्री तब इस हत्या के विरोध में धरने पर बैठ गए थे. उनके चंदौली में धरने के बाद छानबीन की काम सीबीआई को सौंप दिया गया था.

आरोप था कि कृष्णानंद राय की हत्या में अंसारी भाइयों का हाथ है. मुन्ना बजरंगी ने राय पर एके-47 से चार सौ गोलियां उनके कहने पर ही दागी थीं. कहा गया कि अंसारी बंधु पूर्वांचल में सरकारी ठेकों और वसूली के कारोबार पर वर्चस्व जमाए थे लेकिन धीरे-धीरे कृष्णानंद राय उभरने लगे. इससे ही टकराव की स्थिति पैदा हो गई. कहा ये भी गया कि मुख्तार अंसारी के दुश्मन माफिया डॉन बृजेश सिंह की राय से करीबी थी जिसने अंसारी बंधुओं को मुश्किल में डाल दिया था.

29 नवंबर 2005 की शाम भांवरकोल के बसनिया पुलिया के करीब ही कुछ अपराधियों ने घेरकर कृष्णानंद राय और उनके साथियों को भून डाला था. राय के साथ उनके छह साथियों की भी जान चली गई थी जिनमें मोहम्मदाबाद के पूर्व ब्लॉक प्रमुख श्यामाशंकर राय, भांवरकोल ब्लॉक के मंडल अध्यक्ष रमेश राय, अखिलेश राय, मुन्ना यादव, शेषनाथ पटेल और बॉडीगार्ड नारायण उपाध्याय शामिल थे. सभी 7 लोगों के शरीर में से 67 गोलियां मिली थीं.

सब लोग जानकर हैरान रह गए थे कि नित्यानंद राय की मुखबिरी करनेवाले ने सटीक जानकारियां दी थीं. मारनेवालों ने दिन भी वो चुना था जब वो अपनी बुलेटप्रूफ गाड़ी में नहीं थे.